Corona Relief Package

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो साभार: पीआईबी)

कृषि विधेयक और श्रम क़ानून में बदलाव: महामारी के बीच मोदी सरकार का विध्वंसकारी खेल

ऐसे समय में जब भारतीय अर्थव्यवस्था लगभग तबाह हो चुकी है, तब सुधारों के नाम पर किसानों और कामगारों के बीच उनकी आय को लेकर आशंकाएं और मानसिक परेशानियां पैदा करना सही नहीं है.

(फोटो: रॉयटर्स)

कोविड संकट के बीच दस राज्यों पर मनरेगा मज़दूरों की क़रीब 782 करोड़ रुपये मज़दूरी बकाया

लोकसभा में पेश जानकारी के मुताबिक़ ऐसे राज्यों में सबसे ऊपर पश्चिम बंगाल है, जहां लगभग 397 करोड़ रुपये की मनरेगा मज़दूरी का भुगतान नहीं हुआ है. यह दस राज्यों में कुल लंबित राशि का क़रीब 50 फीसदी है. इसके बाद उत्तर प्रदेश है, जहां 121.78 करोड़ रुपये की मनरेगा मज़दूरी नहीं दी गई है.

(फोटो: रॉयटर्स)

मनरेगा: पांच महीने में 64 फ़ीसदी बजट ख़त्म, काम मांगने वाले 1.55 करोड़ लोगों को नहीं मिला काम

पीपुल्स एक्शन फॉर एम्प्लॉयमेंट गारंटी नाम के एक समूह ने मनरेगा पर एक रिपोर्ट जारी कर तेज़ी से ख़त्म होती आवंटित राशि की ओर ध्यान दिलाते हुए सरकार से आवंटन तथा कार्य दिवस तत्काल बढ़ाने की मांग की है.

Jodhpur: Minister Narendra Modi inspects the guard of honour during 'Parakram Parv', an exhibition to commemorate the second anniversary of the surgical strikes, in Jodhpur, Friday, Sept 28, 2018. Defence Minister Nirmala Sitharaman (2nd R) is also seen. (PTI Photo) (PTI9_28_2018_000019B)

रक्षा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा बढ़ाकर 74 फीसदी करने में ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ की शर्त जोड़ी गई

नई नीति के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने की क्षमता रखने वाले रक्षा क्षेत्र में किसी भी विदेशी निवेश की समीक्षा करने का सरकार को अधिकार रहेगा. बीते मई में ​कोरोना आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा था कि रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी किया जाएगा.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था में आएगी 10.5 प्रतिशत की गिरावट: फिच रेटिंग्स

फिच के अलावा इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था में 11.8 प्रतिशत की गिरावट आएगी. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी में 23.9 प्रतिशत की गिरावट आई है. यह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट के सबसे ऊंचे आंकड़ों में से एक है.

(फोटो: पीटीआई)

गर्त में जीडीपी: मोदी के ‘सब चंगा सी’ रवैये से इस संकट का हल नहीं निकलेगा

मुख्य आर्थिक सलाहकार आश्वस्त कर रहे हैं कि सरकार के पास भविष्य में सही समय पर जारी करने के लिए काफी संसाधन हैं. लेकिन सौ सालों में एक बार आने वाले आर्थिक संकट का सामना कर रही अर्थव्यवस्था के पास बस एक ही चीज़ की किल्लत होती है और वह है समय.

(फोटो: पीटीआई)

आत्मनिर्भर भारत: प्रवासी मज़दूरों के लिए आवंटित खाद्यान्न में से सिर्फ 33 फीसदी का वितरण हुआ

केंद्र द्वारा ‘सफल’ घोषित की गई इस योजना के तहत आठ लाख टन खाद्यान्न वितरण का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार इसमें से सिर्फ 2.65 लाख टन राशन का वितरण हुआ है.

सुप्रीम कोर्ट. (फोटो: द वायर)

केंद्र ने कोर्ट से कहा, लोन किस्त के भुगतान पर लगी रोक दो साल के लिए बढ़ाई जा सकती है

सुप्रीम कोर्ट कोरोना महामारी के चलते क़र्ज़ की किस्त अदायगी को स्थगित किए जाने के दौरान लोन पर ब्याज लेने के मुद्दे पर सुनवाई कर रही है. इस मामले में अपना रुख़ साफ़ नहीं करने के कारण पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र को फटकार लगाई थी.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी में रिकॉर्ड 23.9 फीसदी की गिरावट

राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, जून तिमाही में ​सिर्फ़ कृषि, वानिकी और मत्स्य उद्योग में विकास दर्ज की गई है. तीनों क्षेत्रों में विकास दर ​3.4 प्रतिशत रही. साल 1996 में जीडीपी वृद्धि के तिमाही आंकड़े देने की शुरुआत किए जाने के बाद से यह सबसे ज़्यादा गिरावट है.

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

क़र्ज़ अदायगी से छूट के दौरान ब्याज लगाने पर कोर्ट ने कहा- आरबीआई के पीछे छिप रही सरकार

कोरोना महामारी के चलते क़र्ज़ की किस्तों को स्थगित किए जाने के दौरान लोन पर ब्याज लेने के मुद्दे पर अपना रुख़ साफ नहीं करने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि समस्या आपके लॉकडाउन द्वारा पैदा की गई है. ऐसा प्रतीत होता है कि भारत सरकार स्वतंत्र फैसला नहीं ले रही है और आरबीआई पर निर्भर है.

Mumbai: A security personnel stands guard during the RBI's bi-monthly policy review, in Mumbai, Thursday, June 6, 2019. (PTI Photo/Mitesh Bhuvad) (PTI6_6_2019_000048B)

कोरोना महामारी से ग़रीब सबसे ज़्यादा प्रभावित, मांग को पटरी पर आने में लंबा समय लगेगा: आरबीआई

आरबीआई ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि भारत को सतत वृद्धि की राह पर लौटने के लिए तेज़ी से और व्यापक सुधारों की ज़रूरत है. रिपोर्ट में कहा गया है अब तक सकल मांग के आकलन से पता चलता है कि खपत पर असर काफ़ी गंभीर है. केंद्रीय बैंक ने कहा है कि इस महामारी ने एक नई असमानता को उजागर किया है.

फोटो: रॉयटर्स

कृषि के लिए 1 लाख करोड़ का पैकेज इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की हक़ीक़त पर पर्दा डालने की कोशिश है

देश का इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पैसे के लिए मोहताज है, लेकिन सरकार हवाई क़िले बनाकर देश को इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के एक्सप्रेस-वे पर दौड़ाने का स्वांग रच रही है. कृषि क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान इसी स्वांग का हिस्सा है.

New Delhi: Reserve Bank of India Governor Shaktikanta Das interacts with the media at the RBI office, in New Delhi, Monday, Jan. 7, 2019.(PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI1_7_2019_000090B)

आरबीआई की नीतिगत ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं, जीडीपी वृद्धि नकारात्मक रहने का अनुमान

रिज़र्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद कहा कि प्रमुख नीतिगत दरों को यथावत रखा गया है. उन्होंने यह भी कहा कि कोविड-19 महामारी के प्रभाव को कम करने और अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए जब तक जरूरत है तब तक मौद्रिक नीति का स्थायी रुख बना रहेगा.

(फोटो: पीटीआई)

मौजूदा वित्त वर्ष के चार महीने में ही मनरेगा के आवंटित फंड का क़रीब 50 फ़ीसदी ख़र्च

कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए इस साल मनरेगा का बजट बढ़ाकर एक लाख करोड़ रुपये कर दिया गया था. सरकारी आंकड़े दर्शाते हैं कि अब तक इसमें से 48,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ख़र्च हो चुकी है. ऐसे में कई ग्राम पंचायतों के पास मनरेगा के तहत काम कराने के लिए पैसे नहीं बचे हैं.

कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन. (फोटो साभार: फेसबुक/mssrf.org)

खेती न केवल खाद्य उत्पादक मशीन है, बल्कि सभी के लिए रोज़गार की नींव है: एमएस स्वामीनाथन

साक्षात्कार: कोरोना के दौर में राहत देने के लिए मोदी सरकार द्वारा ‘ऐतिहासिक कृषि सुधार’ के नाम से तीन कृषि अध्यादेश लाए गए हैं, लेकिन किसान ही इनके ख़िलाफ़ हैं. कई सालों से चले आ रहे कृषि संकट पर प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन कहते हैं कि किसानों के प्रति रवैये में बदलाव लाने की ज़रूरत है.