RTI Act

(फोटो: पीटीआई)

आरटीआई संशोधन क़ानून को चुनौती देने वाली जयराम रमेश की याचिका पर कोर्ट ने नोटिस जारी किया

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने अपनी याचिका में कहा है कि आरटीआई क़ानून में संशोधन करने का मुख्य उद्देश्य आरटीआई के तहत बने संस्थानों को प्रभावित करना है ताकि वे स्वतंत्र और निष्पक्ष होकर काम न कर पाएं.

सीआईसी. (फोटो साभार: पीआईबी)

सीआईसी में 33,000 से अधिक अपीलें और शिकायतें लंबित: सरकार

इससे पहले केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया था कि सीआईसी में 13,000 से अधिक ऐसे मामले है, जो एक वर्ष से अधिक समय तक लंबित हैं.

सीआईसी. (फोटो साभार: पीआईबी)

केंद्रीय सूचना आयोग में 13,000 से अधिक मामले एक साल से अधिक समय तक लंबित: सरकार

गैर-सरकारी संस्था सतर्क नागरिक संगठन और सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट से पता चलता है कि आयोगों में लंबित मामलों का प्रमुख कारण सूचना आयुक्तों की नियुक्ति न होना है. रिपोर्ट के मुताबिक, देश भर के 26 सूचना आयोगों में 31 मार्च 2019 तक कुल 2,18,347 मामले लंबित थे.

(फोटो: पीटीआई)

आरटीआई के तहत मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय आने से जुड़े मामले का घटनाक्रम

सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने एकमत होकर ये फैसला दिया और साल 2010 के दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया जिसमें कोर्ट ने कहा था कि मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय आरटीआई एक्ट के दायरे में है.

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मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय आरटीआई के दायरे में: सुप्रीम कोर्ट के फैसले का चौतरफा स्वागत

आरटीआई कार्यकर्ताओं ने शीर्ष न्यायालय के इस फैसले की सराहना की और साथ ही कहा कि ‘कानून से ऊपर कोई नहीं है.’

जस्टिस डीवी चंद्रचूड़. (फोटो साभार: यूट्यूब ग्रैब/Increasing Diversity by Increasing Access)

जज कानून से ऊपर नहीं हैं, न्यायिक नियुक्ति की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए: जस्टिस चंद्रचूड़

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि ऐसा करने से नियुक्ति प्रक्रिया में लोगों का विश्वास बढ़ेगा और फैसले लेने में न्यायपालिका एवं सरकार के सभी स्तरों पर उच्च स्तर की पारदर्शिता और जवाबदेही तय हो सकेगी.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

आरटीआई के दायरे में आया सीजेआई कार्यालय, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया

दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2010 में अपने फैसले में शीर्ष अदालत की इस दलील को खारिज कर दिया था कि सीजेआई कार्यालय को आरटीआई के दायरे में लाए जाने से न्यायिक स्वतंत्रता बाधित होगी.

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केंद्र ने आरटीआई कानून के नए नियमों की घोषणा की, सीआईसी का कार्यकाल घटकर तीन साल हुआ

आरटीआई कार्यकर्ताओं ने नए नियमों को सूचना आयोगों की स्वतंत्रता एवं उनकी स्वायत्तता पर हमला करार दिया है.

जस्टिस मदन बी. लोकुर. (फोटो: द वायर)

सूचना आयुक्तों की जल्द नियुक्ति हो, आरटीआई के तहत देर से सूचना मिलने से क्या फायदा: जस्टिस लोकुर

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस मदन बी. लोकुर ने सूचना आयोगों में ख़ाली पद पर भी चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा कि कोर्ट के साथ विभिन्न विभागों में ख़ाली पद होना मज़ाक का विषय बनता जा रहा है. जब तक ये ख़ाली पद भरे नहीं जाएंगे, ऐसे ही लंबित मामले बढ़ते रहेंगे.

The Union Home Minister, Shri Amit Shah addressing the inaugural session of the 14th Annual Convention of the Central Information Commission, in New Delhi on October 12, 2019.

सरकार ने ख़ुद सूचनाओं का खुलासा कर आरटीआई अर्ज़ी दायर करने की ज़रूरत कम की: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्रीय सूचना आयोग के 14 वें वार्षिक सम्मेलन में कहा कि आरटीआई आवेदनों की अधिक संख्या में किसी सरकार की सफलता नहीं छिपी होती.

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आरटीआई रिपोर्ट कार्ड: खाली पद और लंबित मामलों से जूझ रहे देश भर के सूचना आयोग

आरटीआई कानून लागू होने की 14वीं सालगिरह पर जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी सूचना आयुक्तों की समय पर नियुक्ति नहीं हो रही है. इसकी वजह से देश भर के सूचना आयोगों में लंबित मामलों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है और लोगों को सही समय पर सूचना नहीं मिल पा रही है.

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आरटीआई इस्तेमाल की गति धीमी, 14 साल में महज 2.5 फीसदी लोगों ने किया उपयोग: रिपोर्ट

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया द्वारा जारी रिपोर्ट में सूचना आयोगों में पदों की रिक्ति को आरटीआई की सक्रियता के लिए बाधक बताया गया है. राज्यों के मामले में उत्तर प्रदेश ने 14 साल में एक भी वार्षिक रिपोर्ट पेश नहीं की है, जबकि बिहार सूचना आयोग की अब तक वेबसाइट भी नहीं बन पायी है.

सुप्रीम कोर्ट. (फोटो: द वायर)

सरकार से अनुदान पाने वाले एनजीओ आरटीआई क़ानून के दायरे में आते हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर अनुदान पाने वाले स्कूल, कॉलेज और अस्पताल जैसे संस्थान भी आरटीआई क़ानून के तहत नागरिकों को सूचना उपलब्ध कराने के लिए बाध्य हैं.

(फोटो साभार: ट्विटर/@AnjaliB_)

आरटीआई संशोधन: अगर इस देश में लोकतंत्र नहीं है तो हमें बता दिया जाए

वीडियो: नई दिल्ली में सूचना का अधिकार कानून में संशोधन की अनुमति न देने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को ज्ञापन देने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया. राष्ट्रपति भवन के सामने आरटीआई कार्यकर्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में अगर विरोध का अधिकार नहीं तो हमें बता दिया जाए.

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आरटीआई में संशोधन न करने को लेकर राष्ट्रपति को ज्ञापन देने पहुंचे लोगों को हिरासत में लिया गया

सूचना का अधिकार (संशोधन) विधेयक, 2019 लोकसभा और राज्यसभा से पारित कर दिया गया है. लेकिन अभी इस संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति की सहमति नहीं मिली है.

New Delhi: Congress leader Jairam Ramesh addresses a press conference, in New Delhi on Monday, Sept 3, 2018. (PTI Photo/Kamal Singh) (PTI9_3_2018_000101B)

आरटीआई में संशोधन कर सरकार सीआईसी के पांच आदेशों का बदला ले रही है: जयराम रमेश

आरटीआई संशोधन विधेयक पर बहस के दौरान कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने केंद्रीय सूचना आयोग के पांच महत्वपूर्ण आदेशों का उल्लेख किया और आरोप लगाया कि सरकार सीआईसी को पीएमओ की कठपुतली बनाना चाह रही है.

New Delhi: Monsoon clouds hover over the Parliament House, in New Delhi on Monday, July 23, 2018.(PTI Photo/Atul Yadav) (PTI7_23_2018_000111B)

विपक्ष की आलोचना और वॉकआउट के बीच संसद ने आरटीआई संशोधन विधेयक को दी मंज़ूरी

आरटीआई संशोधन विधेयक में प्रावधान किया गया है कि मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्तों तथा राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एवं राज्य सूचना आयुक्तों के वेतन, भत्ते और सेवा काल केंद्र सरकार द्वारा तय किए जाएंगे.

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

आरटीआई के तहत 20 साल पहले की निजी जानकारी दी जा सकती है या नहीं, सीआईसी करेगा फैसला

साल 2006 के मुंबई ट्रेन विस्फोट के एक दोषी एहतेशाम सिद्दिकी ने आरटीआई एक्ट के तहत भारतीय पुलिस सेवा के 12 अधिकारियों के संघ लोक सेवा आयोग में जमा फार्मों व अन्य रिकॉर्ड की प्रतियां मांगी थी, जिसे गृह मंत्रालय ने खारिज कर दिया था. अब सीआईसी इस पर अंतिम निर्णय लेगा.

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‘आरटीआई कानून में संशोधन सूचना आयुक्तों पर नियंत्रण और इसके प्रभाव को कम करने की कोशिश है’

वीडियो: केंद्र की मोदी सरकार द्वारा सूचना का अधिकार कानून में संशोधन करने को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक की धीरज मिश्रा से बातचीत.

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आरटीआई संशोधन पर पूर्व सूचना आयुक्तों ने कहा, ये गरीबों की आवाज़ है इसे मत दबाइए

वीडियो: नई दिल्ली में बैठक कर सात पूर्व सूचना आयुक्तों ने आरटीआई कानून में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन का कड़ा विरोध किया है. इनका कहना है कि सरकार का ये कदम सूचना आयुक्तों की स्वतंत्रता और स्वायत्तता पर हमला है.

अन्ना हजारे. (फोटो: पीटीआई)

अन्ना हजारे ने आरटीआई कानून में संशोधन पर कहा, मोदी सरकार ने लोगों से धोखा किया

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है लेकिन यदि देश के लोग आरटीआई कानून की शुचिता की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरें तो वह उनका साथ देने के लिए तैयार हैं.

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आरटीआई कानून में संशोधन के विरोध में उतरा विपक्ष, कहा- इसे निष्प्रभावी बनाया जा रहा

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि आरटीआई कानून देश के लोकतंत्र की बहुत बड़ी उपलब्धि थी और इसने सरकार के हितों को कई बार चुनौती दी है.

अरुणा रॉय (फोटो साभार: फेसबुक/Azim Premji University)

आरटीआई कानून काफी विचार विमर्श के बाद बना था, इसमें संशोधन कर इसे कमजोर किया जा रहा: अरुणा रॉय

प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने कहा कि इस कानून को लोकसभा में लम्बी बहस और विचार विमर्श के बाद पास किया गया था और मौजूदा सरकार का नया बदलाव सूचना के अधिकार को बेहद कमजोर करने वाला है.

सोनिया गांधी. (फोटो साभार: फेसबुक/कांग्रेस)

आरटीआई कानून को खत्म करना चाहती है सरकार, हर नागरिक कमजोर होगा: सोनिया गांधी

यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लोकसभा से पारित हुए आरटीआई संशोधन विधेयक की आलोचना करते हुए कहा कि इस कानून को व्यापक विचार-विमर्श के बाद बनाया है और संसद ने इसे सर्वसम्मति से पारित किया. अब यह खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है.

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‘आरटीआई में संशोधन नहीं, बल्कि इसकी आत्मा मारने की कोशिश हो रही है’

वीडियो: केंद्र की मोदी सरकार द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) क़ानून में प्रस्तावित संशोधन के ख़िलाफ़ दिल्ली में लोगों ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शन में कई सामाजिक कार्यकर्ता, वकील, विपक्षी दलों के सांसद और विभिन्न राज्यों से आए लोग शामिल थे.

प्रतीकात्मक तस्वीर.

लोकसभा चुनाव के दौरान खरीदे गए 76 प्रतिशत चुनावी बॉन्ड

सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार, एक मार्च 2018 से 24 जनवरी 2019 के बीच कुल 1,407.09 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे गए, जबकि एक मार्च से 10 मई 2019 तक कुल 4,444.32 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे गए.

(फोटो: रॉयटर्स)

चुनावी बॉन्ड को लेकर आरबीआई, सरकार की ओर से भेजे गए पत्रों को सार्वजनिक करने से एसबीआई का इनकार

सूचना के अधिकार कानून के तहत एसबीआई से 2017-2019 के बीच सरकार या आरबीआई द्वारा उसे भेजे गए सभी पत्रों, निर्देशों, अधिसूचनाओं या ईमेल की प्रति मांगी गई थी.

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

सभी पंजीकृत आरडब्ल्यूए आरटीआई मानदंडों का पालन करें: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी आरडब्ल्यूए दो जुलाई तक आरटीआई एक्ट के तहत जन सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय प्राधिकारी की नियुक्ति करें.

(फोटो: रॉयटर्स)

राजनीतिक दलों को आरटीआई के तहत लाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर

भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने याचिका दायर करते हुए निर्देश देने की मांग की है कि सभी पंजीकृत और मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियां चार सप्ताह के भीतर जन सूचना अधिकारी, सक्षम प्राधिकरण नियुक्त करें और आरटीआई कानून, 2005 के तहत सूचनाओं का खुलासा करें.

New Delhi: Supreme Court lawyer Prashant Bhushan addresses the media, at Supreme Court premises in New Delhi, Thursday, Sept 6, 2018. The Supreme Court on Thursday extended till September 12, the house arrest of five rights activists in connection with the violence in Koregaon-Bhima in the west central state of Maharashtra. (PTI Photo/Kamal Kishore) (PTI9_6_2018_000097B)

सुप्रीम कोर्ट पारदर्शिता को लेकर खड़ा रहता है लेकिन अपनी बारी पर पीछे हट जाता है: प्रशांत भूषण

सुप्रीम कोर्ट ने शीर्ष अदालत और भारत के प्रधान न्यायाधीश का पद आरटीआई के तहत सार्वजनिक प्राधिकार है या नहीं, इस सवाल पर गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

आरटीआई में जजों की नियुक्ति से जुड़ी जानकारी देने से कॉलेजियम की कार्यप्रणाली प्रभावित होगी

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल द्वारा यह तर्क दिया गया है कि एक न्यायाधीश की नियुक्ति से संबंधित जानकारी व्यक्तिगत होती है, इसलिए आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (1) (जे) के तहत ऐसी जानकारी का खुलासा करने से छूट दी गई है.

Raipur: Congress President Rahul Gandhi addresses a convention of farmers, at Rajyotsav Mela ground in Naya Raipur, Monday, Jan 28, 2019. (PTI Photo) (PTI1_28_2019_000141B)

आरटीआई के दायरे में आएं राजनीतिक दल, न्यायपालिका, मीडिया और उद्योगपति: राहुल गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार आरटीआई कानून को ही नष्ट कर रही है. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार पर हमले के कई तरीके हैं जिनमें लोकपाल भी है, लेकिन इसकी अनुमति ही नहीं दी जा रही.

अरुणा रॉय (फोटो साभार: फेसबुक/Azim Premji University)

इन दिनों सरकार के ख़िलाफ़ महज़ विचार रखना भी राजद्रोह क़रार दिया जा सकता है: अरुणा रॉय

जयपुर साहित्य उत्सव में शामिल हुईं आरटीआई कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने कहा कि एक सूचना कार्यकर्ता के लिए हालात चिंताजनक हैं क्योंकि किसी तरह की सूचना मांगने को राजद्रोह क़रार दिया जा सकता है.

बिहार में मार दिए गए आरटीआई कार्यकर्ता ​शशिधर मिश्रा, रामकुमार ठाकुर और वाल्मीकि यादव (बाएं से दाएं).

बिहार में क्यों निशाने पर हैं आरटीआई कार्यकर्ता?

विशेष रिपोर्ट: एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2005 से लेकर अब तक देशभर में 79 आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है, जिसमें क़रीब 20 फीसदी की हत्याएं केवल बिहार में हुई हैं. साल 2018 में बिहार में पांच आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या के मामले सामने आए हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

आरटीआई के दायरे में बीसीसीआई, सीआईसी के आदेश को क्रिकेट बोर्ड देगा चुनौती

केंद्रीय सूचना आयोग ने आरटीआई प्रावधान के अंतर्गत सूचना के आवेदन प्राप्त करने के लिए बीसीसीआई को 15 दिन के अंदर आॅनलाइन और आॅफलाइन तंत्र तैयार करने के निर्देश दिए. बीसीसीआई के एक अधिकारी ने कहा कि सीआईसी के फैसले का अध्ययन करने के बाद उचित क़ानूनी रास्ता अपनाया जाएगा.

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मध्य प्रदेश: आरटीआई कार्यकर्ता से जानकारी मांगने पर वसूला गया जीएसटी

केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश के अनुसार आरटीआई पर जीएसटी लगाना क़ानूनी तौर पर ग़लत है. मध्य प्रदेश के सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे ने बताया कि मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल से सूचना मांगने पर उनके द्वारा दिए गए भुगतान में सीजीएसटी व एसजीएसटी दोनों शामिल थे.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 277: अविश्वास प्रस्ताव और आरटीआई बिल में संशोधन

जन गण मन की बात की 277वीं कड़ी में विनोद दुआ मानसून सत्र के पहले दिन संसद में पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव, केंद्र सरकार द्वारा आरटीआई क़ानून में संशोधन और कांग्रेस की कार्य समिति के गठन पर चर्चा कर रहे हैं.

JKB EP 224

जन गण मन की बात, एपिसोड 224: सूचना का अधिकार

जन गण मन की बात की 224वीं कड़ी में विनोद दुआ सूचना के अधिकार अधिनियम के सफ़र पर प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय से चर्चा कर रहे हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नोटबंदी के बाद पकड़े गए कालेधन की जानकारी दे वित्त मंत्रालय: सीआईसी

केंद्रीय सूचना आयोग ने आरटीआई कानून के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय पर जुर्माना नहीं लगाया क्योंकि उसके अधिकारियों ने आरटीआई आवेदन का जवाब देने में देरी के लिए माफी मांग ली है.

Episode 167_RAW

जन गण मन की बात, एपिसोड 167: मोदी का ‘पाकिस्तानी साज़िश’ का आरोप और आरटीआई

जन गण मन की बात की 167वीं कड़ी में विनोद दुआ मोदी द्वारा गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान लगाए गए ‘पाकिस्तानी साज़िश’ के आरोप और आरटीआई क़ानून के अमल के बारे में चर्चा कर रहे हैं.