नॉर्थ ईस्ट

नागरिक संगठनों ने मणिपुर (पहाड़ी क्षेत्र) स्वायत्त जिला परिषद विधेयक 2021 पर विरोध जताया

संगठनों का विरोध पहाड़ी ज़िलों में ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर द्वारा बुलाए गए 24 घंटे के बंद के मद्देनज़र हुआ है. रविवार आधी रात से प्रभावी बंद का आह्वान विधानसभा में मणिपुर (पहाड़ी क्षेत्र) स्वायत्त जिला परिषद विधेयक 2021 न पेश करने के विरोध में किया गया था.

इम्फालः मणिपुर के आठ घाटी आधारित नागरिक संगठनों ने मणिपुर (पहाड़ी क्षेत्र) स्वायत्त जिला परिषद विधेयक 2021 का कड़ा विरोध किया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विरोध पहाड़ी जिलों में ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर (एटीएसयूएम) द्वारा बुलाए गए 24 घंटे के बंद के मद्देनजर हुआ है. रविवार आधी रात से प्रभावी बंद का आह्वान मणिपुर विधानसभा सत्र में विधेयक पेश करने में राज्य की कथित असफलता के विरोध में किया गया था.

इन नागरिक संगठनों ने इस बिल को ‘संवेदनशील’ करार देते हुए रविवार को सर्वसम्मति से सरकार पर यह दबाव बनाने का फैसला किया कि सरकार इस विधेयक को सदन में पेश नहीं करें. यह एटीएसयूएम के उस दावे से विपरीत है कि यह विधेयक आदिवासी लोगों के कल्याण के लिए है और इससे पहाड़ी जिलों में ‘समान विकास’ होगा.

संगठनों का आरोप है कि इस विधेयक में विवादास्पद नगा स्वायत्त क्षेत्रीय परिषद और कुकी स्वायत्त क्षेत्रीय परिषद के अधिकतम प्रावधान और उद्देश्य शामिल हैं, जिसका मणिपुरी लोग विरोध कर रहे हैं.

इसके अलावा विधेयक की मुख्य विशेषताएं भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के लगभग सभी प्रावधानों जैसे ही हैं, जो राज्य की बहुसंख्यक आबादी को भी स्वीकार्य नहीं है.

संगठनों का कहना है, ‘मणिपुर जैसे छोटे से राज्य में अलग प्रशासन के विचार का हमेशा से अधिकांश आबादी द्वारा विरोध किया गया है.’

संगठनों ने सभी पहाड़ी क्षेत्रों के नेताओं और सीएसओ से आगे आकर पारदर्शी चर्चा करने इस विधेयक का विश्लेषण करने की अपील की. इसके साथ ही राज्य के सभी हितधारकों के लिए विधेयक को समावेशी और विवेकपूर्ण बनाने के लिए सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान निकालने के लिए मिलकर काम करने को कहा.

बता दें कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 371 सी में पहाड़ी क्षेत्र समिति और जिला परिषदों के जरिये मणिपुर में पहाड़ी इलाकों के प्रशासन के लिए अलग से योजना बनाने का प्रावधान है.