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भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक ने एमएससी और पीएचडी कोर्स पर ‘एकतरफ़ा’ रोक लगाई

उत्तराखंड स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान को गुजरात के सौराष्ट्र विश्वविद्यालय से मान्यता मिली हुई है. फरवरी 2019 में कैग ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि राज्य के बाहर के किसी विश्वविद्यालय के साथ गठजोड़ करना उचित नहीं है. फैकल्टी सदस्यों का कहना है कि इस रिपोर्ट के दो साल बाद संस्थान के निदेशक ने संचालक मंडल से चर्चा के बिना ही यह फ़ैसला ले लिया.

(फोटो साभार फेसबुक/Saevus Wildlife India LLP)

नई दिल्ली: 1988 में सौराष्ट्र विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता प्राप्त होने के बाद पहली बार उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान के एमएससी (वन्यजीव) और पीएचडी कोर्स पर रोक लगा दी गई है.

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत आने वाले संस्थान के निदेशक धनंजय मोहन ने बीते 13 सितंबर को ‘एकतरफा’ फैसले लेते हुए दोनों कोर्स की मान्यता पर रोक लगा दी.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उन्होंने कहा कि जब तक इस संबंध में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं प्राप्त हो जाता है, तब तक ये रोक जारी रहेगी.

गुजरात के राजकोट स्थित सौराष्ट्र विश्वविद्यालय इस संस्थान के साथ साल 1988 से जुड़ा हुआ है. इसी संबंध में निदेशक द्वारा रोक लगाई गई है.

फरवरी 2019 में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा उत्तराखंड के बाहर के किसी विश्वविद्यालय के साथ गठजोड़ करना उचित नहीं है और इसे लेकर राष्ट्रीय ऑडिटर ने आपत्ति जताई थी.

कैग की इस रिपोर्ट के दो साल बाद संस्थान के निदेशक के इस फैसले को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.

संस्थान के फैकल्टी सदस्यों का कहना है कि इस मामले को लेकर मई 2020 में हुई पिछली बैठक में संचालक मंडल से कोई चर्चा नहीं की गई थी, जो कि निर्णय लेने वाला संस्थान का शीर्ष निकाय है.

इस मामले को लेकर निदेशक मोहन ने कहा कि चूंकि लॉकडाउन और कोविड-19 था, इसलिए वे बैठक कर मामले की चर्चा नहीं कर पाए.

उन्होंने ‘मान्यता’ के संबंध में यूजीसी गाइडलाइन को लेकर कहा कि कानून के जानकारों द्वारा कैग ऑडिट किया गया था और वे यूजीसी के दिशा-निर्देशों को लेकर स्पष्ट हैं.

मोहन ने कहा कि यूजीसी गाइडलाइन के मुताबिक, एक संस्थान सिर्फ उसी राज्य में विश्वविद्यालय के साथ ‘संबद्ध’ हो सकता है. हालांकि सौराष्ट्र विश्वविद्यालय का कहना है कि भारतीय वन्यजीव संस्थान को इस शर्त से छूट प्राप्त है, क्योंकि वह ‘विशेष अनुसंधान संस्थान’ है.

सौराष्ट्र विश्वविद्यालय के विज्ञान विभाग के डीन गिरीश भीमानी ने कहा, ‘विश्वविद्यालय कानून के तहत विशेष स्थिति में एक संस्थान राज्य से बाहर के विश्वविद्यालय के साथ जुड़ सकता है. हम संस्थान से लगातार कह रहे हैं कि वे एमएससी और पीएचडी डिग्री के लिए हमारे साथ अपनी मान्यता बनाए रखें.’

प्रशासन का दावा है कि इस फैसले से रजिस्टर्ड छात्रों पर प्रभाव नहीं पड़ेगा.

भारतीय वन्यजीव संस्थान का सौराष्ट्र विश्वविद्यालय के अलावा पीएचडी डिग्री के लिए उत्तराखंड में डीम्ड यूनिवर्सिटी वन अनुसंधान संस्थान से भी गठजोड़ है.

सौराष्ट्र विश्वविद्यालय प्रति सेमेस्टर 1,575 रुपये शुल्क लेता है, जबकि वन अनुसंधान संस्थान की फीस लगभग 15,000 रुपये है.

संस्थान के पूर्व छात्रों और शोधकर्ताओं ने इस मामले में प्रधानमंत्री और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा हस्तक्षेप किए जाने की मांग की है. इसे लेकर जल्द ही एक ज्ञापन सौंपा जाएगा.

शोधकर्ताओं ने कहा है कि तमिलनाडु में सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री (एसएसीओएन) जैसे कई शोध संस्थानों को अन्य राज्यों के विश्वविद्यालयों द्वारा मान्यता प्राप्त है.

वहीं संस्थान के निदेशक मोहन ने कहा कि मान्यता के लिए उनकी दून विश्वविद्यालय और उत्तराखंड में अन्य विश्वविद्यालयों से बात चल रही है.

उन्होंने कहा, ‘हमें उम्मीद थी कि फरवरी तक दून विश्वविद्यालय से सकारात्मक जवाब आ जाएगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. हमें अभी भी उम्मीद है, लेकिन इस साल एडमिशन नहीं हो सकेगा.’

इस मामले पर एक पूर्व छात्र ने कहा कि एमएससी कोर्स पर रोक लगाने का मतलब है कि जिनकी उम्र 28 साल हो गई होगी, अब वो अगले साल एडमिशन के लिए पात्र नहीं होंगे.

उन्होंने कहा कि कैग ऑडिट फरवरी 2019 में हुआ था, जबकि इस निदेशक ने जनवरी 2020 से कार्यभार संभाला है. कई महीने बीतने के बाद अब ये मनमाना फैसला लिया गया है.

मालूम हो कि भारतीय वन्यजीव संस्थान विश्व स्तर पर प्रशंसित वन्यजीव अनुसंधान संस्थान है. यह दो सालों में एक बार करीब 20 एमएससी छात्रों (वन्यजीव) और हाल ही में लॉन्च किए गए एमएससी (हेरिटेड) के लिए 10 छात्रों का चयन करता है. इसके अलावा साल में एक या दो बार 10-15 पीएचडी छात्रों को लिया जाता है. संस्थान में कुछ डिप्लोमा कोर्स भी चलाए जाते हैं.