राजनीति

अच्छा हुआ योगी अयोध्या से चुनाव नहीं लड़े, उन्हें विरोध झेलना पड़ता: राम मंदिर के मुख्य पु​जारी

विधानसभा चुनाव राउंड-अप: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संदर्भ में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि एक संत मुख्यमंत्री नहीं हो सकता. उत्तर प्रदेश में आप उम्मीदवार ने नामांकन ख़ारिज होने पर आत्मदाह की कोशिश की. सपा ने निर्वाचन आयोग से ओपीनियन पोल के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की. पंजाब की कांग्रेस सरकार के मंत्री द्वारा निर्दलीय चुनाव में उतरे बेटे के लिए पार्टी प्रत्याशी के ख़िलाफ़ प्रचार करने पर विवाद.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. (फोटो: पीटीआई)

इलाहाबाद/अयोध्या/लखनऊ/चंडीगढ़/देहरादून/नई दिल्ली: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या से चुनाव लड़ने की अटकलों का पटाक्षेप होने के बाद राम मंदिर के मुख्य पुरोहित आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि अच्छा हुआ योगी यहां से चुनाव नहीं लड़े वरना उन्हें जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ता.

दास ने दावा किया कि उन्होंने योगी को सलाह दी थी कि वह अयोध्या के बजाय गोरखपुर से चुनाव लड़ें.

पिछले 30 वर्षों से राम मंदिर के मुख्य पुरोहित का दायित्व निभा रहे दास ने सोमवार को समाचार एजेंसी पीटीआई/भाषा से बातचीत में कहा, ‘यह अच्छा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. मैंने उन्हें सुझाव दिया था कि बेहतर होगा कि वह अयोध्या के बजाय गोरखपुर की किसी सीट से चुनाव लड़ें.’

दास ने कहा कि वह महसूस करते हैं कि भाजपा राम मंदिर को कभी अपने एजेंडे से बाहर नहीं निकालेगी.

84 वर्षीय पुजारी ने कहा कि यहां अयोध्या के संतों की राय विभाजित है और जिनके घर और दुकानें ध्वस्त की गईं, वे उनके खिलाफ हैं. उन्होंने कहा कि सब कह रहे हैं कि यह उनका काम है. यह विरोध है.

इस सवाल पर कि उन्होंने योगी को अयोध्या से चुनाव न लड़ने की सलाह क्यों दी दास ने कहा, ‘हम तो रामलला से पूछ कर बोलते हैं. हम रामलला की प्रेरणा से बोले थे. यहां के साधू एकमत नहीं हैं. विकास परियोजनाओं के लिए जिन लोगों के मकान तोड़े गए हैं, वे सब योगी के खिलाफ हैं. इसके अलावा जिन लोगों की दुकानें तोड़ी जानी हैं, वह सब भी योगी से नाराज हैं.’

उन्होंने कहा, ‘सभी कह रहे हैं कि यह योगी का काम है. इतना विरोध देखने के बाद मैंने योगी जी से कहा कि बेहतर होगा कि वह गोरखपुर से चुनाव लड़ें. वैसे योगी यहां से भी चुनाव जीत जाते लेकिन उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ता.’

उन्होंने कहा, ‘वो यहां से जीत जाते लेकिन मुश्किलों का सामना कर सकते थे.’

गौरतलब है कि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा सरगर्म थी कि योगी अयोध्या से चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने उन्हें गोरखपुर नगर सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है.

अयोध्या की चुनावी फिजा के बारे में पूछे जाने पर दास ने कहा, ‘अभी कुछ कहा नहीं जा सकता, क्योंकि सभी पार्टियों ने अभी यहां अपने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं. आने वाले समय में जनता का मिजाज पता लगेगा.’

इस सवाल पर कि अयोध्या में हो रहे राम मंदिर निर्माण का मामला क्या आगामी विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनेगा आचार्य दास ने कहा, ‘राम मंदिर का मुद्दा कभी नहीं जाएगा. नाम जरूर लेंगे. यह नहीं जाएगा भाजपा के एजेंडे से.’

दास ने कहा, ‘पहले रामलला आंदोलन था, फिर अदालत का आदेश आया और राम मंदिर का निर्माण शुरू हुआ. यह राम मंदिर का मुद्दा कभी नहीं मिटेगा. वे कहेंगे कि यहां (कार सेवकों पर) फायरिंग की गई थी, निर्माण को रोकने के लिए अदालत में आवेदन ले जाया गया था, लेकिन मंदिर निर्माण जारी है.’

मात्र 20 साल की उम्र में अयोध्या आए आचार्य सत्येंद्र दास को उम्मीद है कि वह अपने जीवन में मुकम्मल राम मंदिर देख पाएंगे.

उन्होंने कहा, ‘देखते हैं, मंदिर का निर्माण कब पूरा होता है. मेरे साथ जो भी लोग आए थे, उनमें से ज्यादातर की मृत्यु हो गई है. जब तक मैं जिंदा हूं यहां सेवा करूंगा.’

दास ने कहा कि वह 1992 में अस्थायी रामलला मंदिर के पुजारी बने थे, जिस वर्ष बाबरी मस्जिद को तोड़ा गया था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा, ‘शाम 5 बजे तक विध्वंस खत्म हो गया था. बाद में कार सेवकों ने तंबू गाड़ दिया और जगह को समतल कर दिया और शाम 7 बजे तक मैंने रामलला को वहीं विराजमान कर दिया था.’

इस सवाल पर कि क्या अयोध्या में विवादित स्थल पर बनी मस्जिद ढहा जाने के वक्त वह मौके पर मौजूद थे, दास ने कहा ‘हां, मैं वहीं था. वह सब मेरे सामने हुआ. तीन गुंबदों में से उत्तरी और दक्षिणी गुंबद को कारसेवकों ने ढहाया था. मैं रामलला को उनके सिंहासन समेत अपने हाथ में उठाए था.’

इस सवाल पर कि क्या स्थानीय राजनेताओं ने उनका आशीर्वाद लेने के लिए आना शुरू कर दिया है, पुरोहित ने कहा ‘अभी तक समाजवादी पार्टी नेता पवन पांडे की पत्नी यहां आई हैं. पांडे सपा के मजबूत उम्मीदवार हैं.’

पवन पांडे वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में अयोध्या सीट पर विजयी हुए थे. उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार लल्लू सिंह को हराया था. वर्ष 2017 में भाजपा के वेद प्रकाश गुप्ता इस सीट से जीते थे.

पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा जिले की पांचों सीटों अयोध्या, बीकापुर, रुदौली, गोसाईगंज और मिल्कीपुर पर विजयी हुई थी. अयोध्या में पांचवें चरण में आगामी 27 फरवरी को मतदान होगा.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, एक संत मुख्यमंत्री नहीं हो सकता

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक स्पष्ट संदर्भ में द्वारका पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमवार को कहा कि एक संत मुख्यमंत्री नहीं हो सकता, क्योंकि व्यक्ति जब संवैधानिक पद पर बैठता है तो उसे धर्मनिरपेक्षता की शपथ लेनी पड़ती है और ऐसे में वह व्यक्ति धार्मिक कैसे रह सकता है.

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर में चल रहे माघ मेले में एक संवाददाता सम्मेलन में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछा गया कि योगी आदित्यनाथ एक संत और गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर के महंत हैं, उनके नेतृत्व में मौजूदा सरकार के कामकाज को लेकर उनकी क्या राय है?

इस सवाल पर उन्होंने कहा, ‘व्यक्ति एक साथ दो शपथ नहीं निभा सकता. एक संत, महंत हो सकता है, लेकिन वह मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नहीं हो सकता. यह इस्लाम की ‘खिलाफत’ व्यवस्था में संभव है, वहां धर्माचार्य ही राजा होता है.’

उत्तर प्रदेश में जारी विधानसभा चुनावों पर उन्होंने कहा, ‘जनता सही लोगों तथा सही पार्टी को चुने जिससे कि उसे सरकार बनने के बाद पछताना नहीं पड़े, जैसा कि इधर देखा जा रहा है कि बहुत से लोग पश्चाताप की बात कर रहे हैं कि उनसे गलती हो गई. कम से कम जो चुनाव आपके सामने है, उसमें ऐसी गलती न करें.’

उत्तर प्रदेश में 403 सीटों वाली 18वीं विधानसभा के लिए 10 फरवरी से 7 मार्च तक सात चरणों में वोट पड़ेंगे. 10 मार्च को चुनाव के नतीजे आएंगे. प्रदेश में सात चरणों के तहत 10 फरवरी, 14 फरवरी, 20 फरवरी, 23 फरवरी, 27 फरवरी, 3 मार्च और 7 मार्च को मतदान होगा.

धर्म के क्षेत्र में राजनेताओं के दखल पर अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सभी राजनीतिक दल धर्म के क्षेत्र में अतिक्रमण कर रहे हैं, कोई दल आगे हो सकता है, कोई पीछे. उन्होंने कहा कि यह बात इस स्तर तक पहुंच गई है कि केवल धार्मिक लोगों से संबंध बनाना नहीं रह गया है, बल्कि वे धार्मिक स्थलों पर अपने आदमी बैठा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि ये राजनीतिक दल अपनी बात कहलवाने के लिए अपने आदमी धार्मिक स्थलों पर बैठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश में कुछ ऐसे लोग हैं, जो चाहते हैं कि धर्माचार्य उनकी भाषा बोलें और यही वजह है कि पुरानी किताब से धर्म बताने वाले लोग उनको चुभ रहे हैं और ऐसे लोगों को पद से हटाने की नीति चल रही है.

द्वारका पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के प्रति हमेशा से सहानुभूति रही है और पिछले वर्ष माघ मेले के दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने यहां मनकामेश्वर मंदिर परिसर में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया था.

माघ मेले में अव्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, ‘इस बार माघ मेले में बहुत अनदेखी है. कुछ संत महात्माओं ने अनशन और आत्मदाह करने तक की बात कही है. अगर नेता चुनाव में व्यस्त हैं तो अधिकारी व्यवस्था को ठीक क्यों नहीं कर रहे हैं.’

माघ मेले में गंगा का जलस्तर अचानक बढ़ने से कल्पवासियों और साधु संतों को हो रही परेशानी पर उन्होंने कहा, ‘आपके (सरकार) पास आज की तारीख में रेगुलेटर है तो फिर नियंत्रित प्रवाह क्यों नहीं हो रहा है. जलस्तर बढ़ने से कई लोगों को अपने शिविर उखाड़ने पड़े और दूसरी जगह शिविर लगाना पड़ा.’

अखिलेश पर पाकिस्तान को भारत का असली दुश्मन नहीं मानने का पात्रा ने लगाया आरोप

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोमवार को समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव पर पाकिस्तान को भारत का असली दुश्मन नहीं मानने का आरोप लगाते हुए इसे उनके जिन्ना संबंधी बयान से जोड़ा.

संबित पात्रा. (फोटो: पीटीआई)

पात्रा ने लखनऊ में प्रेस वार्ता में दावा किया, ‘सपा के नेता अखिलेश यादव ने एक अखबार को दिए साक्षात्कार में कहा था कि वह पाकिस्तान को भारत का असली दुश्मन नहीं मानते. उन्होंने कहा कि भाजपा वोट की राजनीति के लिए पाकिस्तान को हमारा दुश्मन बताती है.’

उन्होंने कहा, ‘अखिलेश जी को फौरन इसके लिए माफी मांगनी चाहिए. मैं अखिलेश जी से पूछना चाहता हूं कि कश्मीर के जिन भाई-बहनों को पाकिस्तान द्वारा भेजे गए आतंकवादी मार देते हैं, क्या वे भारतीय नहीं हैं?’

पात्रा ने आरोप लगाया, ‘जिन्ना से जो करे प्यार, वो पाकिस्तान से कैसे करे इनकार. जिन्ना का नाम लेकर उतरे थे और वो आज पाकिस्तान पर पहुंच गए.’

पात्रा ने कहा, ‘आज उत्तर प्रदेश के स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास का संदेश दिया. वहीं, अखिलेश जी ने पाकिस्तान को दुश्मन नहीं बताया, अब आप बताएं पाकिस्तान और जिन्ना को लेकर कौन आया? तुष्टीकरण की पराकाष्ठा की वजह से चुनाव के समय अखिलेश पाकिस्तान और जिन्ना के मुद्दों को लेकर आ रहे हैं.’

गौरतलब है कि एक अखबार को दिए गए साक्षात्कार में अखिलेश ने कहा था, ‘डॉक्टर राम मनोहर लोहिया और नेताजी मुलायम सिंह यादव का स्पष्ट मत था कि हमारा असल दुश्मन चीन है. पाकिस्तान तो हमारा राजनीतिक शत्रु है. मगर भाजपा वोट की राजनीति के लिए सिर्फ पाकिस्तान को निशाना बनाती है.’

उन्होंने आगे कहा था, ‘लोकसभा में सिर्फ सपा ने ही यह सवाल उठाया था कि आखिर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की 24 विधानसभा सीटों पर हमारे सदस्य कब चुने जाएंगे और तत्कालीन गृह मंत्री ने कहा था कि वह अक्साई चीन तक पहुंचेंगे और अब हम सुन रहे हैं कि गलवान घाटी में क्या हो रहा है.’

पात्रा ने यह भी आरोप लगाया, ‘सपा अध्यक्ष उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम इसलिए नहीं घोषित कर रहे हैं, क्योंकि वह नाहिद हसन जैसे लोगों को टिकट दे रहे हैं. अगर मुंबई बम धमाकों के आरोपी याकूब मेमन को फांसी नहीं हुई होती तो अखिलेश याकूब को भी उम्मीदवार बना देते और कसाब को स्टार प्रचार के रूप में उतार देते. इन्होंने आतंकवादियों को छुड़वाने के लिए पूरी प्रक्रिया की थी.’

पात्रा ने दावा किया, ‘चुनाव भाजपा और सपा के एक्सप्रेसवे के बीच में है. भाजपा के एक्सप्रेसवे हैं- गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वाचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और सपा के हैं- गुंडई एक्सप्रेसवे, रंगदारी एक्सप्रेसवे और माफिया एक्सप्रेसवे. जनता को इनके बीच से चुनाव करना है.’

विभिन्न टीवी चैनलों पर ‘ओपीनियन पोल’ दिखाए जाने के खिलाफ सपा द्वारा निर्वाचन आयोग से शिकायत किए जाने पर पात्रा ने कहा, ‘ये लोग (सपा के नेता) चाहते हैं कि मीडिया वाले ओपीनियन पोल न दिखाएं. मुझे पता है 10 मार्च को वे ईवीएम पर भी बरसेंगे कि ईवीएम खराब थी इसलिए हार गए.’

भाजपा के साथ 25 साल गठबंधन कर समय बर्बाद करने के महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बयान के बारे में पूछे जाने पर पात्रा ने कहा कि उद्धव अपने पिता बाल ठाकरे के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं.

भाजपा के शासन में धर्म संबंधी असुरक्षा लगातार बढ़ रही है: मायावती

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को निशाना बनाते हुए सोमवार को आरोप लगाया कि भाजपा के कार्यकाल में धर्म को लेकर असुरक्षा की भावना और भेदभाव बढ़ा है.

मायावती ने ट्वीट किया कि उत्तर प्रदेश में ‘भय, भ्रष्टाचार, भेदभाव एवं जान-माल और मजहब को लेकर असुरक्षा लगातार बढ़ रही है.’

उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, लाखों लोगों का पलायन और खराब कानून-व्यवस्था राज्य की सबसे बड़ी समस्याएं हैं, जो लगातार बढ़ती ही जा रही हैं.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘ये समस्याएं लोगों में कुंठा पैदा कर रही हैं तथा समाज एवं प्रदेश पिछड़ रहा है. यह अति-दुःखद है.’

बसपा अध्यक्ष ने गरीबों को आवास देने की भाजपा की योजनाओं को अपना बताते हुए कहा, ‘उत्तर प्रदेश में बसपा की (पूर्ववर्ती) सरकार में लगभग ढाई लाख गरीब परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त आवास उपलब्ध कराए गए और करीब 15 से 20 लाख मकान मुहैया कराने की तैयारी चल रही थी, मगर सरकार बदलने के कारण यह कार्य अधूरा रह गया और इसे ही भाजपा भुनाने का प्रयास कर रही है. इन्होंने अपना क्या किया?’

उन्होंने कहा कि शायद पश्चिमी यूपी की जनता को यह मालूम नहीं है कि गोरखपुर में योगी जी का बना मठ जहां वो अधिकांश निवास करते हैं, वो कोई बड़े बगंले से कम नहीं है. यदि इस बारे में भी यह बता देते तो बेहतर होता.

ध्रुवीकरण करने की कोशिशों से होशियार रहें किसान: टिकैत

अलीगढ़: भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने किसानों को हिंदू मुस्लिम की राजनीति के जरिये ध्रुवीकरण करने की कोशिशों से होशियार करते हुए कहा है कि किसान मतदान जैसे महत्वपूर्ण विषय को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं.

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत. (फोटो: सिराज अली/द वायर)

टिकैत ने रविवार की रात इगलास इलाके में एक निजी समारोह से इतर संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘आने वाले कुछ हफ्तों में हिंदू-मुस्लिम और जिन्ना के मुद्दे खूब सुनाई देंगे, मगर किसानों को ऐसे भ्रमित करने वाले मुद्दों से होशियार रहना होगा.’

उन्होंने किसानों को सतर्क करते हुए कहा, ‘मतों का ध्रुवीकरण करने और निहित स्वार्थों के जरिए ध्यान भटकाने के लिए हिंदू मुस्लिम के मुद्दे उठाए जाएंगे. अगले 15 मार्च तक हिंदू-मुस्लिम और जिन्ना उत्तर प्रदेश के अतिथि बन जाएंगे.’

इस सवाल पर कि किसानों का चुनावी रुझान क्या है टिकैत ने कहा, ‘जब किसानों की उपज को उसकी लागत के आधे दाम पर बेचने पर मजबूर किया जा रहा हो तो उन्हें बताने की जरूरत नहीं है कि वोट किसे देना है. किसान अपने मुद्दों को लेकर बहुत होशियार हैं.”’

आपत्तिजनक भाषण देने के आरोप में भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ मामला दर्ज

मुजफ्फरनगर: चुनावी सभा में भड़काऊ भाषण देने और निर्वाचन आयोग के प्रचार संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मीरापुर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी.

ककरोली थाना प्रभारी सुनील शर्मा ने बताया कि बिना अनुमति के रविवार को सभा करने के आरोप में प्रशांत गुज्जर और उनके 40 समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने कोविड-19 संबंधी स्थिति के मद्देनजर सभी प्रकार की जनसभाओं और रैलियों पर रोक लगा दी है.

एक वीडियो क्लिप में गुज्जर चौरावाला गांव के लोगों से उन्हें समर्थन देने की अपील करते दिख रहे हैं. गुज्जर वीडियो में कहते सुनाई दे रहे हैं कि भाजपा हिंदुओं की और विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) मुस्लिम पार्टी है.

शर्मा ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो की जांच करने के बाद गुज्जर और उनके समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया.

उन्होंने कहा कि गुज्जर जिस चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे, वह निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए और जिला प्राधिकारियों की अनुमति के बिना आयोजित की गई थी.

शर्मा ने कहा कि गुर्जर और उनके 40 समर्थकों के खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 (चुनाव के संबंध में वर्गों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), महामारी रोग अधिनियम की धारा तीन और आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 51 के तहत आरोप लगाए गए हैं.

उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (विधिवत रूप से घोषित लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा) और धारा 269 एवं धारा 270 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है. इसके अलावा उनके खिलाफ धारा 505 (2), धारा 171 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है.

भाजपा में शामिल हुए जलालपुर से सपा विधायक सुभाष राय

उत्तर प्रदेश के आंबेडकरनगर जिले की जलालपुर विधानसभा से सपा के विधायक सुभाष राय सोमवार को भाजपा में शामिल हो गए.

दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में उन्होंने उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और भाजपा मीडिया विभाग के प्रभारी अनिल बलूनी की मौजूदगी में भगवा दल की सस्यता ग्रहण की.

उल्लेखनीय है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में जलालापुर से बसपा के टिकट पर रितेश पांडेय विधायक चुने गए थे. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने उन्हें अंबेडकरनगर संसदीय सीट से अपना उम्मीदवार बना दिया.

चुनाव में जीत दर्ज के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद जलालापुर सीट पर हुए उपचुनाव में सुभाष राय सपा के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए थे.

सांसद रितेश पांडेय के पिता राकेश पांडेय हाल ही में समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं. वह वर्ष 2002 में सपा के टिकट पर जलालपुर से विधायक भी निर्वाचित हुए थे. सपा में शामिल होने से उनका जलालपुर से टिकट लगभग तय माना जा रहा है.

आप उम्मीदवार ने नामांकन पत्र खारिज होने पर आत्मदाह की कोशिश की

मुजफ्फरनगर जिले में मीरांपुर विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी (आप) उम्मीदवार जोगिंदर सिंह ने निर्वाचन अधिकारी द्वारा उनका नामांकन पत्र खारिज किए जाने को लेकर सोमवार को अपने कपड़ों पर मिट्टी का तेल डालकर कथित तौर पर आत्मदाह का प्रयास किया. पुलिस ने यह जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि सिंह ने जिलाधीश कार्यालय के समक्ष आत्मदाह करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और माचिस की तीली जलाने से रोककर उनके इस कथित प्रयास को विफल कर दिया.

इसके बाद सिंह धरने पर बैठ गए. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें नामांकन पत्र भरने में अपनी गलती को सुधारने का अवसर नहीं दिया गया.

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सिंह के नामांकन पत्र को भरने में कुछ महत्वपूर्ण चूक के कारण निर्वाचन अधिकारी जयेंद्र कुमार ने इसे खारिज कर दिया.

सपा ने निर्वाचन आयोग से ओपीनियन पोल के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की

सपा ने विभिन्न समाचार चैनल पर दिखाए जा रहे ओपीनियन पोल के प्रसारण पर तत्काल रोक लगाने की मांग करते हुए इस सिलसिले में निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा है.

सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र लिखकर विभिन्न समाचार चैनल द्वारा दिखाए जा रहे ओपीनियन पोल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग की है.

पटेल ने पत्र में कहा है कि उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के लिए तारीखों की घोषणा के बाद से कई चैनल ओपीनियन पोल दिखा रहे हैं जिससे मतदाता भ्रमित हो रहे हैं और चुनाव प्रभावित हो रहा है. यह कार्य आदर्श आचार संहिता का खुला उल्लंघन है.

पटेल ने मांग की है कि स्वतंत्र, निष्पक्ष, निर्भीक चुनाव सम्पन्न कराने के लिए न्यूज चैनल द्वारा दिखाए जा रहे ओपीनियन पोल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए.


पंजाब विधानसभा चुनाव


मंत्री राणा गुरजीत ने सोनिया गांधी से सुखपाल खैरा को पार्टी से निष्कासित करने की मांग की

कपूरथला: पंजाब के मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने बीते रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर सुखपाल सिंह खैरा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में पिछले साल प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई का मुद्दा उठाया और उन्हें पार्टी से निष्कासित करने की मांग की.

राणा गुरजीत सिंह. (फोटो साभार: फेसबुक)

ऐसे में जब राज्य विधानसभा चुनाव में एक महीने से भी कम समय बचा है, कपूरथला क्षेत्र के कुछ कांग्रेस नेताओं के बीच कड़वी प्रतिद्वंद्विता सामने आई है.

ईडी ने पिछले साल खैरा को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था, जो भोलाथ से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं. ईडी ने आरोप लगाया गया था कि वह मामले में दोषियों और फर्जी पासपोर्ट रैकेट चलाने वालों के एक ‘सहयोगी’ थे.

राणा गुरजीत का यह कदम ऐसे समय आया है जब खैरा, नवतेज सिंह चीमा और पंजाब कांग्रेस के दो अन्य नेताओं ने कुछ दिन पहले गांधी को एक पत्र लिखा था, जिसमें पार्टी से उन्हें निष्कासित करने की मांग करते हुए आरोप लगाया गया था कि वह विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी को ‘कमजोर’ कर रहे हैं.

मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने अपने बेटे राणा इंदर प्रताप सिंह के लिए एक आक्रामक प्रचार अभियान शुरू किया है, जो सत्तारूढ़ कांग्रेस के उम्मीदवार नवतेज सिंह चीमा के खिलाफ सुल्तानपुर लोधी से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्य विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं.

कपूरथला निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस द्वारा मैदान में उतारे गए राणा गुरजीत ने कहा कि खैरा मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फिलहाल जेल में हैं.

उन्होंने पत्र में लिखा है, ‘यह बेहिसाबी धन या नियमित मनी लॉन्ड्रिंग का मामला नहीं है. यह नशीले पदार्थ के धन से संबंधित है, जो अस्वीकार्य और अक्षम्य है. कांग्रेस हमेशा मादक पदार्थ के खिलाफ रही है. वास्तव में यह हमारे पूर्व प्रमुख राहुल गांधी थे, जिन्होंने 2015 में पंजाब में मादक पदार्थ की गंभीर समस्या का जिक्र करते हुए इस मुद्दे को उठाया था.’

उन्होंने लिखा, ‘तो, हमारी पार्टी किसी ऐसे व्यक्ति को टिकट कैसे दे सकती है जो दागी है. कांग्रेस नेताओं और उम्मीदवारों के लिए बचाव करना मुश्किल होगा कि एक तरफ हमने शपथ ली है कि हम मादक पदार्थ को खत्म करेंगे और दूसरी तरफ हम एक दागी व्यक्ति को टिकट दे रहे हैं जो जेल में बंद है.’

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि कांग्रेस नशीले पदार्थों और जेल में बंद किसी व्यक्ति के मुद्दे पर एक रुख ले.

उन्होंने कहा, ‘उन्हें पार्टी का टिकट देने से गलत संकेत जाएगा. एक वफादार और विनम्र कांग्रेसी के रूप में, जिसने पिछले दो दशकों से लोकसभा और विधानसभा में कांग्रेस की नीतियों को पेश और बचाव किया है, मैं इस बात से आंखें नहीं मूंद सकता कि मैं क्या कर रहा हूं. मेरी पार्टी में क्या हो रहा है.’

राणा गुरजीत ने कहा, ‘मैं इन सभी तथ्यों को आपके ध्यान में लाना अपना कर्तव्य समझता हूं ताकि आप तत्काल सुधारात्मक कदम उठा सकें.’

इस बीच रविवार को दिन में मंत्री ने सुल्तानपुर लोधी निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों में अपने बेटे के लिए प्रचार किया.

कैबिनेट मंत्री ने 21 जनवरी को चीमा के पैतृक गांव बुसोवाल से इंदर प्रताप के लिए प्रचार शुरू किया था, जिसमें दावा किया गया था कि उनके बेटे को निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं द्वारा चुना जाएगा.

मंत्री ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस के चार नेताओं द्वारा गांधी को पत्र लिखे जाने के बाद अपने बेटे के लिए प्रचार करने का फैसला किया और कहा कि इंदर प्रताप का पक्ष लेना उनकी नैतिक जिम्मेदारी भी है.

राणा गुरजीत ने नेताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वे कपूरथला क्षेत्र में उनके खिलाफ प्रचार करें, जहां से वह कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में फिर से चुनाव लड़ रहे हैं.

यह पूछे जाने पर कि क्या चीमा के खिलाफ प्रचार करने के लिए पार्टी आलाकमान द्वारा कोई कार्रवाई की गई है, राणा गुरजीत ने कहा कि उन्हें इस पर कोई ‘कारण बताओ’ नोटिस नहीं मिला है.

कांग्रेस के चार नेताओं ने गांधी को पत्र लिखा जब इंदर प्रताप ने सुल्तानपुर लोधी से निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया, क्योंकि पार्टी ने निर्वाचन क्षेत्र से चीमा को मैदान में उतारा था.

पत्र चीमा, जालंधर उत्तर विधायक अवतार सिंह जूनियर, फगवाड़ा विधायक बलविंदर सिंह धालीवाल और पूर्व विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने लिखा है.

अमरिंदर का दावा, सिद्धू को मंत्री बनाने के लिए आया था पाकिस्तान से संदेश

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने सोमवार को दावा किया कि कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू को मंत्री बनाने के लिए उनके पास पाकिस्तान से संदेश आया

सिद्धू वर्तमान में कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष हैं. दोनों नेताओं के बीच विवाद गहराने के बाद अंतत: अमरिंदर को पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. इसके बाद कांग्रेस ने एक दलित चेहरे को आगे करते हुए चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी.

बाद में कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद अमरिंदर सिंह ने पंजाब लोक कांग्रेस का गठन कर लिया था. आगामी पंजाब चुनाव के मद्देनजर भाजपा का पंजाब लोक कांग्रेस और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींढसा के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के साथ गठबंधन हुआ है.

अमरिंदर और ढींढसा की मौजूदगी में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में तीन दलों के बीच सीटों के तालमेल की घोषणा की.

इसके बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए अमरिंदर सिंह ने कहा, ‘मैं पाकिस्तान की बात कर रहा हूं. पाकिस्तान से यह मैसेज आया कि मुझे प्राइम मिनिस्टर (पाकिस्तान के) ने एक रिक्वेस्ट भेजा है, अगर आप सिद्धू को अपनी कैबिनेट में ले सकते हैं तो मैं आपका आभारी रहूंगा. वह मेरा पुराना दोस्त है और अगर वह काम नहीं करेगा तो निकाल देना.’

सिंह ने यह आरोप भी लगाया कि वर्ष 2017 में राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद जब उन्होंने सिद्धू को अपनी कैबिनेट में शामिल किया था, तब वह कुछ काम नहीं करते थे, इसलिए उन्हें पद से हटा दिया गया था.

अमरिंदर ने कहा, ‘मैंने सिद्धू को पद से हटाया, क्योंकि वह इन्कॉम्पिटेंट (अक्षम), यूजलेस (बेकार) थे. 70 दिन में उन्होंने एक फाइल पूरी नहीं की थी.’

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इसके बाद भी जब सिद्धू के रवैये में कोई सुधार नहीं हुआ तो उन्हें हटाना पड़ा. उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्हें मंत्री बनाने के लिए पाकिस्तान से संदेश आया था.

भाजपा 65, पंजाब लोक कांग्रेस 37, शिअद (संयुक्त) 15 सीटों पर लड़ेगी चुनाव: नड्डा

आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी 65 सीटों पर जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब लोक कांग्रेस 37 और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींढसा नीत शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) 15 सीटों पर चुनाव लड़ेगा.

जेपी नड्डा. (फोटो: पीटीआई)

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सोमवार को यह घोषणा की और कहा कि पंजाब सीमा पर स्थित राज्य है और देश की सुरक्षा के लिए पंजाब में स्थिर और मजबूत सरकार बनना आवश्यक है.

पाकिस्तान द्वारा पंजाब में ड्रग्स और हथियारों की तस्करी और ड्रोन के माध्यम से देश की सुरक्षा को चुनौती देने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश बहुत तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है लेकिन देशविरोधी ताकतें हमेशा इसे पटरी से उतारने की कोशिश करती हैं.

पंजाब की 117 विधानसभा सीट के लिए 20 फरवरी को मतदान होना है. पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था और उसने 23 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. हालांकि वह मात्र तीन सीट ही जीत सकी थी. वर्तमान में उसके दो ही विधायक हैं, क्योंकि एक सीट पर उपचुनाव में उसके उम्मीदवार को पराजय का मुंह देखना पड़ा था.

नड्डा ने कहा, ‘पंजाब में एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) गठबंधन हुआ है. इसके तहत भाजपा, पंजाब लोक कांग्रेस और शिअद (संयुक्त) मिलकर पंजाब विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं. भाजपा 65 सीटों पर, पंजाब लोक कांग्रेस 37 सीटों पर और 15 सीटों पर शिअद (संयुक्त) चुनाव लड़ेगी.’

पंजाब की कांग्रेस सरकार को आड़े हाथों लेते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि माफिया राज ने पंजाब को खोखला करने का काम किया है और आज वहां जमीन से लेकर रेत और ड्रग माफिया सक्रिय है.

उन्होंने कहा, ‘इसलिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन एक प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है कि हम इस माफिया राज को समाप्त करेंगे.’

भाजपा ने शुक्रवार को पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए 34 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी. पार्टी की इस सूची में किसान परिवारों के 12 नेताओं, 13 सिखों और आठ दलितों को टिकट दिया गया था.

अमरिंदर सिंह ने भी 22 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है, जिसमें भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान अजितपाल सिंह को नकोदर से प्रत्याशी बनाया गया है. अमरिंदर खुद पटियाला शहर सीट से चुनाव लड़ेंगे.

फगवाड़ा के कांग्रेस नेता के खिलाफ मामला दर्ज

फगवाड़ा: पंजाब पुलिस ने फगवाड़ा जिला कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष दलजीत राजू और उसके सहयोगी के खिलाफ मामला दर्ज किया है. उन पर आरोप है कि उन्होंने महिला कांग्रेस की एक नेता के वॉयस संदेश के साथ छेड़छाड़ की और उसे सोशल मीडिया पर फैला दिया.

पुलिस सूत्रों ने बताया कि दलजीत राजू और उसके सहयोगी मनजोत सिंह पर रविवार तड़के भारतीय दंड संहिता और आईटी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं और बलविंदर सिंह धालीवाल की अगुवाई वाले गुट के कार्यकर्ताओं के धरने के बाद मामला दर्ज किया गया है. धालीवाल फगवाड़ा से मौजूदा विधायक हैं और 20 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार हैं.

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि दोनों ने महिला कांग्रेस की एक नेता के वॉयस संदेश के साथ छेड़छाड़ की और उन्हें बदनाम करने के लिए इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया.

महिला कांग्रेस महासचिव मीनाक्षी वर्मा ने बीते 22 जनवरी को राजू और उसके सहयोगी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी.

राजू पंजाब के पूर्व मंत्री जोगिंदर सिंह मान का करीबी सहयोगी है और उसने फगवाड़ा से धालीवाल को फिर से टिकट देने का विरोध किया था. मान अब कांग्रेस छोड़ आम आदमी पार्टी में शामिल हो चुके हैं. राजू और मनोज सिंह ने आरोपों से इनकार किया है.


उत्तराखंड विधानसभा चुनाव


कांग्रेस ने ‘चारधाम, चार काम’ अभियान की शुरुआत की

उत्तराखंड कांग्रेस ने सोमवार को ‘उत्तराखंडी स्वाभिमान – चारधाम, चारकाम’ चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की, जिसमें उसने जनता से सत्ता में आने पर पांच लाख परिवारों को सालाना 40 हजार रुपये देने, रसोई गैस सिलेंडर के दाम 500 रुपये के पार न जाने देने जैसे चार वादे किए .

उत्तराखंड चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हरीश रावत की मौजूदगी में इस अभियान का शुभारंभ करते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है और वर्तमान केंद्र सरकार के दौर में गरीब और गरीब, जबकि अमीर और अमीर हो गए हैं जिसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश कांग्रेस चुनाव ​समिति ने जनता से ये वादे किए हैं.

कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मंच पर मौजूद सभी लोगों को उत्तराखंडी टोपी पहनाई.

केंद्र सरकार पर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए गरीब आदमी को भी ग्राहक बनाने का आरोप लगाते हुए बघेल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी राज्य में सत्ता में आने पर रसोई गैस के सिलेंडर की कीमत को किसी भी परिस्थिति में 500 रुपये से अधिक नहीं बढ़ने देगी जिससे घर की अर्थव्यवस्था न बिगडे़ .

उन्होंने कहा कि बेरोजगारी की समस्या को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस ने पांच लाख परिवारों को 40 हजार रुपया सालाना देने का निर्णय किया है, जिससे वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें.

उन्होंने कहा कि इसके अलावा, चार लाख लोगों को रोजगार दिया जाएगा और प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए घर-घर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचायी जाएगी जिसके लिए ड्रोन का भी उपयोग किया जाएगा .

वघेल ने कहा कि पांच साल की पूर्ण बहुमत की सरकार होने के बावजूद भाजपा ने प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की गरिमा को तार-तार करते हुए तीन-तीन बार मुख्यमंत्री बदले और एक मुख्यमंत्री ने तो चुनाव का सामना ही नहीं किया.

पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम लिए बिना बघेल ने कहा कि एक मुख्यमंत्री ने तो अपने इतिहास के अपने ज्ञान का परिचय देते हुए देश को 200 वर्षों तक अमेरिका का गुलाम बताया, जबकि दूसरे ने कोरोना को जीव बताया.

उन्होंने कहा, ‘ऐसे अदभुत ज्ञानी व्यक्तियों को खोज-खोज कर मोदीजी ने मुख्यमंत्री की कुर्सियों पर बैठाया है.’

केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों पर केवल बातें करने का आरोप लगाते हुए बघेल ने कहा कि एक तरफ ये सरकारें कोरोना महामारी को नहीं रोक पाईं और ताली-थाली बजाती रह गई, दूसरी तरफ इन्होंने देश को नोटबंदी और जीएसटी में झोंक दिया जबकि ये मंहगाई और बेरोगजारी को भी रोकने में विफल रही हैं.


मणिपुर विधानसभा चुनाव


भाजपा मणिपुर में दो-तिहाई बहुमत के लिए पूरा जोर लगाएगी: बीरेन सिंह

आगामी विधानसभा चुनाव में सत्ता बनाए रखने को लेकर विश्वास से भरे मणिपुर के पहले भाजपा मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने रविवार को दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि इस बार उनकी पार्टी अपना संख्या बल दोगुना कर लेगी और वह अपने बलबूते दो-तिहाई बहुमत हासिल करने का प्रयास कर रही है. हालांकि उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो चुनाव बाद गठबंधन किया जा सकता है.

मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह. (फोटो साभार: फेसबुक)

उन्होंने कहा कि राज्य में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस न केवल मणिपुर बल्कि पूरे पूर्वोत्तर में सिकुड़ती जा रही है और उन्हें यकीन है कि उनकी सरकार के पांच साल के कामकाज को मतदाता पसंद करेंगे.

भाजपा ने पिछले विधानसभा चुनाव में 21 सीटें जीतने के बाद भी दो स्थानीय दलों- एनपीपी एवं एनपीएफ के साथ मिलकर सरकार बनाई थी. तब कांग्रेस ने 28 सीटें जीती थी. बाद में कांग्रेस एवं कुछ अन्य दलों के विधायकों के दल-बदल करने से विधानसभा में भाजपा का संख्या-बल बढ़ गया था.

मणिपुर में 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए 27 फरवरी और तीन मार्च को दो चरणों में चुनाव होंगे. मतगणना 10 मार्च को होगी.

सिंह ने कहा, ‘चुनाव में भारी बदलाव नजर आएगा. हम अपनी सीटें दोगुनी कर लेंगे और हम दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की जी-तोड़ कोशिश कर रहे हैं.’

उन्होंने कहा, ‘अब तक हमारा चुनाव पूर्व गठजोड़ नहीं है लेकिन यदि जरूरत महसूस हुई तो चुनाव बाद गठबंधन किया जा सकता है.’

पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी एवं पत्रकार 61 वर्षीय एन. बीरेन सिंह ने पहली बार डेमोक्रेटिक रिवोल्युशनरी पीपुल्स पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर 2002 में विधानसभा चुनाव जीता था तथा 2007 में बतौर कांग्रेस प्रत्याशी उन्होंने जीत दर्ज की थी.

वह 2016 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे. वह 2017 में हींगांग विधानसभा सीट से फिर निर्वाचित हुए. उसके बाद वह मणिपुर के 12वें मुख्यमंत्री बने. सिंह उसी सीट से फिर चुनाव लड़ सकते हैं.

वह सीटों के आवंटन एवं अन्य चुनाव संबंधी मुद्दों पर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ चर्चा के लिए यहां आए हैं.


गोवा विधानसभा चुनाव


गठबंधन की पेशकश पर जवाब देने पर बहाने बना रहे हैं चिदंबरम: तृणमूल

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस ने गोवा विधानसभा चुनावों के लिए गठबंधन नहीं बन पाने के लिए पार्टी को जिम्मेदार ठहराए जाने पर सोमवार को कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम पर निशाना साधा और उनके बयान को व्यापक विपक्षी एकता के साहसिक आह्वान पर कदम उठाने में कांग्रेस की असमर्थता के लिए बहाने पेश करने की कोशिश बताया.

पी. चिदंबरम. (फोटो: रॉयटर्स)

तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता से कहा कि वह अपनी खुद की पार्टी की उसे एकजुट रखने की ‘अक्षमता और नाकामी’ को देखें.

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पवन वर्मा ने कहा, ‘चिदंबरम वृहद विपक्षी एकजुटता के तृणमूल कांग्रेस के परिपक्व और साहसिक आह्वान के जवाब में एक तरह से अपनी पार्टी की ही अवर्णनीय और नुकसानदेह असमर्थता को बयां कर रहे हैं.

पहले उन्होंने कहा कि कोई ठोस जवाब नहीं मिला. अब जब उनकी बात काट दी गई तो वह अलग ही बात कर रहे हैं. उन्हें इस तरह के बहाने बनाना बंद कर देना चाहिए.’

चिदंबरम ने रविवार को कहा था कि गोवा में अगले महीने होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन करने के तृणमूल कांग्रेस के प्रस्ताव पर विचार नहीं किया गया, क्योंकि ममता बनर्जी की अध्यक्षता वाली पार्टी राज्य में कांग्रेस नेताओं को अपने पाले में करने की कवायद में जुट गई.

वर्मा ने पिछले सप्ताह कहा था कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से संपर्क कर गोवा में गठबंधन बनाने की पेशकश की थी, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला.

तृणमूल कांग्रेस के महासचिव कुणाल घोष ने भी कहा कि कांग्रेस को दूसरों को जिम्मेदार ठहराना बंद करना चाहिए, जबकि उसके खुद के नेताओं को अपने नेतृत्व पर भरोसा नहीं रहा.


वीडियो वैन के इस्तेमाल पर निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश जारी

निर्वाचन आयोग ने पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में प्रचार के लिए वीडियो वैन के इस्तेमाल से जुड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं. इसके तहत वीडियो वैन के किसी भी स्थल पर 30 मिनट से ज्यादा समय तक रुकने पर पाबंदी लगाई गई है.

कोरोना संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए निर्वाचन आयोग ने रैलियों के आयोजन पर लगा प्रतिबंध 31 जनवरी तक बढ़ा दिया था. हालांकि, आयोग ने शनिवार को खुली जगहों पर कोविड प्रोटोकॉल के पालन के साथ अधिकतम 500 दर्शकों की मौजूदगी में वीडियो वैन के जरिये प्रचार करने की इजाजत दी थी.

आयोग ने सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को एक पत्र जारी कर राजनीतिक दलों द्वारा वीडियो वैन के इस्तेमाल से जुड़े दिशा-निर्देश भी जारी किए थे.

पत्र में कहा गया है, ‘राजनीतिक दलों द्वारा वीडियो वैन का इस्तेमाल उनकी योजनाओं और घोषणाओं के प्रचार के लिए किया जा सकता है. इनके जरिये किसी प्रत्याशी विशेष के लिए वोट या समर्थन नहीं मांगा जा सकेगा.’

पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अगर वीडियो वैन का प्रयोग किसी उम्मीदवार के प्रचार के लिए किया जाता है तो उसका खर्च संबंधित उम्मीदवार के खाते में दर्ज किया जाएगा. चुनाव पर्यवेक्षकों को ऐसे खर्चों पर करीबी नजर रखने का निर्देश दिया गया है.

निर्वाचन आयोग ने कहा है कि वीडियो वैन से सुबह आठ से रात आठ बजे के बीच ही प्रचार किया जा सकेगा. रैलियों और रोड शो के आयोजन में इन वाहनों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी.

आयोग के मुताबिक, राजनीतिक दलों के बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में वीडियो वैन के जरिये अपनी प्रचार सामग्री का प्रदर्शन करने पर भी रोक रहेगी.

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि वीडियो वैन किसी भी प्रचार स्थल पर 30 मिनट से अधिक समय तक नहीं रुके, यह सुनिश्चित करना संबंधित राजनीतिक दल की जिम्मेदारी होगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)