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आरएसएस की मुस्लिम इकाई ने ‘धर्म संसद’ में दिए गए नफ़रती बयानों की निंदा की

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के एक दल ने अमरोहा, मुरादाबाद और रामपुर ज़िले में भाजपा के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से अभियान चलाया है. मंच की ओर से कहा गया कि संघ या सरकार का ऐसे धर्म संसद से कोई नाता नहीं है और संगठन इसका समर्थन नहीं करता तथा धर्म संसद में दिए गए बयानों की निंदा करता है.

उत्तराखंड के हरिद्वार में 17-19 दिसंबर 2021 के बीच हिंदुत्ववादी नेताओं और कट्टरपंथियों द्वारा एक ‘धर्म संसद’ का आयोजन किया गया. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की मुस्लिम इकाई ने रविवार को उत्तर प्रदेश के तीन जिलों में सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाया और विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से मुस्लिम उलेमा और विद्वानों के साथ बैठकें की.

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि संगठन के 10 सदस्यों के एक दल ने अमरोहा, मुरादाबाद और रामपुर जिले में अभियान चलाया. इस दल में इसके राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अख्तर, संगठन के मदरसा सेल के प्रमुख मजहर खान और उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष बिलाल उर रहमान शामिल थे.

समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में इसके राष्ट्रीय संयोजक और मीडिया प्रभारी शाहिद सईद ने कहा, ‘तीनों जिलों में हमने जामा मस्जिद के मौलाना, काजी और मुस्लिम बुद्धिजीवियों जैसे डॉक्टरों, वकीलों और इंजीनियरों के साथ समुदाय के सदस्यों की समस्याओं और उनके समाधान पर लंबी और गहन चर्चा की.’

बयान के अनुसार, बैठक में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने कहा कि मुस्लिम समुदाय ने समाज में बढ़ रही नफरत पर चिंता व्यक्त की. हाल में उत्तराखंड में आयोजित हुई ‘धर्म संसद’ में की गई टिप्पणी का हवाला देते हुए संगठन ने कहा, ‘उन्हें ऐसा लगता है कि धर्म संसद में की गई टिप्पणी किसी सभ्य समाज के लिए सही नहीं हैं.’

मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अख्तर ने कहा कि संघ या सरकार का ऐसी धर्म संसद से कोई नाता नहीं है और संगठन ऐसे आयोजनों का समर्थन नहीं करता तथा धर्म संसद में दिए गए बयानों की निंदा करता है.

मालूम हो कि मुस्लिमों के खिलाफ नफरत भरे भाषण संबंधी मामले की बात करें तो पिछले महीने (दिसंबर 2021) में उत्तराखंड के ​हरिद्वार शहर में आयोजित धर्म संसद के आयोजक कट्टरपंथी हिंदुत्ववादी नेता यति नरसिंहानंद थे, जिसमें कई धार्मिक नेताओं ने मुस्लिमों के खिलाफ कथित तौर भड़काऊ भाषण देने के साथ उनके नरसंहार की बात कही थी.

नरसिंहानंद ने स्वयं उस आयोजन में यह घोषणा की थी कि वे ‘हिंदू प्रभाकरण’ बनने वाले व्यक्ति को एक करोड़ रुपये ईनाम देंगे.

हरिद्वार धर्म संसद मामले में पुलिस की नाकामी पर जनता के आक्रोश के बाद उत्तराखंड पुलिस ने वसीम रिजवी, जिसे अब जितेंद्र नारायण त्यागी के नाम से जाना जाता है, को बीते 13 जनवरी को गिरफ्तार किया था. यह इस मामले में पहली गिरफ्तारी थी.

बहरहाल, हरिद्वार ‘धर्म संसद’ मामले में 15 लोगों के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं.

इस आयोजन का वीडियो वायरल होने पर मचे विवाद के ​बाद 23 दिसंबर 2021 को इस संबंध में पहली प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसमें सिर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी को नामजद किया गया था. इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने से पहले त्यागी का नाम वसीम रिजवी था. वह उत्तर प्रदेश सेंट्रल शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष भी रह चुके हैं.

प्राथमिकी में 25 दिसंबर 2021 को बिहार निवासी स्वामी धरमदास और साध्वी अन्नपूर्णा उर्फ पूजा शकुन पांडेय के नाम जोड़े गए. पूजा शकुन पांडेय निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर और हिंदू महासभा के महासचिव हैं.

इसके बाद बीते एक जनवरी को इस एफआईआर में यति नरसिंहानंद और रूड़की के सागर सिंधुराज महाराज का नाम शामिल किया गया था.

बीती दो जनवरी को राज्य के पुलिस महानिदेशक ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का भी गठन किया था. उसके बाद बीते तीन जनवरी को धर्म संसद के संबंध में 10 लोगों के खिलाफ दूसरी एफआईआर दर्ज की गई थी.

दूसरी एफआईआर में कार्यक्रम के आयोजक यति नरसिंहानंद गिरि, जितेंद्र नारायण त्यागी (जिन्हें पहले वसीम रिज़वी के नाम से जाना जाता था), सागर सिंधुराज महाराज, धरमदास, परमानंद, साध्वी अन्नपूर्णा, आनंद स्वरूप, अश्विनी उपाध्याय, सुरेश चव्हाण और प्रबोधानंद गिरि को नामजद किया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)