राजनीति

भाजपा नेता वरुण गांधी, विपक्ष ने राशन कार्ड संबंधी निर्देशों को लेकर यूपी सरकार पर साधा निशाना

विपक्ष ने योगी सरकार के उस कथित दिशानिर्देश पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें अपात्र कार्डधारकों को अपना कार्ड लौटाने अन्यथा खाद्य सुरक्षा क़ानून के तहत कार्रवाई के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी गई है. कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेता ने दिशानिर्देशों को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि अगर तथाकथित अपात्र लोग ख़ुद राशन कार्ड नहीं देते हैं तो इनसे कोरोना जैसी महामारी के दौरान दिए गए राशन की वसूली और कुर्की तक की जाएगी.

योगी आदित्यनाथ. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली/लखनऊ: विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा), कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) और सत्तारूढ़ दल भाजपा के सांसद वरुण गांधी ने भी राशन कार्ड सत्यापन दिशानिर्देशों को लेकर शनिवार को उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चुनाव हो जाने के बाद उसने गरीबों का परित्याग कर दिया.

अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली पार्टी सपा ने ट्वीट किया, ‘गरीबों को राशन से वंचित करने की यह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नई तरकीब है. उसने गरीबों के वोट लेकर सत्ता हथियायी. अब सरकार को वादे के मुताबिक उन्हें पूरा राशन देना चाहिए.’

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि हाल के विधानसभा चुनाव के दौरान मुफ्त राशन का लगातार जिक्र करने वाली यह सरकार अब तथाकथित ‘अपात्र’ लोगों को इस लाभ से वंचित करने के लिए ‘बकवास’ दिशानिर्देश लागू कर रही है.

उन्होंने जानना चाहा कि क्या राशन कार्ड के वितरण के समय मान्य मापदंड उसे बांटे जाने के बाद बदले गए और यदि राशन कार्ड गलत लाभार्थियों के हाथों में चले गए तो सरकारी अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए.

भाजपा सांसद वरुण गांधी ने कहा, ‘यदि आम आदमी के जीवन को प्रभावित करने वाले सभी मापदंड चुनाव को देखते हुए तय किए जाएंगे तो सरकार अपनी विश्वसनीयता गंवा बैठेगी.’

उन्होंने ट्वीट किया, ‘चुनाव से पहले पात्र एवं बाद में अपात्र.’

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी ने कहा, ‘चुनाव खत्म होते ही राशन कार्ड खोने वाले करोड़ों देशवासियों की याद अब सरकार को कब आएगी? शायद अगले चुनाव में..!’

वह उत्तर प्रदेश के उस कथित दिशानिर्देश पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें अपात्र कार्डधारकों को अपना कार्ड लौटाने अन्यथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून, 2013 के तहत कार्रवाई के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी गई है.

उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (सूचना) नवनीत सहगल से जब उन रिपोर्टों के बारे में पूछा गया जिसमें दावा किया गया था कि एक निर्देश जारी किया गया था, जिसमें अपात्र लाभार्थियों को 20 मई तक राशन कार्ड सरेंडर करने के लिए कहा गया था, तो शनिवार को उन्होंने कहा कि ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है.

सहगल ने कहा, ‘सरकार केवल उन्हें (राशन कार्ड) सत्यापित कर रही है. राशन कार्डों का सत्यापन अभियान एक सतत प्रक्रिया है. अगर कोई कार्ड सरेंडर (वापस) कर रहा है तो यह पूरी तरह से उनका फैसला है और वे स्वेच्छा से ऐसा कर रहे हैं.’

उन्होंने कहा कि सरेंडर किए गए कार्ड के स्थान पर नए पात्र लाभार्थियों को राशन कार्ड मिलेगा.

रालोद ने आरोप लगाया कि गरीबी के मानदंड में ही बदलाव कर प्रदेश में गरीबों की दयनीय होती स्थिति से भद्दा मजाक कर रही भाजपा सरकार. पार्टी ने ट्वीट किया, ‘कागजों पर काम करने वाली सरकार की कागजों में ही गरीबी दूर करने की शर्मनाक कोशिश.’

मुफ्त अनाज पाने वालों से नए नियम के जरिये वसूली की हो रही है तैयारी: कांग्रेस

कांग्रेस ने शनिवार को आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में नए सख्त नियमों के जरिये उन लोगों के खिलाफ कुर्की और वसूली संबंधी कार्रवाई की तैयारी हो रही है, जिन्हें कोरोना काल में मुफ्त राशन मुहैया कराया गया था.

पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने यह आरोप भी लगाया कि उत्तर प्रदेश शासन का कदम खाद्य सुरक्षा कानून का उल्लंघन है. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘भारतीय जनता पार्टी के सभी नेता और खुद प्रधानमंत्री बार-बार ये जताने से नहीं चूकते कि कैसे उन्होंने आपात समय के दौरान मुफ्त राशन बांटा, लेकिन असलियत यह है कि लोगों को दो जून की रोटी भी चुनावों को ध्यान में रखकर दी गई थी और अब जब चुनाव खत्म हो गए हैं तो लोगों के पेट पर लात मारने की तैयारी हो चुकी है.’

सुप्रिया ने कुछ दस्तावेज जारी करते हुए दावा किया, ‘इनमें से कुछ उत्तर प्रदेश के जिला आपूर्ति अधिकारियों और जिलाधिकारियों की ओर से जारी किए गए हैं. इनमें साफ तौर पर कहा गया है कि नए नियमों के तहत राशन कार्ड के लिए वे लोग ही पात्र होंगे, जिनकी खुद की जमीन न हो, पक्का मकान न हो, भैंस, बैल, ट्रैक्टर ट्रॉली आदि नहीं हो, मोटरसाइकिल न हो, मुर्गी पालन और गो-पालन न करता हो, शासन की ओर से कोई वित्तीय सहायता न मिलती हो, बिजली का बिल न आता हो, जीविकोपार्जन के लिए कोई आजीविका का साधन न हो.’

उन्होंने कहा, ‘ऐसे तमाम मानकों के जरिये अपात्र घोषित कर राशन कार्ड तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा. अगर ये तथाकथित अपात्र लोग स्वयं राशन कार्ड नहीं देते हैं तो इनसे कोरोना जैसी महामारी के दौरान दिए गए राशन की वसूली और कुर्की तक की जाएगी.’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘इनमें से कुछ दिशानिर्देश हास्यास्पद हैं, क्योंकि इनके अनुसार, यदि आपके पास मोटरसाइकिल है या आपके सिर पर छत है या मुर्गी पालन का थोड़ा सा व्यवसाय करते हैं या आय का कोई अन्य स्रोत है तो आप राशन कार्ड के लिए पात्र नहीं हैं और खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लाभों से आपको बाहर रखा गया है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘उत्तर प्रदेश में चुनाव हो चुके हैं और अब भाजपा का असली चेहरा और असली रंग दिखाई दे रहा है.’

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘जो सरकार लगातार मुफ्त राशन की बात करती रही, राशन बांटने के लिए मोदी और योगी की तस्वीर वाले बैग छपवाए, वह आज जनता से मुंह मोड़ रही है.’

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह बड़ा सवाल खड़ा करता है, क्या चुनाव और वोटों को ध्यान में रखकर कल्याणकारी योजनाएं बनाई जाएंगी और अगर ऐसा है तो सरकार की विश्वसनीयता, उसकी नीतियों और उसके इरादों पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए.

उन्होंने आरोप लगाया, ‘चुनाव से पहले मुफ्त राशन की बात करने वाले मोदी और योगी, क्या वे आज लोगों को खाद्य सुरक्षा के अधिकार से वंचित कर रहे हैं, खासकर ऐसे समय में जब लोग उच्च कीमतों, कम मजदूरी और नौकरी नहीं होने से जूझ रहे हैं.’

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार का ‘ढीला रवैया’ यहीं समाप्त नहीं होता है, क्योंकि आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि कोई राशन कार्ड जमा नहीं करता है, तो सरकार उन्हें दी गई वस्तुओं के लिए पूर्वव्यापी रूप से धन की वसूली करेगी.

उन्होंने आरोप लगाया, ‘घर वापसी के बाद भाजपा अब राशन वापसी पर ध्यान दे रही है.’

कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया, ‘इस देश में 84 प्रतिशत लोगों की आय कम हो गई है, लोगों की नौकरियां नष्ट हो गईं, महंगाई से लोगों की कमर टूट रही है. उस दौरान यह निर्णय लिया गया है कि कोई भी राशन कार्ड धारक अगर अयोग्य पाया जाता है तो उससे 24 रुपये प्रति किलोग्राम गेहूं, 32 रुपये प्रति किलोग्राम चावल की दर से वसूली होगी.’

उन्होंने सवाल किया, ‘लोगों से तो आप कुर्की की धमकी देकर, वसूली का डर दिखाकर राशन कार्ड जबरन वापस ले लेंगे लेकिन उन अधिकारियों का क्या होगा जिन्होंने तथाकथित अपात्रों को राशन कार्ड दिए? उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?’

उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा कानून का उल्लंघन किया जा रहा है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)