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असम जातीय परिषद ने चेताया, उग्रवादी समूह में शामिल हो सकते हैं पूर्वोत्तर के रिटायर्ड अग्निवीर

असम जातीय परिषद ने केंद्र से अग्निपथ योजना पर बिना चर्चा के आगे न बढ़ने का आग्रह करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर में उग्रवाद की समस्या ख़तरनाक रूप में है. इस साल ही ढाई सौ से अधिक युवा प्रतिबंधित विद्रोही समूह उल्फा में शामिल हुए हैं. ऐसे में डर है कि चार साल की सेवा के अंत में रोजगार नहीं मिला तो कुछ अग्निवीर उग्रवादी संगठनों में शामिल हो जाएंगे.

एजेपी प्रमुख लुरिनज्योति गोगोई. (फोटो साभार: फेसबुक पेज)

नई दिल्ली: असम के एक राजनीतिक दल ने केंद्र सरकार को चेताया है कि अग्निपथ योजना के तहत चार साल की नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद पूर्वोत्तर के सैनिक हताशा के चलते उग्रवादी समूहों का हिस्सा बन सकते हैं.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, असम जातीय परिषद (एजेपी) ने कहा कि अग्निपथ योजना अंततः सशस्त्र बलों को पेंशन-रहित अनियमित बलों के हवाले कर देगी और इससे देश की सुरक्षा को खतरा होगा.

एजेपी अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई ने मंगलवार को कहा, ‘उग्रवाद की समस्या पूर्वोत्तर में खतरनाक रूप में है. इस साल अकेले 250 से अधिक युवा प्रतिबंधित विद्रोही समूह यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) में शामिल हो गए. हमें डर है कि अगर चार साल की सेवा के अंत में रोजगार नहीं मिला तो कुछ अग्निवीर उग्रवादी संगठनों में शामिल हो जाएंगे.’

उन्होंने कहा कि यह अनिवार्य है कि सशस्त्र बलों में सुधार किया जाए लेकिन राजनीतिक कारणों से उनका इस्तेमाल, सैन्यकर्मियों के शोषण और देश की सुरक्षा से समझौता करने का विरोध किया जाना चाहिए.

गोगोई ने संसद या किसी अन्य मंच पर चर्चा किए बिना अग्निपथ योजना ले आने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि यह राजनीति से प्रेरित है.

उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अप्रैल में कहा था कि देश के सभी 512 जिलों में पार्टी के जिला कार्यालयों का निर्माण अगले चार सालों में पूरा हो जाएगा. गोगोई ने कहा, ‘यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण होगा अगर भाजपा ने अग्निपथ योजना को अपने कार्यालयों और इसके संरक्षक कॉरपोरेट घरानों के दफ्तरों में सुरक्षा गार्ड के रूप में नियुक्त करने के लिए तैयार किया है.’

दो साल पहले गठित इस दल ने कहा कि इस योजना को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा और बहस होनी चाहिए. पार्टी ने केंद्र से कहा कि तब तक इसे लेकर आगे न बढ़े. बता दें कि इस योजना के विरोध में पूर्वोत्तर में भी कुछ विरोध प्रदर्शन हुए हैं.

बीते 14 जून को केंद्र सरकार ने दशकों पुरानी रक्षा भर्ती प्रक्रिया में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए थलसेना, नौसेना और वायुसेना में सैनिकों की भर्ती संबंधी अग्निपथ नामक योजना की घोषणा की थी, जिसके तहत सैनिकों की भर्ती सिर्फ चार साल की कम अवधि के लिए संविदा आधार पर की जाएगी.

योजना के तहत तीनों सेनाओं में इस साल करीब 46,000 सैनिक भर्ती किए जाएंगे. योजना के तहत 17.5 साल से 21 साल तक के युवाओं को चार साल के लिए सेना में भर्ती किया जाएगा और उनमें से 25 फीसदी सैनिकों को अगले 15 और साल के लिए सेना में रखा जाएगा.

हालांकि बाद में सरकार ने 2022 में भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा को बढ़ाकर 23 साल कर दिया. इस नई योजना के तहत भर्ती रंगरूटों को ‘अग्निवीर’ कहा जाएगा.

मालूम हो कि अग्निपथ योजना के तहत रोजगार के पहले वर्ष में एक ‘अग्निवीर’ का मासिक वेतन 30,000 रुपये होगा, लेकिन हाथ में केवल 21,000 रुपये ही आएंगे. हर महीने 9,000 रुपये सरकार के एक कोष में जाएंगे, जिसमें सरकार भी अपनी ओर से समान राशि डालेगी.

इसके बाद दूसरे, तीसरे और चौथे वर्ष में मासिक वेतन 33,000 रुपये, 36,500 रुपये और 40,000 रुपये होगा. प्रत्येक ‘अग्निवीर’ को ‘सेवा निधि पैकेज’ के रूप में 11.71 लाख रुपये की राशि मिलेगी और इस पर आयकर से छूट मिलेगी.

देश के विभिन्न राज्यों, खासकर उत्तर भारत में युवाओं ने योजना के खिलाफ काफी विरोध-प्रदर्शन किए हैं.