मणिपुर: कुकी छात्रों ने यूजीसी से उन्हें अन्य विश्वविद्यालयों में ट्रांसफर करने का आग्रह किया

कुकी छात्र संगठन ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से मणिपुर विश्वविद्यालय और धनमंजुरी विश्वविद्यालय में नामांकित उनके समुदाय के छात्रों और शोधार्थियों को अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है. कहा गया है कि उनके विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक जनजातीय समूहों के ख़िलाफ़ बहुसंख्यक मेईतेई समुदाय द्वारा की जाने वाली नफ़रत और हिंसा का केंद्र बन गए हैं.

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(फोटो साभार: https://www.ugc.ac.in/)

कुकी छात्र संगठन ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से मणिपुर विश्वविद्यालय और धनमंजुरी विश्वविद्यालय में नामांकित उनके समुदाय के छात्रों और शोधार्थियों को अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है. कहा गया है कि उनके विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक जनजातीय समूहों के ख़िलाफ़ बहुसंख्यक मेईतेई समुदाय द्वारा की जाने वाली नफ़रत और हिंसा का केंद्र बन गए हैं.

(फोटो साभार: https://www.ugc.ac.in/)

नई दिल्ली: कुकी छात्र संगठन ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से राज्य में उनके समुदाय के खिलाफ हिंसा के मामलों को देखते हुए हस्तक्षेप करने और मणिपुर विश्वविद्यालय और धनमंजुरी विश्वविद्यालय में नामांकित छात्रों और शोधार्थियों को अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कुकी जनजाति के इस शीर्ष निकाय ने दो कुकी महिलाओं पर हमले का वीभत्स वीडियो ऑनलाइन सामने आने के एक दिन बाद गुरुवार (20 जुलाई) को आयोग से संपर्क किया और कुकी छात्रों को अन्य विश्वविद्यालयों में स्थानांतरित करने का आग्रह किया.

पत्र पर दोनों विश्वविद्यालयों के 310 छात्रों ने हस्ताक्षर किए हैं और यूजीसी अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार को संबोधित करते हुए कहा गया है कि उनके विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक जनजातीय समूहों के खिलाफ बहुसंख्यक मेईतेई समुदाय द्वारा की जाने वाली नफरत, आगजनी और हिंसा का केंद्र बन गए हैं.

पत्र में कहा गया है, ‘उच्चतम शिक्षा के इन दो संस्थानों के छात्रों और शोधार्थियों को उनकी पहचान पहचान की जानकारी लेकर उनके सीखने के स्थानों से तितर-बितर कर दिया गया है.’

पत्र में कहा गया है, ‘मौजूदा स्थिति को देखते हुए जहां लगातार हिंसा हो रही है, उनकी शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए हिंसा से प्रेरित विस्थापित छात्रों को उनकी पसंद के अन्य विश्वविद्यालयों में स्थानांतरित करना अत्यधिक प्राथमिकता है. अन्यथा, उनका करिअर और भविष्य हमेशा के लिए पटरी से उतर सकता है.’

संगठन के शिक्षा सचिव थांगमोई हाओकिप ने कहा, ‘छात्रों में डर है और उनके लिए अपने परिसरों में लौटना असंभव होगा. इसलिए हमने यूजीसी से इन छात्रों के लिए कोई विकल्प तलाशने का अनुरोध किया है. हमने यूजीसी से उन छात्रों की मदद करने का भी अनुरोध किया है, जिन्होंने हिंसा के दौरान अपने प्रमाण-पत्र और दस्तावेज खो दिए हैं.’

हाओकिप ने कहा कि पत्र गुरुवार को आयोग में एक हार्डकॉपी के साथ एक ईमेल के माध्यम से यूजीसी को भेजा गया था, जबकि यूजीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘हमें अभी तक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है. हम इसे पढ़ने के बाद ही कोई टिप्पणी करेंगे.’

मालूम हो कि बुधवार को सोशल मीडिया पर सामने आए परेशान करने वाले वीडियो में दो आदिवासी कुकी महिलाओं को थौबल जिले के एक गांव में नग्न अवस्था में भीड़ द्वारा घुमाने का मामला सामने आया था. इनमें से एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार भी किया गया था. इस घटना ने पूरे देश को सदमे में डाल दिया है और आक्रोश फैल गया है.

इस बीच, विपक्षी नेताओं ने इस घटना पर मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे की मांग की है.

उल्लेखनीय है कि बीते 3 मई से कुकी और मेईतेई समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा में अब तक 140 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और हजारों लोग घायल हुए हैं. लगभग 50,000 लोग विस्थापित हुए हैं.

मणिपुर में अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मेईतेई समुदाय की मांग के विरोध में बीते 3 मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद झड़पें हुई थीं, हिंसा में बदल गई और यह पिछले ढाई महीने से लगातार जारी है.

मणिपुर की 53 प्रतिशत आबादी मेईतेई समुदाय की है और ये मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं. आदिवासियों- नगा और कुकी की आबादी 40 प्रतिशत है और ये पर्वतीय जिलों में रहते हैं.

कुकी समूहों ने जहां मणिपुर की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है, वहीं विपक्षी दल हिंसा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी की आलोचना करते रहे हैं.