छत्तीसगढ़: एक गांव में छह महिलाएं पंचायत के लिए चुनी गईं, पतियों ने शपथ ली

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम ज़िले के परसवाड़ा पंचायत में छह नवनिर्वाचित महिला पंचायत सदस्यों के पतियों ने अपनी पत्नियों की जगह शपथ ली है. इसका वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने ग्राम सचिव को निलंबित कर जांच के आदेश दिए हैं.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रवर्ती/द वायर)

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के परसवाड़ा पंचायत में छह नवनिर्वाचित महिला पंचायत सदस्यों के पतियों ने अपनी पत्नियों की जगह शपथ ली है.

सोशल मीडिया में वायरल हुए एक वीडियो में छह पुरुषों को अपनी पत्नियों की ओर से शपथ लेते हुए दिखाया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद से जिला प्रशासन ने ग्राम सचिव को निलंबित कर दिया है और यह स्पष्ट कर दिया है कि त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में पतियों को शपथ दिलाने का कानून में कोई प्रावधान नहीं है, क्योंकि यहां 50% पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं.

हालांकि, गांव में स्थिति सामान्य है, परिवारों का दावा है कि चार महिलाएं अंतिम संस्कार में शामिल होने गई थीं और दो का कहना है कि वे शपथ ग्रहण में भाग लेने से हिचक रहीं थी.

छत्तीसगढ़ में जिला पंचायत के एक पूर्व सीईओ ने कहा कि 50 प्रतिशत आरक्षण के कारण पुरुषों द्वारा अपनी पत्नियों को चुनाव मैदान में उतारना कोई असामान्य बात नहीं है, और इसकी चर्चा केवल इसलिए हुई क्योंकि एक वीडियो वायरल हुआ था.

शपथ लेने वाले चार पुरुषों ने अखबार को बताया कि उन्होंने चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली थी, लेकिन जब वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हो गए तो उनके पास अपनी पत्नियों को चुनाव में उतारने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.

गांव की आबादी करीब 1,700 है और यहां 12 वार्ड हैं, जिनमें से छह महिलाओं के लिए आरक्षित हैं. 3 मार्च को नवनिर्वाचित सरपंच रतन लाल चंद्रवंशी (55) और 12 पंचों को पहली पंचायत बैठक में शामिल होने के लिए कहा गया, जहां उन्हें एक रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने थे और औपचारिक रूप से काम शुरू करना था.

रतन ने कहा, ‘हमने सभी ग्रामीणों को जश्न मनाने के लिए आमंत्रित किया.’ रतन ने दावा किया, ‘जबकि चार महिलाएं दो अंतिम संस्कारों में शामिल होने के लिए गांव से बाहर गई थीं, दो अन्य को शर्म आ रही थी क्योंकि वहां 100 से ज़्यादा पुरुष थे. इसलिए यह तय किया गया कि छह महिलाएं 8 मार्च को अलग-अलग शपथ लेंगी, जब हम अपना उप सरपंच चुनेंगे.’

हालांकि, वीडियो में ‘पंच पति’ (निर्वाचित महिलाओं के पति) को छह अन्य निर्वाचित पुरुषों के साथ शपथ लेते हुए दिखाया गया है. रतन ने जोर देकर कहा कि पुरुष प्रमाण पत्र लेने और अपनी पत्नियों की जीत का जश्न मनाने के लिए मौजूद थे. सचिव प्रवीण सिंह ठाकुर ने भी यही दावा किया, जिसे जिला प्रशासन ने नहीं माना और 5 मार्च को उन्हें निलंबित कर दिया.

जिला पंचायत के सीईओ अजय कुमार त्रिपाठी ने बताया, ‘हमने ठाकुर को निलंबित कर दिया क्योंकि उन्होंने पहली बैठक में गैर-निर्वाचित लोगों को शामिल किया था, जो केवल निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए आयोजित की गई थी.’

जब अखबार ने महिलाओं और उनके पतियों से मुलाकात की तो उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वास्तविक शपथ ग्रहण 8 मार्च को होगा. कक्षा 8 तक पढ़ी गृहिणी सरिता साहू अपने घर पर पर्दे के पीछे खड़ी होकर कहती हैं, ‘मैं अब से (पंचायत) बैठकों में भाग लूंगी.’

विद्या बाई यादव (36) ने बताया कि उस दिन उनकी तबीयत खराब थी. उनके पति चंद्रकुमार (40) जिन्होंने एसएससी तक पढ़ाई की है, कहते हैं, ‘मैं उन्हें पंच के काम में लगाऊंगा क्योंकि वह पढ़ नहीं सकती. मैं उन्हें प्रस्ताव समझाऊंगा और उनकी सहमति लूंगा.’

एक अन्य महिला पंच, नीरा चंद्रवंशी ने भी सहमति में सिर हिलाया, जब उनके पति शोभाराम (50), जो पूर्व पंच हैं, ने बताया कि वह एक रिश्तेदार के अंतिम संस्कार में शामिल होने गई थीं.

पांचवीं कक्षा तक पढ़ी संतोषी चंद्रवंशी (40) कहती हैं, ‘मैं आठ मार्च को शपथ लूंगी. मुझे नहीं पता कि पंच का काम क्या होता है, लेकिन मैं सीखूंगी.’

उनकी बेटी ने कहा, ‘मेरी मां को बैठक में जाना चाहिए था, लेकिन हमें एक अंतिम संस्कार में शामिल होना था. हमने समाचार देखा. अब जो भी हो, हम (पंचायत बैठकों में) जाएंगे. हमारे गांव के लोगों ने सुझाव दिया था कि मेरी मां चुनाव लड़े.’

एक अन्य महिला पंच गायित्री चंद्रवंशी ने कहा, ‘मेरे पति ने मुझे चुनाव लड़ने के लिए कहा था. हमें सचिव द्वारा पहली बैठक में उपस्थित होने के लिए कहा गया था, लेकिन मैं एक अंतिम संस्कार में थी. मेरे पति ने शपथ नहीं ली. उन्होंने केवल मेरा प्रमाण पत्र लिया. मैं 8 मार्च को शपथ लूंगी और पंच का काम सीखूंगी.’

इस बीच, प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कबीरधाम पंचायत के सीईओ अजय त्रिपाठी ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया के ज़रिए इस घटना के बारे में पता चला और उन्होंने जनपद सीईओ को जांच के आदेश दिए हैं. त्रिपाठी ने कहा, ‘यह एक गंभीर मामला है. जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी.’

वहीं, स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे महिलाओं का अपमान और चुनावों का मजाक बताया है.