प्रेस संगठनों ने बैंक अधिकारी से सवाल पूछने पर असम के पत्रकार की गिरफ़्तारी पर चिंता जताई

असम पुलिस ने गुवाहाटी स्थित वेब पोर्टल द क्रॉसकरंट के मुख्य संवाददाता दिलवर हुसैन मोजुमदार एसटी/एसी क़ानून का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ़्तार किया था. प्रेस संगठनों ने इसकी आलोचना करते हुए इसे मीडिया पर हमला क़रार दिया है.

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डिजिटल मीडिया पत्रकार दिलावर हुसैन मोजुमदार को असम पुलिस ने 26 मार्च की आधी रात को असम पुलिस ने गिरफ्तार किया. (फोटो: फेसबुक)

नई दिल्ली: असम पुलिस ने बुधवार (26 मार्च) आधी रात को करीब 12 घंटे की हिरासत के बाद वरिष्ठ डिजिटल मीडिया पत्रकार दिलवर हुसैन मोजुमदार को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम का उल्लंघन करने सहित विभिन्न आरोपों के तहत गुवाहाटी में गिरफ्तार किया था. उनके परिवार ने द वायर को यह जानकारी दी थी.

गौरतलब है कि मंगलवार दोपहर को असम पुलिस ने गुवाहाटी स्थित वेब पोर्टल द क्रॉसकरंट के मुख्य संवाददाता मोजुमदार को शहर के पान बाजार पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने के लिए कहा था, क्योंकि वह असम जातीय परिषद (एजेपी) क्षेत्रीय पार्टी की युवा शाखा द्वारा आयोजित एक विरोध प्रदर्शन को कवर कर रहे थे.

यह विरोध प्रदर्शन एक सहकारी बैंक में कथित भर्ती घोटाले के खिलाफ था, जिसके निदेशक मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा और भाजपा विधायक बिस्वाजीत फुकन इसके अध्यक्ष हैं.

विपक्षी पार्टी के विरोध प्रदर्शन स्थल असम को-ऑपरेटिव एपेक्स बैंक से थोड़ी दूरी पर स्थित पुलिस स्टेशन पहुंचने पर मोजुमदार को हिरासत में ले लिया गया.

इसके तुरंत बाद उन्होंने फेसबुक पर अपलोड की गई एक पोस्ट में कहा कि कथित घोटाले के बारे में बैंक के प्रबंध निदेशक (एमडी) डंबरू सैकिया से सवाल पूछने के कारण उन्हें हिरासत में लिया गया.

कुछ समय से मोजुमदार बैंक के अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं.

इससे पहले दिन में जब प्रदर्शनकारियों की नारेबाजी के बीच सैकिया मौके पर पहुंचे तो मोजुमदार ने अपना माइक उनकी तरफ कर दिया था. बाद में द क्रॉसकरंट द्वारा जारी किए गए एक वीडियो क्लिप में मोजुमदार सैकिया से रुकने के लिए कह रहे थे ताकि वह प्रदर्शनकारियों के आरोपों से संबंधित कुछ सवाल पूछ सकें.

सैकिया को मोजुमदार से ऊपर अपने कार्यालय में आने के लिए कहते हुए सुना जा सकता है, जो मोजुमदार ने कैमरापर्सन के साथ थे.

मोजुमदार के सहकर्मियों के अनुसार, सैकिया ने अपने कार्यालय में मोजुमदार से प्रदर्शनकारियों से जगह छोड़ने के लिए कहने को कहा. क्रॉसकरंट के एक सहकर्मी ने कहा, ‘मोजुमदार ने कहा कि वह सिर्फ एक पत्रकार हैं जो विरोध प्रदर्शन को कवर कर रहे हैं – वह किसी भी विरोध को समाप्त नहीं कर सकते – और कार्यालय से बाहर चले गए.’

क्रॉसकरंट के संपादक अरूप कलीता ने द वायर को बताया, ‘अजीब बात यह है कि जब वह बैंक से बाहर निकल रहे थे, तो मोजुमदार को पान बाजार थाने से फोन आया, जिसमें उन्हें तुरंत रिपोर्ट करने के लिए कहा गया. वहां पहुंचने पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया.’

कलीता ने कहा, ‘लगभग बारह घंटे तक उसे पुलिस स्टेशन में हिरासत में रखा गया. उनकी पत्नी को पुलिस स्टेशन में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई, न ही किसी सहकर्मी या कई वरिष्ठ पत्रकारों को, जो खबर मिलने पर पुलिस स्टेशन पहुंचे थे. पुलिस ने किसी को भी यह बताने से इनकार कर दिया कि उन्हें इतने घंटों तक किस आधार पर हिरासत में रखा गया.’

परिवार के एक सदस्य ने द वायर को बताया कि चूंकि मोजुमदार रोजे रखे हुए थे, इसलिए उनकी पत्नी इफ्तार लेकर थाने पहुंचीं, लेकिन उन्हें उसे ले जाने की अनुमति नहीं दी गई. न ही उनकी मधुमेह की दवाइयां ही उन्हें देने की इजाज़त मिली.

उन्होंने कहा, ‘रात करीब 11 बजे साथी पत्रकारों के लगातार आग्रह पर आखिरकार उनकी पत्नी को अंदर जाकर उनकी दवाइयां देने की अनुमति दी गई.’

आधी रात के आसपास एक पुलिस अधिकारी ने प्रतीक्षा कर रहे परिवार और पत्रकारों को बताया कि उन्हें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया है.

हालांकि, पत्नी को दी गई पर्ची में शिकायतकर्ता का नाम नहीं था; न ही यह उल्लेख था कि घटना कहां हुई.

परिवार के सदस्य ने कहा, ‘इसमें केवल एक पंक्ति का उल्लेख था, जो मोजुमदार ने कथित तौर पर एक बोडो व्यक्ति से कही थी.’

26 मार्च को उनके खिलाफ दर्ज दो मामलों में से एक में अदालत ने जमानत दे दी है, लेकिन अभी भी वे पुलिस हिरासत में हैं.

पत्रकारों, नागरिक समाज कार्यकर्ताओं और नेताओं ने गिरफ्तारी की निंदा की

मोजुमदार, जो गुवाहाटी प्रेस क्लब के सहायक महासचिव भी हैं, की सनसनीखेज गिरफ्तारी की साथी पत्रकारों, गुवाहाटी में नागरिक समाज कार्यकर्ताओं और विपक्षी पार्टी के नेताओं द्वारा व्यापक रूप से आलोचना की गई है.

25 मार्च की शाम को पुलिस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एजेपी के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई ने एक बयान में कहा कि किसी लोकतंत्र में ड्यूटी पर तैनात एक पत्रकार को हिरासत में लेना स्वीकार्य नहीं है.

गोगोई ने पूछा, ‘हुसैन एमडी से जवाब मांगने गए थे. उन्होंने क्या अपराध किया है?’ उन्होंने कहा कि इस तरह के कृत्य मुख्यमंत्री द्वारा असम में ‘जंगल राज’ को बढ़ावा देने का प्रयास है.

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष बेदब्रत बोरा ने भी इस कृत्य की निंदा करते हुए कहा, ‘प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की स्वतंत्रता पर हमला किया गया है.’

कई विपक्षी पार्टी के नेता भी थाने पहुंचे थे और प्रतीक्षा कर रहे पत्रकारों और मोजुमदार के परिवार के साथ खड़े हो गए. 26 मार्च की सुबह गुवाहाटी प्रेस क्लब ने अपने परिसर में एक विरोध बैठक आयोजित की, जिसमें बड़ी संख्या में पत्रकार, नागरिक समाज के कार्यकर्ता और विपक्षी पार्टी के सदस्य शामिल हुए.

कई वरिष्ठ पत्रकारों ने काले बैज पहनकर गिरफ्तारी के खिलाफ बात की और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की. वरिष्ठ पत्रकार सुशांत तालुकदार ने कहा, ‘दिलवर का सबसे बड़ा अपराध यह था कि वह बैंक एमडी से बात करने गए थे ताकि वह एक संतुलित रिपोर्ट तैयार कर सके.’

26 मार्च की सुबह मोजुमदार से मिलने वाले एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार मृणाल तालुकदार ने कहा, ‘दिलवर पर एक अनाम बोडो व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप हास्यास्पद है.’

गुवाहाटी प्रेस क्लब की अध्यक्ष सुस्मिता गोस्वामी और महासचिव संजय रे ने कहा कि यदि मोजुमदार को शाम तक रिहा नहीं किया गया तो क्लब उनकी हिरासत के खिलाफ सतत विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम बनाने के लिए बाध्य होगा.

लेखक-कार्यकर्ता अपूर्व बरुआ ने कहा कि यह पहली बार नहीं है कि राज्य में प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला हुआ है. उन्होंने कहा, ‘ऐसा पहले भी हुआ है, लेकिन एक बुजुर्ग के तौर पर मैं आपको सलाह देता हूं कि एकजुट होकर इसका मुकाबला करें.’

बैठक के बाद पत्रकारों की एक बड़ी भीड़ पान बाजार थाने की ओर मार्च करने लगी, जहां मोजुमदार को हिरासत में लिया गया है.

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (पीसीआई), दिल्ली द्वारा जारी एक बयान में अध्यक्ष गौतम लाहिड़ी और महासचिव नीरज ठाकुर ने गिरफ्तारी के खिलाफ गुवाहाटी प्रेस क्लब द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के साथ एकजुटता व्यक्त की.

इसे असम पुलिस की ‘अत्याचारिता’ बताते हुए बयान में कहा गया कि वह विशेष रूप से ‘उनके परिवार और उनके सहयोगियों को यह बताने से इनकार करने’ की निंदा करता है कि किस आधार पर उसे हिरासत में लिया गया है.

इसमें कहा गया है, ‘किसी पत्रकार को उसके आधिकारिक कर्तव्य का पालन करने से रोकना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत प्रदत्त प्रेस की स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन है.’

पीसीआई ने मुख्यमंत्री शर्मा, जो राज्य के गृह मंत्री भी हैं, से आग्रह किया कि वे ‘पूरी ईमानदारी से मामले को देखें और सुनिश्चित करें कि राज्य पुलिस एससी/एसटी अधिनियम की वास्तविक भावना का सम्मान करे, साथ ही इस बात को भी ध्यान में रखें कि एक ऐसे पत्रकार के खिलाफ कोई झूठा आरोप नहीं लगाया जाना चाहिए जो पिछड़े, अल्पसंख्यक समुदाय से आता है और अपने नियमित काम के हिस्से के रूप में एक संवेदनशील भ्रष्टाचार से संबंधित विरोध प्रदर्शन को कवर कर रहा था.’

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने एक बयान में कहा कि ‘ऐसे समय में जब पूरे देश में प्रेस की स्वतंत्रता खतरे में है, यह घटना मीडिया के दमन के बारे में गंभीर चिंता पैदा करती है.’

इसने असम सरकार से यह भी कहा कि वह मोजुमदार की हिरासत के कारणों को स्पष्ट करे. ‘किसी भी कीमत पर किसी भी पत्रकार को कहीं भी … अन्यायपूर्ण तरीके से हिरासत में नहीं रखा जाना चाहिए.’

एक बयान में असम महिला पत्रकार मंच ने भी ‘प्रेस की स्वतंत्रता पर इस हमले’ की निंदा की और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की.

इसमें कहा गया, ‘किसी पत्रकार को केवल अपना काम करने के लिए हिरासत में लेना – सार्वजनिक हित के मामले पर जवाब मांगना – लोकतांत्रिक सिद्धांतों और प्रेस के प्रति राज्य के व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाता है.’

नॉर्थ ईस्ट मीडिया फोरम ने मोजुमदार के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की, पुलिस की कार्रवाई की निंदा की और शर्मा से पत्रकार को रिहा करने की मांग की.

इसने मुख्यमंत्री से यह भी आग्रह किया कि वे ‘यह सुनिश्चित करें कि राज्य पुलिस एससी/एसटी अधिनियम की सच्ची भावना का सम्मान करे और रिपोर्टर के खिलाफ कोई भी झूठा आरोप दर्ज न किया जाए.’

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)