इंफाल: वरिष्ठ पत्रकार दिलवार हुसैन मोजुमदार को शुक्रवार (28 मार्च) को दूसरी बार जमानत दे दी गई. उन्हें गुरुवार को उनके खिलाफ दर्ज एक नए मामले के सिलसिले में फिर से गिरफ्तार किया गया था.
मालूम हो कि द क्रॉसकरंट के रिपोर्टर और गुवाहाटी प्रेस क्लब के सहायक महासचिव मोजुमदार को पहले मंगलवार (25 मार्च) को उस समय हिरासत में लिया गया था, जब वह पान बाजार क्षेत्र में बैंक के कार्यालय पर एक विरोध प्रदर्शन को कवर कर रहे थे. यह विरोध प्रदर्शन एक सहकारी बैंक में कथित भर्ती घोटाले के खिलाफ था, जिसके निदेशक मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा और भाजपा विधायक बिस्वाजीत फुकन इसके अध्यक्ष हैं.
उन्हें बुधवार (26 मार्च) को जमानत दे दी गई थी, लेकिन समय पर जमानत बांड प्रस्तुत न करने के कारण उन्हें अगले दिन ही रिहा किया गया.
हालांकि, एक अन्य शिकायत के सिलसिले में पुलिस ने उन्हें तुरंत पुनः गिरफ्तार कर लिया. उनकी दूसरी गिरफ्तारी असम को-ऑपरेटिव एपेक्स बैंक के प्रबंध निदेशक डंबरू सैकिया द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर हुई. पान बाजार पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के अनुसार, दोपहर करीब 12:30 बजे मोजुमदार ने कथित तौर पर बैंक के हेड ऑफिस में अवैध रूप से प्रवेश किया और महत्वपूर्ण दस्तावेज चुराने की कोशिश की. बैंक कर्मचारियों ने शोर मचाया, जिससे वह भाग गए.
पुलिस ने इस मामले में मोजुमदार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 329, 324(4), 351(2), 309(4) और 115 के तहत मामला दर्ज किया है.
हालांकि सैकिया ने मोजुमदार पर बैंक में अवैध रूप से प्रवेश करने और फाइलें चुराने का प्रयास करने का आरोप लगाया है, लेकिन द क्रॉसकरंट द्वारा जारी एक वीडियो क्लिप में प्रबंध निदेशक को मोजुमदार से बैंक में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर अपना बयान दर्ज करने के लिए अपने कार्यालय में ‘ऊपर आने’ के लिए कहते हुए देखा जा सकता है.
मंगलवार को घंटों हिरासत में रखने के बाद मोजुमदार को देर रात गिरफ्तार कर लिया गया था.
बुधवार को एक स्थानीय अदालत ने उनके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज गैर-जमानती मामले में उन्हें जमानत दे दी. जमानत देते हुए अदालत ने कहा कि जिस सुरक्षा गार्ड का मोजुमदार ने कथित तौर पर अपमान किया था, उन्होंने यह नहीं कहा है कि आरोपी ने उन्हें या उनके समुदाय को अपमानित करने के लिए कोई अपमानजनक टिप्पणी की थी.
इसमें आगे कहा गया, ‘इस स्थिति में आरोपी पर ऐसे आरोप लगाना कानून का दुरुपयोग करने से कम नहीं होगा, जिसे अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों की सुरक्षा के लिए बनाया गया था, न कि इसका इस्तेमाल झूठे आधार पर लोगों को गिरफ्तार करने के लिए एक उपकरण के रूप में किया जा रहा है.’
डिजिटल मीडिया पेशेवरों की वैधता के संबंध में मुख्यमंत्री की टिप्पणियों की निंदा
मोजुमदार की गिरफ़्तारी और दोबारा गिरफ़्तारी ने मीडिया संस्थाओं में चिंता पैदा कर दी है. प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (पीसीआई) और गुवाहाटी प्रेस क्लब दोनों ने मोजुमदार के ख़िलाफ़ कार्रवाई की निंदा की और इसे प्रेस की आज़ादी पर हमला बताया.
पीसीआई ने विशेष रूप से डिजिटल मीडिया पेशेवरों की वैधता के संबंध में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा की टिप्पणियों की आलोचना की.
शर्मा, जिनका परिवार असम में कई समाचार पोर्टल का मालिक है, ने कहा कि समाचार वेबसाइटों और यूट्यूब चैनलों के लिए काम करने वाले व्यक्तियों को पत्रकार के रूप में मान्यता नहीं दी जाती है.
गुरुवार को मोजुमदार की गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ दो शहरों में विरोध प्रदर्शन भी हुए. दिल्ली में नॉर्थईस्ट मीडिया एसोसिएशन के सदस्यों ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के सामने मौन प्रदर्शन किया और विरोध के प्रतीक के तौर पर काली पट्टी बांधी. गुवाहाटी में उसी रात पान बाज़ार पुलिस स्टेशन के सामने एक और मौन विरोध प्रदर्शन हुआ, जहां मोजुमदार को हिरासत में लिया गया था.
पीसीआई ने इसकी कड़ी निंदा की और इसे आलोचनात्मक आवाजों को दबाने के लिए पत्रकारिता को पुनः परिभाषित करने का प्रयास बताया.
इसने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की कार्रवाइयां ‘संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत गारंटीकृत प्रेस की स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन’ हैं.
मोजुमदार का मामला असम में प्रेस की स्वतंत्रता पर बढ़ती चिंताओं को उजागर करता है, खासकर तब जब राज्य की राजनीतिक प्रतिष्ठान से जुड़े मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को कानूनी कार्रवाई और धमकी का सामना करना पड़ रहा है.
