छत्तीसगढ़: बीजापुर में मुख़बिरी के शक में माओवादियों द्वारा दो शिक्षकों की हत्या की आशंका

बीजापुर ज़िले में इंद्रावती राष्ट्रीय नेशनल पार्क क्षेत्र के एक सुदूर गांव में माओवादियों द्वारा दो अस्थायी शिक्षकों की हत्या की आशंका जा रही है. पुलिस के मुताबिक, माओवादियों ने इन दोनों को पुलिस का मुख़बिर समझकर मार डाला. हालांकि अब तक शवों की बरामदगी नहीं हो सकी है.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: पीटीआई फाइल)

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में माओवादियों द्वारा दो शिक्षा दूतों (शिक्षकों) की हत्या की आशंका जताई गई है.

पुलिस के अनुसार यह घटना सोमवार (14 जुलाई) रात इंद्रावती राष्ट्रीय नेशनल पार्क क्षेत्र में हुई, जो फरसेगढ़ थाना क्षेत्र के तहत आता है और दक्षिण बस्तर का एक बेहद दुर्गम इलाका माना जाता है. 

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, माओवादियों ने इन दोनों ग्रामीण शिक्षकों को पुलिस का मुखबिर समझकर निशाना बनाया. इस साल माओवादी हिंसा में मारे गए आम नागरिकों की संख्या अब बढ़कर 25 हो गई है.

कौन थे ये ‘शिक्षा दूत’?

राज्य सरकार द्वारा बस्तर के दूरदराज गांवों में शिक्षकों की भारी कमी को देखते हुए ‘शिक्षा दूत’ योजना शुरू की गई थी. इसके तहत बारहवीं पास ग्रामीणों को अस्थायी रूप से शिक्षक नियुक्त किया जाता है और उन्हें जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) फंड से 12,000 रुपये मासिक वेतन दिया जाता है. ये शिक्षक प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाते हैं.

सोमवार रात हुई इस घटना में जिनकी हत्या की गई, उनकी पहचान पिल्लूर गांव के 28 वर्षीय विनोद माड़े और टेकामेटा गांव के 29 वर्षीय सुरेश मेटा के रूप में हुई है. ये दोनों शिक्षा दूत थे.

यह घटना सोमवार रात फरसेगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक दूरदराज़ गांव में हुई, जो बीजापुर ज़िला मुख्यालय से लगभग 57 किलोमीटर दूर स्थित है. 

अब तक शव बरामद नहीं

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) सुंदरराज पी.  ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है, लेकिन इलाके की कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण अब तक शवों की बरामदगी नहीं हो सकी है.

आईजी ने कहा, ‘घना जंगल और दुर्गम रास्तों की वजह से पुलिस टीमें मौके तक नहीं पहुंच पाई हैं. तलाशी अभियान जारी है.’ 

‘प्राथमिक रिपोर्ट में बताया गया है कि माओवादियों को संदेह था कि ये दोनों शिक्षा दूत पुलिस के लिए मुखबिरी कर रहे थे, आमतौर पर इस तरह के आरोप माओवादी अक्सर ऐसी हत्याओं को सही ठहराने के लिए लगाते हैं.’ 

हालांकि, अभी तक माओवादियों ने इस हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली है और मौके से कोई पर्चा या संदेश भी बरामद नहीं हुआ है. 

पिछली घटनाएं

बीते एक महीने में बीजापुर में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं. 21 जून को पामेड़ थाना क्षेत्र में माओवादियों ने दो ग्रामीणों की हत्या कर दी थी. 

17 जून को पेड्डाकोरमा गांव में एक 13 वर्षीय बच्चे समेत तीन ग्रामीणों की रस्सी से गला घोंटकर हत्या की गई थी. मारे गए तीन लोगों में से दो व्यक्ति मार्च में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने वाले वरिष्ठ माओवादी नेता दिनेश मोडियाम के रिश्तेदार थे.

सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि पिछले एक साल में बस्तर में तेज़ हुई माओवादी विरोधी कार्रवाईयों के जवाब में अब माओवादी कथित मुखबिरों और सरकार से जुड़े लोगों को निशाना बना रहे है.