नई दिल्ली: भारतीय कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस (सीबीसीआई) ने बुधवार (6 अगस्त) को ओडिशा के जलेश्वर में कथित तौर पर भीड़ द्वारा दो कैथोलिक पादरियों और एक कैटेकिस्ट (इसे धर्म के सिद्धांत सिखाने वाले शिक्षक) पर किए गए हमले की कड़ी निंदा की है.
सीबीसीआई ने एक बयान में कहा कि यह ताजा घटना कोई अलग मामला नहीं है, बल्कि ईसाई अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के एक चिंताजनक पैटर्न का हिस्सा है, जो देश में असहिष्णुता के बढ़ते माहौल को दर्शाता है.
सीबीसीआई के बयान में आगे कहा गया है कि ख़बरों के अनुसार, यह हमला उस समय हुआ जब जलेश्वर स्थित सेंट थॉमस चर्च के पैरिश पादरी फादर लिजो, एक अन्य पादरी, दो नन और एक कैटेकिस्ट के साथ पास के एक गांव में एक कैथोलिक घर में अंतिम संस्कार की प्रार्थना सभा आयोजित करने के बाद लौट रहे थे.
सीबीसीआई के बयान में कहा गया है, ‘जहां स्थानीय ग्रामीण महिलाओं ने ननों को बचा लिया, वहीं पादरियों और कैटेकिस्ट को रोक लिया गया, उनके साथ बदसलूकी हुई, हाथापाई की गई और उन पर धर्मांतरण का झूठा आरोप लगाया गया. फादर लिजो का मोबाइल फ़ोन जबरन छीन लिया गया और वापस नहीं किया गया. कैटेकिस्ट दुर्ज्योधन को बेरहमी से पीटा गया और उनकी मोटरसाइकिल क्षतिग्रस्त कर दी गई. लगभग 70 लोगों की उस भीड़ में कई बाहरी लोग थे.’
साउथ फर्स्ट ने इस घटना के बारे में एक्स पर पोस्ट किया और कहा कि बजरंग दल के लगभग 70 सदस्यों के एक समूह ने कथित तौर पर दो कैथोलिक पादरियों, दो ननों और कैटेकिस्ट पर हमला किया और बिना सबूत के उन पर धर्मांतरण में शामिल होने का आरोप लगाया.
पोस्ट में आगे कहा गया, ‘हमले के पीड़ित, खासकर फादर लिजो और फादर जोजो, इस घटना से स्तब्ध और निराश हैं. पुलिस द्वारा तत्काल कार्रवाई न किए जाने और चोरी हुई संपत्ति, जैसे मोबाइल फोन, बरामद न होने से समुदाय का दुख और बढ़ गया है. ताजा रिपोर्टों के अनुसार, कोई औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है और चर्च के अधिकारी स्थिति का और आकलन करने के लिए बिशप वर्गीस थोट्टमकारा के आने का इंतज़ार कर रहे हैं.’
सीबीसीआई ने अपने बयान में कहा कि इस तरह की हरकतें अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों और मानवीय गरिमा का घोर उल्लंघन हैं. भीड़ हिंसा की बढ़ती प्रवृत्ति सभी समुदायों की सुरक्षा और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा है. सीबीसीआई ओडिशा सरकार से अपराधियों की पहचान करने और उन पर मुकदमा चलाने के लिए त्वरित और निर्णायक कार्रवाई करने और सभी अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान करता है.
सीबीसीआई के बयान में कहा गया है, ‘हम अधिकारियों से संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों की रक्षा करने का भी आग्रह करते हैं, ताकि प्रत्येक नागरिक बिना किसी भय के अपने धर्म का पालन कर सके.’
सीबीसीआई ने कहा कि वह स्थिति पर बारीकी से नजर रखेगा और सभी नागरिकों, विशेषकर ईसाई समुदाय के अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा की रक्षा करने की अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग रहेगा.
