नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में लगातार दो दिनों तक चूहों द्वारा काटे गए दो नवजात शिशुओं में से एक की मंगलवार (2 सितंबर) को इलाज के दौरान मौत हो गई.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, यह घटना इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल की है, जहां भर्ती यह बच्ची गंभीर रूप से कम हीमोग्लोबिन, फेफड़ों की समस्या और अन्य जन्मजात बीमारियों से जूझ रही थी. वह वेंटीलेटर सपोर्ट पर थी. उसका वजन सिर्फ 1.2 किलो था.
अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक, चूहों ने दोनों बच्चों के कंधे और उंगलियों को काटा था. बाल रोग सर्जरी विभाग इनका इलाज कर रहा था.
डॉक्टरों के अनुसार, मृत बच्ची लगभग 5–7 दिन की थी और पास के खरगोन जिले से लाई गई थी. उसके माता-पिता ने उसे अस्पताल में छोड़ दिया था. बच्ची की हालत पहले से ही बहुत गंभीर थी और वह वेंटिलेटर पर थी.
महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज ने डीन डॉक्टर अरविंद घनघोरिया का कहना है कि बच्ची की मौत सेप्टीसीमिया (शरीर में इन्फेक्शन) से हुई, न की चूहे के काटने से, क्योंकि कट छोटा था.
दूसरे बच्चे (जो देवास जिले से है) की सर्जरी हो चुकी है और वह इस समय वेंटिलेटर पर स्थिर स्थिति में है. डीन घनघोरिया ने कहा कि आईसीयू में चूहों की समस्या पिछले 4–5 दिन से थी.
बता दें कि महाराजा यशवंतराव अस्पताल महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध है.
दो नर्सिंग ऑफिसर्स निलंबित
इस बीच अस्पताल ने दो नर्सिंग ऑफिसर्स (आकांक्षा बेंजामिन और श्वेता चौहान) को इसलिए निलंबित कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने आईसीयू में चूहों के दिखने की सूचना अस्पताल प्रशासन को नहीं दी थी.
इसके अलावा हेड नर्स कलावती बलावी, पीडियाट्रिक आईसीयू प्रभारी प्रवीणा सिंह और बाल्य रोग सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज जोशी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. इनके जवाब और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई होगी.
बताया गया है कि नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट मार्गरेट जोसेफ को उनके पद से हटा दिया गया है.
कंपनी पर एक लाख रुपये का जुर्माना
चूहों की रोकथाम के लिए जिम्मेदार कंपनी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है और उससे पूछा गया है कि उसकी सेवाएं रद्द क्यों न की जाएं.
जांच में पता चला है कि हाल की भारी बारिश के कारण अस्पताल के पास पानी भर गया था, जिससे चूहों की तादाद बढ़ी.
मेडिकल कॉलेज ने पांच डॉक्टरों और एक नर्सिंग अधिकारी की उच्चस्तरीय जांच समिति बना दी है, जो एक हफ्ते में रिपोर्ट देगी.
इसी बीच, मध्य प्रदेश राज्य मानव अधिकार आयोग ने अस्पताल अधीक्षक को मामले की पूरी जांच कर एक हफ्ते में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है.
