पीएम मोदी का मणिपुर दौरा: विपक्ष ने तमाशा क़रार दिया

मणिपुर में हिंसा भड़कने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार राज्य का दौरा कर रहे हैं. विपक्ष ने इसे तमाशा क़रार देते हुए कहा कि राज्य में प्रधानमंत्री का तीन घंटे का पड़ाव करुणा नहीं, बल्कि दिखावा, तमाशा और पीड़ित लोगों का घोर अपमान है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (13 सितंबर) को हिंसा भड़कने के बाद पहली बार मणिपुर का दौरा कर रहे हैं. (फोटो साभार: X/@BJP4India)

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (13 सितंबर) को मणिपुर का दौरा कर रहे हैं. मई 2023 में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से यह पूर्वोत्तर राज्य का उनका पहला दौरा है. विपक्ष ने उनके दौरे को तमाशा क़रार दिया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा विपक्षी दलों द्वारा कुकी और मेईतेई समुदायों के बीच जातीय संघर्ष के बाद मणिपुर न जाने की लगातार आलोचना के बीच हो रहा है. मई 2023 से इस हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिंसा प्रभावित चुड़ाचांदपुर और इंफाल में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों से भी बातचीत करेंगे. साथ ही इस दौरान 8,500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का अनावरण करेंगे. मोदी कुकी बहुल चूड़ाचांदपुर के पीस ग्राउंड से 7,300 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे. इसके अलावा मेईतेई बहुल इंफाल में 1,200 करोड़ रुपये की कुल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन भी करेंगे.

विपक्ष ने मोदी के दौरे को तमाशा करार दिया

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी के मणिपुर दौरे को दिखावा और पीड़त लोगों का अपमान बताया. उन्होंने कहा, ‘मणिपुर में आपका (नरेंद्र मोदी) तीन घंटे का पड़ाव करुणा नहीं, बल्कि दिखावा, तमाशा और पीड़ित लोगों का घोर अपमान है.’

उन्होंने एक्स पर पोस्ट में कहा, ‘आज इंफाल और चुड़ाचांदपुर में आपका तथाकथित रोड शो, राहत शिविरों में लोगों की चीखें सुनने से बचने का एक कायराना प्रयास है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘864 दिनों की हिंसा में लगभग 300 जानें गईं, 67,000 विस्थापित हुए, 1,500 से ज़्यादा घायल हुए. आपने तब से 46 विदेश यात्राएं कीं, लेकिन अपने ही नागरिकों के साथ सहानुभूति के दो शब्द कहने के लिए एक भी यात्रा नहीं की.’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘आप और गृह मंत्री अमित शाह की घोर अक्षमता और सभी समुदायों के साथ विश्वासघात की मिलीभगत को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाकर जांच से बचा लिया गया. हिंसा अभी भी जारी है. राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की ज़िम्मेदारी भाजपा की थी और अब केंद्र सरकार फिर से टालमटोल कर रही है.’

उन्होंने कहा, ‘आप अपने लिए एक भव्य स्वागत समारोह आयोजित कर रहे हैं. यह उन लोगों के ज़ख्मों पर एक क्रूर छींटा है जो अभी भी बुनियादी संवैधानिक ज़िम्मेदारियों से आपके त्याग के कारण पीड़ित हैं! आपके ही शब्दों में… आपका राजधर्म कहां है?’

वहीं, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, ‘प्रधानमंत्री मणिपुर में तीन घंटे से भी कम समय बिताएंगे. यह यात्रा शांति और सद्भाव के लिए एक बल प्रदान करने के बजाय वास्तव में एक तमाशा साबित होगी.’

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार (12 सितंबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मणिपुर दौरे को कमतर आंकते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का इस संघर्षग्रस्त राज्य का दौरा ‘कोई बड़ी बात नहीं’ है और देश के सामने मुख्य मुद्दा ‘वोट चोरी’ है.

उन्होंने कहा, ‘मणिपुर लंबे समय से हिंसाग्रस्त रहा है और प्रधानमंत्री ने अब वहां जाने का फैसला किया है. इसलिए यह कोई बड़ी बात नहीं है. आज भारत में मुख्य मुद्दा ‘वोट चोरी’ है.’

वहीं, सीपीआई(एम) नेता वृंदा करात ने कहा कि जब मणिपुर संकट में था, तब प्रधानमंत्री मोदी पूरी तरह से गायब थे. उन्होंने कहा, ‘किसी भी निर्वाचित प्रधानमंत्री के लिए अपने ही देश के किसी ऐसे राज्य का दौरा न करना एक विश्व रिकॉर्ड होगा जहां इतना गहरा संकट रहा हो… संकट की स्थिति में तुरंत हस्तक्षेप करना ही सिद्धांत है…जबकि मणिपुर संकट में था, प्रधानमंत्री मोदी पूरी तरह से गायब थे…पिछले दो सालों में जो कुछ हुआ, उसके लिए वह जवाबदेही के किसी सिद्धांत पर नहीं चल रहे हैं.’

मालूम हो कि मई 2023 से अब तक राज्य में चल रहे जातीय हिंसा में 260 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं और हज़ारों लोग बेघर हो गए हैं. मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद फरवरी से मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू है.