नई दिल्ली: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2023 में देश भर में महिलाओं के खिलाफ लगभग 4.5 लाख अपराध दर्ज किए गए, जो पिछले दो वर्षों की तुलना में मामूली वृद्धि है.
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली लगातार तीसरे वर्ष महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित ‘महानगर’ बना हुआ है.
राज्यों के आंकड़े देखें, तो उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े सबसे अधिक 66,381 मामले दर्ज किए गए. इसके बाद महाराष्ट्र में 47,101, राजस्थान में 45,450, बंगाल में 34,691 और मध्य प्रदेश में 32,342 मामले दर्ज किए गए.
अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अपराध 2023 में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 29 प्रतिशत बढ़े हैं, जिसमें मणिपुर में सबसे अधिक 3,399 मामले दर्ज किए गए.
पूर्वोत्तर राज्य, जो पिछले दो वर्षों से अधिक समय से मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच समय-समय पर होने वाली हिंसक झड़पों से त्रस्त है, में 2022 में इस श्रेणी के तहत केवल एक मामला दर्ज किया गया. यहां 2021 में कोई भी मामला दर्ज नहीं किया गया था.
उल्लेखनीय है कि हिंसाग्रस्त मणिपुर में संघर्ष के कारण कम से कम 260 लोग मारे गए हैं और 60,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं, साथ ही वहां जनसांख्यिकीय परिदृश्य में भी बदलाव आया है और समुदायों को पहाड़ियों और घाटी के बीच स्थानांतरित होने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस रिकॉर्ड से संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2023 में देश में महिलाओं के खिलाफ कुल 4,48,211 अपराध दर्ज किए गए, जो 2022 में 4,45,256 और 2021 में 4,28,278 मामलों से अधिक है.
महानगरों में दिल्ली सबसे ज्यादा असुरक्षित
दिल्ली में बलात्कार के 1,088 मामले दर्ज किए गए, जो भारत के 19 महानगरों में सबसे अधिक है.
एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में राष्ट्रीय राजधानी में महिलाओं के खिलाफ कुल 13,366 अपराध दर्ज किए गए – जो पिछले दो वर्षों की तुलना में 5.59 प्रतिशत की गिरावट है. इनमें बलात्कार, उत्पीड़न, छेड़छाड़, दहेज उत्पीड़न और दहेज हत्या के मामले शामिल हैं.
एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी में महानगरों में सबसे अधिक 503 हत्या के मामले दर्ज किए गए, इसके बाद बेंगलुरु में 206 और जयपुर में 129 मामले दर्ज किए गए.
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498ए के तहत पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के सबसे ज्यादा 1,33,676 मामले दर्ज किए गए, जबकि महिलाओं के अपहरण और व्यपहरण के 88,605 मामले सामने आए.
इसी तरह, महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से किए गए हमले से जुड़े 83,891 मामले दर्ज किए गए, जबकि बलात्कार के 29,670 मामले रिपोर्ट हुए हैं. दहेज हत्या के कुल 6,156 मामले, आत्महत्या के लिए उकसाने के 4,825 मामले और शील भंग ( करने के 8,823 मामले दर्ज किए गए हैं.
साल 2023 में दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के तहत 15,489 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 के तहत महिला पीड़ितों से जुड़े 1,788 मामले सामने आए हैं.
घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत 632 मामले दर्ज किए गए. जबकि, महिलाओं का अश्लील चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986 के तहत 31 मामले दर्ज किए गए.
पोक्सो अधिनियम के तहत बच्चों के साथ बलात्कार के 40,046 मामले, यौन शोषण (sexual assault) के 22,149, यौन उत्पीड़न ( sexual harassment) के 2,778 और बच्चों को पोर्नोग्राफी के लिए इस्तेमाल करने के 698 मामले दर्ज किए गए.
रिपोर्ट में कहा गया है कि साइबर अपराधों में 2023 में 86,420 मामलों के साथ 31.2 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जबकि 2022 में 65,893 मामले दर्ज किए गए थे.
एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में, 68.9 प्रतिशत साइबर अपराध नागरिकों को धोखा देने के उद्देश्य से किए गए, जो कुल 86,420 मामलों में से लगभग 59,526 थे.
इसके बाद यौन शोषण के 4.9 प्रतिशत यानी 4,199 मामले सामने आए थे. इसके अलावा जबरन वसूली के 3.8 प्रतिशत 3,326 मामले रिपोर्ट हुए थे.
635,159 मामले जांच के लिए लंबित
पुलिस निपटान आंकड़ों से पता चला है कि पिछले वर्षों के 1,85,961 मामले जांच के लिए लंबित थे, जिनमें 4,48,211 नए मामले दर्ज किए गए और 987 स्थानांतरित किए गए. कुल मिलाकर 635,159 मामले.
इनमें से 1,82,219 मामलों में आरोप पत्र दाखिल किए गए, जिससे आरोप पत्र दाखिल करने की दर 77.6 प्रतिशत रही. लंबित मामलों की संख्या 1,82,219 या 28.7 प्रतिशत रही.
न्यायालय निपटान आंकड़ों से पता चला है कि पिछले वर्षों के 21,84,756 मामले लंबित थे, इसके अलावा 3,50,937 नए मामले दर्ज किए गए और 6,276 मामले फिर से खोले गए, कुल मिलाकर 25,35,693 मामले.
साल 2023 में अदालतों में लंबित मामलों की संख्या 23,03,657 या 90.8 प्रतिशत तक पहुंच गई है.
महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए 2023 में कुल 6,67,940 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें 5,87,441 पुरुष, 80,490 महिलाएं और नौ ट्रांसजेंडर शामिल थे.
