पीएम मोदी द्वारा निंदा किए जाने के बाद भी नहीं थमा सीजेआई पर हिंदुत्व समूहों का हमला

हिंदुत्व समर्थक सोशल मीडिया हैंडल लगातार सीजेआई बीआर गवई पर ‘एंटी-हिंदू’ होने के आरोप लगा रहे हैं, जातिवादी तस्वीरें साझा कर रहे हैं और यहां तक कि सीजेआई पर हुए हमले की निंदा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी आलोचना कर रहे हैं. एक एआई वीडियो में तो सीजेआई के गले में मिट्टी का घड़ा टंगा दिखाया गया है. यह वही प्रतीक है जो सदियों से दलितों को अपमानित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है.

भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई पर सोमवार (6 अक्टूबर) को एक वकील द्वारा कोर्ट परिसर में जूता फेंके जाने की घटना को भले ही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ‘सोशल मीडिया पर फैली भ्रामक सूचनाओं का नतीजा’ बताया हो, लेकिन सनातन धर्म के नाम पर हुआ यह हमला दरअसल कई हफ्तों से जारी दक्षिणपंथी हिंदुत्व समर्थकों के गुस्से का नतीजा है और यह गुस्सा अब भी थमा नहीं है.

हिंदुत्व समर्थक सोशल मीडिया हैंडल लगातार गवई पर ‘एंटी-हिंदू’ होने के आरोप लगा रहे हैं, जातिवादी तस्वीरें साझा कर रहे हैं और यहां तक कि सीजेआई पर हुए हमले की निंदा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी आलोचना कर रहे हैं कि उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के ‘एंटी-हिंदू’ बयान पर खुलकर कुछ नहीं कहा और ‘आंबेडकरवादी’ बन गए हैं.

हमले का सबसे स्पष्ट जातिवादी पहलू एक एआई से बनाए गए वीडियो में दिखा, जिसे दक्षिणपंथी इन्फ्लुएंसर किक्की सिंह ने एक्स पर साझा किया. वीडियो में सीजेआई गवई के गले में मिट्टी का घड़ा टंगा दिखाया गया है, यह वही प्रतीक है जो सदियों से दलितों को अपमानित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. उन्हें थूकने के लिए घड़ा साथ रखना पड़ता था ताकि उनकी थूक ज़मीन पर न गिरे.

इस वीडियो में गवई का चेहरा नीले रंग में रंगा हुआ दिखता है और उन्हें जूते से मारा जाता है. यह पोस्ट सोमवार को हमले के कुछ ही घंटे बाद डाली गई थी और अभी तक हटाई नहीं गई है. अकाउंट के करीब 30 हज़ार फ़ॉलोअर्स हैं और पोस्ट को दो हज़ार से ज़्यादा बार रीपोस्ट किया गया है.

वीडियो में जूता फेकने वाले वकील राकेश किशोर को भी दिखाया गया है. बताया जा रहा है कि वह गवई के हालिया टिप्पणी से नाराज़ था, जो उन्होंने मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिर परिसर में भगवान विष्णु की एक टूटी मूर्ति की पुनर्स्थापना से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कही थी.

गवई ने उस याचिका को ‘पब्लिसिटी स्टंट’ बताकर ख़ारिज करते हुए कहा था, ‘जाइए, भगवान से कहिए कि वह ख़ुद कुछ करें. अगर आप विष्णु भक्त हैं, तो प्रार्थना कीजिए और ध्यान लगाइए.’

हमले के बाद वीडियो पोस्ट करते हुए किक्की सिंह ने लिखा, ‘सुप्रीम कोर्ट का अत्याचार हद से अधिक बढ़ गया था. बलात्कारियों को रिहा कर देना हिंदुओं की भावनाओं के साथ खेलना है. फिर राकेश किशोर ने आकर जवाब दे दिया.’

मुझे कोई पछतावा नहीं- आरोपी

इससे पहले आरोपी राकेश किशोर ने मंगलवार (7 अक्टूबर) को कई टीवी चैनलों पर आकर कहा कि उसे अपने किए गए पर कोई पछतावा नहीं है और उसने यह ‘भगवान के नाम पर’ किया है. 

न्यूज़ एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में उसने कहा कि वह खुद भी दलित हो सकता है, लेकिन गवई ने जब बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया, तो वे अब दलित नहीं रहे.

उसने कहा, ‘मेरा नाम डॉ. राकेश किशोर है. कोई बता सकता है मेरी जाति क्या है? शायद मैं भी दलित हूं. आप यह कहकर फ़ायदा उठा रहे हैं कि वो दलित हैं. वो दलित नहीं हैं. वो पहले सनातनी, हिंदू दलित थे, फिर उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया. अगर उन्होंने हिंदू धर्म छोड़ दिया, तो अब वे दलित कैसे हुए?’

दक्षिणपंथी समूहों का समर्थन

किशोर के कृत्य को उन दक्षिणपंथी समूहों का समर्थन मिला है जो पहले से सोशल मीडिया पर गवई के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे थे. हमले के बाद वे इसे जायज़ ठहरा रहे हैं, यह कहते हुए कि सीजेआई एंटी हिंदू हैं.

यूट्यूबर अजीत भारती ने एक्स पर लिखा, ‘यह आरंभ है. ऐसे पतित, हिन्दू विरोधी और कायर जजों के साथ सड़कों पर भी ऐसा ही होगा यदि वो आदेश में लिखी जाने वाली बातों से इतर अपने विषैले हृदय के उद्गार, हिन्दुओं को नीचा दिखाने के लिए प्रकट करेंगे.’

(फोटो: स्क्रीनग्रैब/एक्स)

हालांकि बाद में यह ट्वीट डिलीट कर दिया गया.

वहीं, ‘मिशन आंबेडकर’ के संस्थापक सूरज कुमार बौद्ध ने भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी को पत्र लिखकर भारती और कथावाचक अनिरुद्धाचार्य (उर्फ़ अनिरुद्ध राम तिवारी) के ख़िलाफ़ हमले के पहले सीजेआई को धमकाने वाला वीडियो बनाने ले लिए आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की अनुमति मांगी है.

द वायर हिंदी ने रिपोर्ट किया था कि हमले से कई हफ्ते पहले से ही सोशल मीडिया पर सीजेआई के ख़िलाफ़ नफ़रती अभियान चलाया जा रहा था. #ImpeachCJI ट्रेंड कर रहा था और हिंदुत्व समर्थक अकाउंट्स उन्हें ‘हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला’ बता रहे थे.

भगवान विष्णु पर गवई की टिप्पणी के दो दिन बाद, 18 सितंबर को अजीत भारती ने उन्हें ‘हिंदू-विरोधी भावना से ग्रसित घटिया जज’ कहा था.  उन्होंने सीजेआई की तुलना हिरण्यकश्यप से की थी और कहा था, ‘तुम सिर्फ़ एक आंबेडकरवादी इंसान हो.’ 

सॉलिसिटर जनरल मेहता ने भी माना कि यह हमला ‘सोशल मीडिया पर फैली भ्रामक सूचनाओं’ का नतीजा था.

उन्होंने कहा, ‘मैंने खुद मुख्य न्यायाधीश को सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों पर श्रद्धा के साथ जाते देखा है. उन्होंने ख़ुद इस बात का स्पष्टीकरण दिया है. यह समझ से परे है किसी ने ऐसा कदम क्यों उठाया. यह प्रसिद्धि पाने की सस्ती कोशिश लगती है.’

इसके बावजूद सोशल मीडिया पर नफ़रत जारी रही. हमले के बाद भारती ने लीगल पोर्टल लाइव लॉ की एक पोस्ट को कोट ट्वीट किया, जिसमें ‘जूता’ शब्द का ज़िक्र नहीं था. भारती ने लिखा, ‘जूते को ‘ऑब्जेक्ट’ लिखने से सम्मान नहीं बच जाएगा.’ 

115,000 फ़ॉलोअर्स वाले ‘जाट एसोसिएशन’ अकाउंट ने लिखा, ‘क्या एक सीजेआई का दर्जा देश के 100 करोड़ हिंदुओं से बड़ा है?’

सोमवार रात दक्षिणपंथी प्रोपेगंडा पोर्टल ओप इंडिया ने इस घटना पर वीडियो जारी करते हुए लिखा, ‘गवई ज़ुबान के ढीले आदमी हैं, उन्हें देश से माफ़ी मांगनी चाहिए.’

वीडियो में ऑपइंडिया की एडिटर-इन-चीफ़ नूपुर जे. शर्मा कहती हैं कि गवई की टिप्पणी ‘जानबूझकर हिंदुओं के प्रति की गई खुली धृष्टता थी, क्योंकि उन्हें पता था कि उनके इस बयान के लिए उन्हें किसी गंभीर परिणाम का सामना नहीं करना पड़ेगा.’ 

शर्मा ने कहा कि यह ‘शक्ति के दुरुपयोग’ का मामला था. उन्होंने यह भी कहा कि हिंसा का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण ज़रूर है, लेकिन यह ‘न्यायपालिका पर नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति पर था जिसने हिंदू आस्था का मज़ाक उड़ाया था.’ 

शर्मा ने यह भी कहा कि सीजेआई पर हिंसा का यह प्रयास हिंदुओं की लाचारी को दर्शाता है. 

मोदी पर भी फूटा दक्षिणपंथी हिंदुत्व समूहों का गुस्सा 

घटना के तुरंत बाद सभी राजनीतिक दलों ने हमले की निंदा की, लेकिन भाजपा चुप रही. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात में बयान जारी कर कहा कि उन्होंने सीजेआई से बात की है और यह घटना ‘अत्यंत निंदनीय’ है. हालांकि, उन्होंने हमले के कारण या इसके जातिगत पहलू पर कोई टिप्पणी नहीं की.

मोदी का बयान हिंदुत्व समर्थकों को रास नहीं आया. कई दक्षिणपंथी अकाउंट्स ने उनके पोस्ट पर नाराज़गी जताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि जब गवई ने विष्णु पर टिप्पणी की, तब मोदी चुप रहे थे. 

‘SagasofBharat’ नामक एक अकाउंट ने लिखा, ‘कृपया अपने बारे में बात करें, सारे भारतीयों के बदले नहीं. विष्णु पर टिप्पणी पर तो चुप रहे, लेकिन अब जूता फेंकने पर चिंता दिखा रहे हैं? आप हिंदुओं के नहीं, भीम आर्मी के नेता बन गए हैं.’

8.7 लाख फ़ॉलोअर्स वाले ‘द स्किन डॉक्टर’ नामक एक अकाउंट ने लिखा, ‘क्या इस हमले के पीछे के कारण पर आपकी कोई राय नहीं है? या उससे आपको उतना गुस्सा नहीं आया था कि आप बोल सके.’

एक अन्य यूज़र गरवित सेठी ने लिखा, ‘जब सीजेआई ने विष्णु का अपमान किया, तब आप मौन थे. अब जब किसी ने बस जूता फेंका, तो आप चिंतित हैं? आपकी यह चिंता तब कहां थी जब सीजेआई ने पूरे हिंदू समाज की अवहेलना की थी? अब से आप हिंदू होने का दिखावा करना बंद करें, सबको पता है कि आप दिल से आंबेडकरवादी बन चुके हैं.’ 

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)