नई दिल्ली: मानसून सत्र के दौरान विपक्ष की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चर्चा की लगातार मांगों का विरोध करने के बाद, सरकार ने मंगलवार (2 दिसंबर) को शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन इस विषय पर चर्चा के लिए सहमति दे दी है. यह बहस अगले सप्ताह चुनावी सुधारों से जुड़े अन्य मुद्दों के साथ होगी.
हालांकि, सरकार का कहना है कि यह चर्चा केवल वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर होने वाली बहस के बाद ही की जाएगी.
संसद की यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब एसआईआर प्रक्रिया देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही है और इस काम में लगे कई ब्लॉक स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) की मौत की खबरें आ चुकी हैं.
यह निर्णय मंगलवार दोपहर को सभी दलों के फ्लोर लीडरों की लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से उनके कार्यालय में मुलाकात के बाद लिया गया. दोनों सदनों में विपक्षी सदस्यों ने एसआईआर पर चर्चा की मांग उठाई थी.
बताया गया है कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष चर्चा सोमवार (8 दिसंबर) को होगी, जबकि चुनाव सुधारों पर चर्चा मंगलवार और बुधवार (9 और 10 दिसंबर) को आयोजित की जाएगी.
बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि संसद में केवल चुनाव सुधारों पर ही चर्चा की जा सकती है, जबकि एसआईआर चुनाव आयोग का प्रशासनिक निर्णय है, जिस पर सरकार टिप्पणी नहीं कर सकती.
उन्होंने कहा, ‘हम पहले भी कह रहे थे कि चुनाव आयोग की बड़ी भूमिका है क्योंकि वही पूरे देश में चुनाव कराता है. इस संबंध में नियम और विनियम मौजूद हैं, जिनमें संसद द्वारा पारित जनप्रतिनिधित्व अधिनियम भी शामिल है. चुनाव सुधारों पर चर्चा संसद में हो सकती है, लेकिन एसआईआर चुनाव आयोग का प्रशासनिक निर्णय है, इसलिए सरकार उस पर कुछ नहीं कह सकती क्योंकि चुनाव आयोग स्वतंत्र संस्था है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘इसी वजह से हमने दोनों मुद्दों को अलग रखा था. लेकिन अब जब हम सब साथ आए हैं, तो सरकार भी देश के सामने अपना पक्ष रखेगी और हमारे खिलाफ जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उस पर स्थिति साफ़ होगी.’
इस बीच राज्यसभा में धारा 267 के तहत विपक्ष द्वारा दिए गए नोटिस को अस्वीकार कर दिया गया. इसके बाद विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि एसआईआर पर चर्चा देश के हित में है और अब ही कराई जानी चाहिए.
उन्होंने कहा, ‘एसआईआर पर चर्चा देश, नागरिकों और लोकतंत्र के हित में है. हम सब इस मुद्दे पर सरकार से चर्चा करने के लिए तैयार हैं. यह एक तात्कालिक मामला है.. एसआईआर के काम के दबाव में 28 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. मैं चाहता हूं कि यह चर्चा अब हो, सिर्फ लोकतंत्र, नागरिकों और देश के हित में.’
इस पर किरन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष की मांग पर विचार किया जा रहा है, लेकिन चुनाव सुधारों और एसआईआर पर चर्चा केवल वंदे मातरम् पर चर्चा के बाद ही होगी.
विपक्षी दलों ने कहा कि लोकतंत्र की भावना के अनुरूप उन्होंने अपनी रणनीति बदली है.
तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा, ‘एक जिम्मेदार विपक्ष के तौर पर हमने संसद को चलाने के लिए हरसंभव प्रयास किया है. हमने सहयोग का रुख अपनाया है, भले ही हम ऐसी सरकार से मुकाबला कर रहे हैं जो संसद का मज़ाक उड़ाती है. हां, एसआईआर पर चर्चा हमारी शीर्ष प्राथमिकता थी और है (क्योंकि लोग मर रहे हैं). लेकिन संसदीय लोकतंत्र की भावना के अनुरूप हमने सरकार के समय के प्रस्ताव को स्वीकार किया है और रणनीतिक बदलाव किया है. हम दोनों बहसों में सरकार को घेरेंगे.’
इससे पहले सोमवार को विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया था कि सत्र शुरू होने से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में एसआईआर पर चर्चा करने पर सहमति बनी थी, लेकिन सरकार ने मानसून सत्र को बिना चर्चा के समाप्त कर दिया था, जिससे भरोसे की कमी पैदा हुई है.
विपक्षी सदस्यों ने कहा था कि सरकार चर्चा को किसी भी रूप में शब्दबद्ध कर सकती है, लेकिन एसआईआर पर चर्चा सदन में होनी चाहिए. वहीं सरकार ने कहा कि वह एसआईआर पर चर्चा के खिलाफ नहीं है, लेकिन इस पर किसी तरह की समयसीमा या शर्त नहीं लगाई जा सकती.
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