विधि आयोग के प्रमुख से मिले विपक्षी नेता, ‘एक देश, एक चुनाव’ की उपयोगिता पर पूछे सवाल

विपक्ष के सदस्यों ने ‘एक देश, एक चुनाव’ से जुड़े प्रस्तावित क़ानून की उपयोगिता को लेकर विधि आयोग के प्रमुख से सवाल किए. कुछ विपक्षी नेताओं ने यह चिंता भी ज़ाहिर की है कि एक देश, एक चुनाव को बिना उचित सार्वजनिक परामर्श के आगे बढ़ाया जा रहा है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: विपक्ष के सदस्यों ने गुरुवार (4 दिसंबर) को ‘एक देश, एक चुनाव’ से जुड़े प्रस्तावित कानून की उपयोगिता को लेकर विधि आयोग के प्रमुख से सवाल किए. कुछ विपक्षी नेताओं ने यह चिंता भी जाहिर की कि एक देश, एक चुनाव को बिना उचित सार्वजनिक परामर्श के आगे बढ़ाया जा रहा है.

गुरुवार को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी), जो एक देश एक चुनाव को लागू करने वाले विधेयक की जांच कर रही है, ने भारत के 23वें विधि आयोग के प्रमुख दिनेश माहेश्वरी के विचार सुने.

द ट्रिब्यून ने सूत्रों के हवाले से बताया कि कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने माहेश्वरी से पूछा कि एक साथ चुनाव देश के लिए कैसे उपयोगी होंगे और इस प्रस्ताव को उचित ठहराने के लिए तीन ठोस उदाहरण भी मांगे.

माहेश्वरी को तब कई सवालों का सामना करना पड़ा, जब उन्होंने यह टिप्पणी की कि लोगों को चुनावी कार्यक्रम या चुनावों के समय को लेकर चिंतित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें मतदाता के रूप में अपनी भूमिका पर ध्यान देना चाहिए. इसके बाद कई विपक्षी सदस्यों ने पूछा कि चुनावी प्रक्रिया में मतदाताओं की भूमिका को कैसे कमतर आंका जा सकता है.

बैठक के बाद जेपीसी अध्यक्ष और भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने पत्रकारों से कहा कि जिन सदस्यों को संदेह थे, उन्हें स्पष्टीकरण दे दिया गया है और बाकी मुद्दों को लिखित रूप में लिया जाएगा.

उन्होंने कहा, ‘विशेषज्ञ आए थे, जिनमें विधि आयोग के अध्यक्ष भी शामिल थे. सभी सदस्यों ने स्पष्टीकरण मांगे और समिति अपनी सिफारिशें देने से पहले हर बात पर विचार करेगी. एक देश एक चुनाव देश के हित में है क्योंकि यह कई समस्याओं को हल करेगा, चाहे वे आर्थिक हों या शासन से जुड़ी… समिति सभी को अपने विचार रखने के लिए पर्याप्त समय दे रही है.’

समिति की अगली बैठक 10 दिसंबर को होगी, जिसमें राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल को बयान देने के लिए आमंत्रित किया गया है.

गौरतलब है कि बीते साल 17 दिसंबर 2024 को लोकसभा में ‘एक देश, एक चुनाव’ के लिए पेश किए गए विधेयक का विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध किया था. इसका 269 सांसदों ने समर्थन किया था, जबकि 198 सांसदों द्वारा विरोध देखने को मिला था. इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय मामलों के मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस विधेयक को संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) को भेजने का प्रस्ताव रखा था.

‘एक देश, एक चुनाव’ के लिए संविधान में 129वां संशोधन कर इसके तीन अनुच्छेदों में संशोधन और एक नया अनुच्छेद 82ए जोड़ने का प्रस्ताव है. इस संशोधन के मुताबिक, राष्ट्रपति को लोकसभा के पहले सत्र के बाद एक ‘नियुक्त तिथि’ की अधिसूचना जारी करनी होगी, और इस तिथि के बाद चुनी गई किसी भी राज्य विधान सभा का कार्यकाल लोकसभा के समापन के साथ समाप्त हो जाएगा.

इन प्रस्तावित संशोधनों की सिफारिश पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति ने की थी, जिसने इस वर्ष मार्च 2024 में अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी थी.