श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में अधिकारियों ने प्रशासन के आदेशों का पालन कराते हुए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) उपयोगकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है. इस मामले में पुलिस ने कम से कम दो एफआईआर दर्ज की हैं और दर्जनों लोगों को निषेधाज्ञा के तहत पाबंद किया गया है.
इस संबंध में जम्मू और कश्मीर पुलिस ने शनिवार (3 जनवरी) को बताया कि मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में वीपीएन के कथित उपयोग के आरोप में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं और 11 संदिग्धों के खिलाफ सुरक्षा संबंधी कार्रवाई शुरू की गई.
मालूम हो कि वीपीएन को पिछले महीने केंद्र शासित प्रदेश के कुछ हिस्सों में प्रतिबंधित कर दिया गया था.
बडगाम जिले के पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि वीपीएन प्रतिबंध के संबंध में ‘आतंकवाद से जुड़े संदिग्ध इतिहास वाले व्यक्तियों’ के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई हैं.
प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि 29 दिसंबर (जिस दिन जिले में निषेधाज्ञा जारी की गई थी) से शनिवार (2 जनवरी) तक इंटरनेट गतिविधियों की ‘व्यवस्थित जांच और निगरानी’ के बाद एफआईआर दर्ज की गईं.
यह आदेश बडगाम जिला मजिस्ट्रेट द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत लागू किया गया था.
हालांकि, बयान में दोनों एफआईआर का विवरण नहीं दिया गया और न ही यह बताया गया कि अब तक कोई गिरफ्तारी हुई है या नहीं, लेकिन इसमें कहा गया है कि जिले में 24 लोग वीपीएन का इस्तेमाल करते पाए गए हैं और ये मामले ‘एनक्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग से उत्पन्न सुरक्षा जोखिमों को उजागर करते हैं’.
बयान में आगे कहा गया है, ‘इसके अलावा निषेधाज्ञा का पालन न करने के लिए 18 से 40 वर्ष की आयु के 11 व्यक्तियों के खिलाफ सुरक्षा कार्यवाही शुरू की गई. इन लोगों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत पाबंद किया गया और चेतावनी देकर बाद में रिहा कर दिया गया. इन सभी लोगों आगे से नियमों का पालन करने का निर्देश दिया गया है.
उल्लेखनीय है कि बीएनएसएस की धारा 126 मजिस्ट्रेट को किसी भी ऐसे व्यक्ति से जमानत बॉन्ड लेने का अधिकार देती है, जिसके बारे में यह माना जाता है कि वह शांति भंग करने या सार्वजनिक शांति भंग करने की संभावना रखता है.
वहीं, धारा 170 पुलिस अधिकारी को संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए बिना वॉरंट के किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार देती है.
गौरतलब है कि जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने धारा 163 के तहत केंद्र शासित प्रदेश के कुछ हिस्सों में वीपीएन के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह धारा कार्यकारी मजिस्ट्रेट को उपद्रव या खतरे को रोकने के लिए तत्काल आदेश जारी करने की आपातकालीन शक्तियां प्रदान करती है.
ज्ञात हो कि चेनाब घाटी के अशांत डोडा और किश्तवार जिलों में पहले लागू किए गए एकतरफा प्रतिबंध को प्रशासन ने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे’ और ‘अशांति भड़काने’ की आशंकाओं का हवाला देते हुए केंद्र शासित प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी बढ़ा दिया है.
इससे पहले शुक्रवार को दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले की पुलिस ने बताया था कि 29 दिसंबर को प्रतिबंध लागू होने के बाद से 15 स्मार्टफोन उपयोगकर्ता वीपीएन का इस्तेमाल करते पाए गए हैं. इनमें से 10 लोगों के खिलाफ पुलिस ने ‘सुरक्षा कार्यवाही’ शुरू कर दी है और निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के लिए उन्हें पाबंद किया गया है.
पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, शुक्रवार को पड़ोसी कुलगाम और पुलवामा जिलों में 100 से अधिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता वीपीएन का इस्तेमाल करते पाए गए. इनमें से 49 उपयोगकर्ताओं के खिलाफ पुलिस ने सुरक्षा कार्यवाही शुरू कर दी है, हालांकि अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है.
हालांकि, कि ये यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया कि केंद्र शासित प्रदेश के अन्य जिलों, जहां वीपीएन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिनमें ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर भी शामिल है, में भी पुलिस ने इसी तरह की कार्रवाई की है या नहीं.
इस संबंध में प्रशासन ने वीपीएन उपयोगकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा था कि संवेदनशील सामग्री से संबंधित डेटा/जानकारी को संभावित साइबर खतरों से बचाने के लिए बीएनएसएस की धारा 163 के तहत ‘तत्काल निवारक उपाय’ आवश्यक हैं.
शोपियां डीएम द्वारा 29 दिसंबर को जारी एक आदेश में कहा गया है, ‘ऐसी गतिविधियों का दुरुपयोग गैरकानूनी और राष्ट्र विरोधी उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है, जिनमें अशांति फैलाना, भड़काऊ सामग्री का प्रसार करना और जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में कानून व्यवस्था और सुरक्षा के लिए हानिकारक गतिविधियों का समन्वय करना शामिल है.’
इससे पहले, 27 दिसंबर को डोडा पुलिस ने दो व्यक्तियों पर डीएम के आदेशों का उल्लंघन करते हुए वीपीएन एप्लिकेशन का उपयोग करने के आरोप में मामला दर्ज किया था.
मालूम हो कि देश के मौजूदा कानूनों के अनुसार वीपीएन का उपयोग करना अवैध नहीं है, फिर भी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 28 अप्रैल, 2022 को वीपीएन प्रदाताओं को उपयोगकर्ताओं का केवाईसी (‘अपने ग्राहक को जानें’) करने और पांच साल तक लॉग बनाए रखने का निर्देश दिया था.
इस आदेश की कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ी आलोचना करते हुए इसे निजता का उल्लंघन और ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन’ बताया था. इसके चलते कई वीपीएन सेवा प्रदाताओं को भारत में अपने सर्वर बंद करने पड़े हैं.
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