राष्ट्रीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीले से बदलकर भगवा किया गया, पूर्व कप्तान ने की आलोचना

भारतीय हॉकी टीम ने केसरिया रंग की नई जर्सी का अनावरण किया है. इस फैसले की सोशल मीडिया पर व्यापक आलोचना हो रही है. यूज़र्स ने इसे खेलों का ‘भगवाकरण’ क़रार दिया. वहीं, हॉकी इंडिया ने नई जर्सी के रंग का बचाव करते हुए कहा कि भगवा रंग साहस, बलिदान और विजय का प्रतीक है.

नई केसरिया जर्सी में भारतीय पुरुष हॉकी टीम. (फोटो: x/@TheHockeyIndia)

नई दिल्ली: नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले 2026 वर्ल्ड कप से पहले भारतीय राष्ट्रीय हॉकी टीम ने सोमवार (27 जुलाई) को अपनी ‘नई इंडिया जर्सी’ का अनावरण किया. यह पूरी तरह से भगवा या केसरिया रंग की टी-शर्ट है, जो दशकों से चली आ रही नीली जर्सी से बिल्कुल अलग है.

इस फैसले की सोशल मीडिया पर व्यापक आलोचना हो रही है. कई यूजर्स ने खेलों के ‘भगवाकरण’ पर सवाल उठाया है और कहा है कि पिछले एक दशक में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा राजनीतिक रूप से जुड़े इस रंग को अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार प्रमुखता दी गई है.

जर्सी के रंग में इस बदलाव की आलोचना भारत की पुरुष हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और ओलंपियन वीरेन रस्किन्हा ने भी की है. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में इस फैसले को ‘शर्मनाक’ बताया और सवाल उठाया कि टीम मैनेजमेंट ने उस मशहूर नीले रंग को क्यों छोड़ दिया, जिसे फैंस हमेशा से राष्ट्रीय टीम की पहचान मानते आए हैं.

उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘मुझे कहना होगा कि @TheHockeyIndia ने भारतीय हॉकी के लिए कई अच्छे काम किए हैं. लेकिन यह शर्मनाक है. भारतीय टीम की विरासत और पहचान हमेशा नीला रही है. मैंने कई वर्षों तक नीली जर्सी गर्व के साथ पहनी है. प्रशंसक हमारी भारतीय टीम को नीले रंग में देखना चाहते हैं. ऑरेंज रंग का क्या लॉजिक है?’

हालांकि, उनकी टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने लगीं और लोगों ने जर्सी के रंग में बदलाव के राजनीतिक संकेतों की ओर इशारा किया. इसके बाद रस्किन्हा ने खुद को किसी भी राजनीतिक बहस से अलग करते हुए स्पष्ट किया कि वह ‘इसमें से किसी में नहीं पड़ना चाहते’ और उनकी आपत्ति पूरी तरह खेल की पहचान, गौरव और विरासत से जुड़ी है.

उन्होंने आगे लिखा, ‘भारत हॉकी के लिए वही है, जो अर्जेंटीना फुटबॉल के लिए है. क्या हम कभी अर्जेंटीना को नारंगी और सफेद धारियों वाली जर्सी अपनी पहली जर्सी के तौर पर पहनते हुए देखेंगे?’

हॉकी इंडिया ने भगवा रंग को बताया साहस और बलिदान का प्रतीक

हालांकि, हॉकी इंडिया ने नई जर्सी के रंग का बचाव किया है. संगठन का कहना है कि भगवा रंग साहस, बलिदान और विजय का प्रतीक है. हॉकी इंडिया के अनुसार, जर्सी की डिजाइन के लिए प्रेरणा राष्ट्रीय ध्वज और उगते हुए सूर्य से ली गई है.

जर्सी के नए डिजाइन की घोषणा करते हुए हॉकी इंडिया के एक्स अकाउंट पर पोस्ट किए गए वीडियो में बताया कि नई किट में ‘भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाने’ के लिए मंडला-प्रेरित पैटर्न शामिल किए गए हैं. जर्सी में गहरे नीले रंग के हिस्से भी हैं, जिन्हें अशोक चक्र से जोड़ा गया है.

वीडियो के मुताबिक, जर्सी की छाती पर बना ग्राफिक सुदर्शन चक्र का आधुनिक रूप है, जबकि कंधों और किनारों पर तिरंगे के रंगों की पट्टियां दी गई हैं. हॉकी इंडिया ने कहा कि नई जर्सी का डिजाइन ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को दर्शाता है.

आलोचकों ने इस मामले से जुड़ी एक और बात की ओर भी ध्यान दिलाया है. 2026 वर्ल्ड कप की मेज़बानी नीदरलैंड्स भी कर रहा है, एक ऐसा देश जिसकी खेलों की पहचान दुनिया भर में नारंगी रंग से जुड़ी है. इस बात ने लोगों के मन में चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि भारत जिस विश्व कप में हिस्सा लेने जा रहा है, उसमें वह ऐसी जर्सी पहनकर मैदान पर उतरेगा जिसका रंग मेजबान देश की खेल पहचान से कहीं अधिक जुड़ा हुआ है.

क्रिकेट में भी हो चुका है भगवा जर्सी को लेकर विवाद

यह पहली बार नहीं है जब स्पोर्ट्स किट के भगवाकरण को लेकर बहस छिड़ी हो. 2019 के वनडे क्रिकेट विश्व कप, जो इंग्लैंड में हुआ था, के दौरान भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने नारंगी रंग की वैकल्पिक जर्सी पहनी थी. हालांकि उस समय बदलाव आंशिक था और नीले रंग को पूरी तरह हटाया नहीं गया था, फिर भी इस फैसले पर सार्वजनिक स्तर पर काफी चर्चा और सवाल उठे थे.

2023 वनडे क्रिकेट विश्व कप से पहले भी यह विवाद फिर सामने आया था. द वायर ने रिपोर्ट किया था कि भारत-पाकिस्तान मैच के लिए ‘मुख्य रूप से’ भगवा रंग की यूनिफॉर्म पर चर्चा हो रही थी. हालांकि, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने ऐसी किसी योजना से इनकार किया था और पुष्टि की थी कि भारतीय टीम अपनी ‘पहचान वाली नीली जर्सी’ ही पहनती रहेगी.

मौजूदा हॉकी जर्सी में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब 14 से 30 अगस्त तक हॉकी विश्व कप आयोजित होने वाला है. इस टूर्नामेंट में पहली बार पुरुष और महिला दोनों वर्गों के विश्व कप एक साथ आयोजित किए जाएंगे.