साईबाबा की स्मृति में सभा करने के लिए नामजद छात्रों से कोर्ट ने कहा- आपका करिअर बर्बाद हो गया

मुंबई की एक अदालत टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के उन छात्रों के ख़िलाफ़ दर्ज मामला सुन रही है. छात्रों पर आरोप है कि उन्होंने दिवंगत प्रोफेसर जीएन साईबाबा की पहली पुण्यतिथि पर एकत्रित होकर कार्यक्रम आयोजित किया था. कोर्ट ने उनकी अग्रिम ज़मानत याचिकाओं पर सुनवाई को इस महीने के अंत तक के लिए स्थगित करते हुए पहले दी गई अंतरिम सुरक्षा को बढ़ा दिया है.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: फेसबुक/Tata Institute of Social Sciences)

नई दिल्ली: सोमवार को मुंबई की एक सत्र न्यायालय के न्यायाधीश ने टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस) के नौ छात्रों को फटकार लगाई, जिन पर दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा की स्मृति में उनकी पुण्यतिथि पर एकत्रित होकर कार्यक्रम आयोजित करने का मामला दर्ज किया गया था.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, न्यायाधीश ने चेतावनी दी कि उनके ख़िलाफ़ दर्ज मामला उनके भविष्य के रोज़गार की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है. इसके साथ ही न्यायाधीश ने नौ छात्रों को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की.

इस मामले में सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनोज बी. ओझा ने कहा, ‘अब आपका आपराधिक रिकॉर्ड पुलिस के पास है, सिर्फ यहीं नहीं बल्कि पूरे देश में. आप जानते हैं कि आपने अपने करिअर की शुरुआत से पहले ही एक बड़ी गलती कर दी है. आपका करिअर बर्बाद हो गया है.’

मालूम हो कि ट्रॉम्बे पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में नौ छात्रों के नाम शामिल हैं और उनकी अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई सत्र न्यायालय में लंबित है.

कोर्ट ने सोमवार (19 जनवरी) को इन छात्रों को फटकार लगाते हुए पूछा, ‘आप में से कितने महाराष्ट्र से बाहर के हैं? आप सब महाराष्ट्र में पढ़ने आए हैं. आपके पिता को इस मामले के बारे में पता है. अब इसकी वजह से आपको सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी.

अदालत ने आगे कहा कि अगर वे निजी क्षेत्र में भी नौकरी करते हैं, तो भी उन्हें इस लंबित आपराधिक मामले का खुलासा करना होगा.

इसके बाद जज ने छात्रों के वकील से उनके द्वारा किए जा रहे कोर्स के बारे में पूछा. इस पर जब उन्हें बताया गया कि छात्र सोशल वर्क में पोस्ट ग्रेजुएट के लिए नामांकित हैं, तो न्यायाधीश ने कहा कि उनकी डिग्रियां उन्हें रोज़गार दिलाने में मदद नहीं करेंगी.

उन्होंने टिप्पणी की, ‘आप खुद को वैज्ञानिक या इंजीनियर समझते हैं, इंजीनियरों को भी नौकरियां नहीं मिलतीं.’

उल्लेखनीय है कि 23 दिसंबर को पिछली सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक ने बताया था कि छात्र अदालत में उपस्थित नहीं थे. उनके वकील ने तब अदालत को आश्वासन दिया था कि वे सोमवार को उपस्थित रहेंगे.

छात्रों को संबोधित करने के बाद न्यायाधीश ने उनकी अग्रिम जमानत याचिकाओं पर बहस के लिए सुनवाई को इस महीने के अंत तक के लिए स्थगित कर दिया. साथ ही पहले दी गई अंतरिम सुरक्षा को भी बढ़ा दिया.

मालूम हो कि अग्रिम जमानत याचिकाएं अक्टूबर 2025 में दायर की गई थीं, जब संस्थान के एक एसोसिएट डीन की शिकायत पर ट्रॉम्बे पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी.

इस मामले में जांच के तहत छात्रों के मोबाइल फोन और लैपटॉप सहित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए थे. एफआईआर 12 अक्टूबर, 2025 को देवनार स्थित टिस परिसर में साईबाबा की पहली पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम से संबंधित है.

गौरतलब है कि 57 वर्षीय साईबाबा को बॉम्बे हाईकोर्ट ने 5 मार्च, 2024 को बरी कर दिया था, जिसमें यह माना गया था कि गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत उन पर मुकदमा चलाने की मंजूरी अमान्य थी.

हाईकोर्ट ने 2017 के सत्र न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के सक्रिय सदस्य होने के आरोप में साईबाबा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी.