मणिपुर: उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने दिल्ली से ऑनलाइन शपथ ली, पद लेने से नाराज़ कुकी-ज़ो समुदाय

बुधवार को मणिपुर के लोक भवन में युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री और नगा पीपुल्स फ्रंट के विधायक लोसी दीखो ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. वहीं, दिल्ली के मणिपुर भवन में कुकी समुदाय की नेमचा किपगेन ने ऑनलाइन उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. इसके बाद क़रीब 50 कुकी-ज़ो नागरिकों ने मणिपुर भवन के बाहर एकत्रहोकर प्रदर्शन करते हुए किपगेन के तत्काल इस्तीफ़े की मांग की.

नेमचा किपगेन के विरोध में एक पोस्टर. (फोटो: याकूत अली)

नई दिल्ली: ‘तुम्हारे हाथों पर खून है, गद्दार नेमचा किपगेन.’ यह नारा बुधवार (4 फरवरी) को दिल्ली में मणिपुर की उपमुख्यमंत्री के रूप में किपगेन की नियुक्ति के कुछ ही घंटों के भीतर कुकी-ज़ो समुदाय के सदस्यों के बीच गूंजने लगा.

यह उनके अपने ही समुदाय के कुछ वर्गों में फैले गहरे गुस्से और विश्वासघात की भावना को दिखाता है.

मणिपुर, जो लंबे समय से चल रही जातीय हिंसा के बीच लगभग एक साल से राष्ट्रपति शासन के अधीन था, आखिरकार राज्य की राजधानी इंफाल में नए मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में एक चुनी हुई सरकार की वापसी हुई, लेकिन यह बिना विवाद के नहीं हुआ.

समावेशिता का संदेश देने की कोशिश में भाजपा ने कुकी-ज़ो समुदाय के कुछ विधायकों को नई सरकार में शामिल किया. हालांकि, कई कुकी-ज़ो लोगों के लिए इस कदम ने घावों को भरने के बजाय उन्हें और गहरा कर दिया है.

दिल्ली में करीब 50 कुकी-ज़ो लोग मणिपुर भवन के बाहर इकट्ठा हुए और किपगेन के तत्काल इस्तीफे की मांग की. उनका आरोप था कि किपगेन ऐसी सरकार को वैधता दे रही हैं, जिसने उनके लोगों को निराश किया है.

बुधवार को मणिपुर के लोक भवन में खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री और नगा पीपुल्स फ्रंट के विधायक लोसी दीखो ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. लेकिन किपगेन ने उपमुख्यमंत्री के रूप में दिल्ली के मणिपुर भवन से ऑनलाइन शपथ ली, न कि मेईतेई बहुल इंफाल घाटी में, जहां उनकी कुकी-ज़ो समुदाय के सदस्य मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद से अब भी नहीं जा पा रहे हैं.

इसके साथ ही कोंथौजम गोविंदास सिंह और खुरैजम लोकेन सिंह ने भी नई सरकार में मंत्री के रूप में शपथ ली. शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री ने इंफाल में अपने बंगले में कैबिनेट बैठक की.

इससे कुछ घंटे पहले ही राष्ट्रपति ने मणिपुर में केंद्र सरकार का शासन (राष्ट्रपति शासन) हटा लिया था और सिंगजामेई सीट से विधायक, मेईतेई नेता खेमचंद सिंह ने राज्यपाल अजय भल्ला से मिलकर नई सरकार बनाने का दावा पेश किया था.

बुधवार शाम मणिपुर भवन के बाहर खड़े प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि किपगेन ने ‘अपने समुदाय के बजाय उपमुख्यमंत्री का पद चुन लिया है.’

प्रदर्शनकारियों में शामिल होइनु ने कहा, ‘हमारे लोगों ने अपनी जानें गंवाई हैं, उनकी हत्या की गई, हमारे घर जला दिए गए. पूरी की पूरी पीढ़ियां तबाह हो गई हैं. वह हमारे साथ ऐसा विश्वासघात कैसे कर सकती हैं? वह कुकी समुदाय की नेता हैं, वह अकेले ऐसा फैसला नहीं ले सकती थीं. उन्हें मणिपुर के लोगों से बात करनी चाहिए थी, क्योंकि हम मेईतेई लोगों के साथ नहीं रह सकते. हमारे लिए साथ रहने का मतलब मौत है.’

होइनु कभी इंफाल में रहा करती थीं, लेकिन मई 2023 के बाद से उन्होंने अपना घर नहीं देखा है. जब जातीय हिंसा शुरू हुई थी, तब उनका परिवार शहर छोड़कर चला गया था. 33 महीने बाद भी मेईतेई और कुकी-ज़ो लोग लगभग पूरी तरह अलग-थलग हैं, जिन्हें इंफाल घाटी और आसपास की पहाड़ियों को अलग करने वाले सुरक्षा बलों द्वारा बनाए गए बफर ज़ोन ने बांट रखा है.

द वायर से बात करते हुए कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन-एनसीआर के अध्यक्ष टिंगबेम ने कहा, ‘जब हमारे लोगों को निर्वस्त्र करके घुमाया गया, काट डाला गया या मार दिया गया, तब उन्होंने (किपगेन) कभी आवाज़ नहीं उठाई. अब वह हमारी नेता बनने आगे आ रही हैं? नहीं. उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वह हमारी प्रतिनिधि नहीं हैं.’

मंगलवार को नई सरकार के गठन को अंतिम रूप देने के लिए मणिपुर के सभी भाजपा विधायक और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेता दिल्ली बुलाए गए थे. केंद्र सरकार ने कुकी-ज़ो विधायकों के साथ अलग-अलग बैठकें भी कीं.

60 सदस्यीय विधानसभा में कुकी-ज़ो समुदाय के 10 विधायक हैं, जिनमें से पांच ने मंगलवार की बैठक में हिस्सा लिया. फिलहाल मणिपुर में भाजपा के सात कुकी-ज़ो विधायक हैं, जिनमें नेमचा के अलावा एलएम खाउते और न्गुरसांगलुर सनाते भी नई सरकार के गठन का समर्थन कर रहे हैं.

एक प्रदर्शनकारी नेमचा किपगेन के खिलाफ पोस्टर पकड़े हुए है. (फोटो: याकूत अली)

बुधवार के शपथ ग्रहण से पहले कई कुकी-ज़ो नेताओं ने ‘गुवाहाटी घोषणा’ का हवाला दिया, जिसे नागरिक संगठनों, सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस समझौते के तहत आने वाले उग्रवादी समूहों और समुदाय के विधायकों ने अपनाया था. इसमें यह तय किया गया था कि जब तक केंद्र सरकार पहाड़ी इलाकों के लिए विधायिका के साथ एक अलग प्रशासन – यानी एक केंद्र शासित प्रदेश – को मंजूरी नहीं देती, तब तक किसी लोकप्रिय सरकार में भाग नहीं लिया जाएगा.

कुकी-ज़ो काउंसिल के नेता गिन्ज़ा वुअलज़ोंग ने कहा था कि इस रुख से कोई भी बदलाव व्यक्तिगत फैसला होगा. उन्होंने कहा, ‘अगर नेमचा किपगेन गुवाहाटी प्रस्ताव को नजरअंदाज करती हैं, तो वह अपने दम पर आगे बढ़ रही हैं और अपने जोखिम पर ऐसा कर रही हैं.’

ज्ञात हो कि लगातार जारी जातीय हिंसा को देखते हुए 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था. इस संघर्ष में अब तक 270 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं.

बुधवार को मणिपुर भवन के बाहर जुटे लोग बार-बार मांग कर रहे थे कि किपगेन बाहर आएं और उनके सवालों का जवाब दें. हालांकि, मौके पर मौजूद अधिकारियों ने किसी भी तरह की बातचीत की अनुमति नहीं दी और प्रदर्शनकारियों से वहां से हटने को कहा गया.

द वायर ने नेमचा किपगेन से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन रिपोर्ट के प्रकाशन के समय तक कोई जवाब नहीं मिला.

जैसे-जैसे प्रदर्शन जारी रहा, प्रदर्शनकारियों ने उपमुख्यमंत्री की तस्वीर वाले पोस्टरों को आग के हवाले कर दिया. इसके तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने हस्तक्षेप किया और प्रदर्शनकारियों से परिसर छोड़ने को कहा, जिसके बाद यह प्रदर्शन समाप्त हो गया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)