विश्वविद्यालय संगठन ने देशभर के शिक्षण संस्थानों को लिखा- छात्रों को प्रदर्शनों से दूर रहने की सलाह दें

शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े समेत अन्य मांगों के साथ 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च को दिल्ली पुलिस द्वारा बलपूर्वक रोक दिए जाने के एक दिन बाद विश्वविद्यालय संगठन ने देश के उच्च शिक्षण संस्थानों से छात्रों को आंदोलन से दूर रहने और अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करने को कहा है.

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करते कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: देशभर में शिक्षा सुधार की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के तेज होने के बीच एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज़ (एआईयू) ने देश के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और उच्च शिक्षण संस्थानों के निदेशकों से छात्रों को आंदोलन से दूर रहने और अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करने को कहा है.

‘परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने की जारी प्रक्रिया पर भरोसा रखें और छात्रों को अपनी पढ़ाई पर केंद्रित रहने के लिए प्रोत्साहित करें’ शीर्षक वाली एडवाइजरी में एआईयू के अध्यक्ष प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने लिखा, ‘छात्र मार्गदर्शन के हकदार हैं, अनिश्चितता के नहीं. मैं सभी सदस्य विश्वविद्यालयों से आग्रह करता हूं कि वे छात्रों के साथ संवेदनशीलता से पेश आएं और उन्हें उनकी शैक्षणिक यात्रा पर केंद्रित रहने में सहयोग दें.’

यह सलाह 21 जुलाई को जारी की गई, यानी केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर से संसद तक प्रस्तावित मार्च को बलपूर्वक रोक दिए जाने के एक दिन बाद. प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत कई मांगें उठा रहे हैं.

‘छात्रों की चिंताएं हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं’

पाठक ने लिखा, ‘हमारे छात्रों की चिंताएं हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और उनकी बात सहानुभूति तथा सम्मान के साथ सुनी जानी चाहिए. लेकिन लंबे समय तक चलने वाले आंदोलनों की सबसे बड़ी कीमत छात्रों को ही चुकानी पड़ती है. इससे उनकी पढ़ाई का समय नष्ट होता है, परीक्षा की तैयारी प्रभावित होती है और अनावश्यक मानसिक तनाव बढ़ता है.’

गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने अब तक जंतर-मंतर पर करीब एक महीने से चल रहे प्रदर्शन का सार्वजनिक रूप से उल्लेख नहीं किया है.

पाठक ने यह भी कहा कि सरकार इस मुद्दे के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और हाल में आयोजित नीट परीक्षा को ‘पारदर्शी और त्रुटिरहित’ तरीके से संपन्न कराया गया है.

उन्होंने कहा, ‘जब सरकार इस मुद्दे के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और हालिया नीट परीक्षा पारदर्शी एवं त्रुटिरहित तरीके से आयोजित की जा चुकी है, तब इस तरह की कीमत चुकाना और भी अधिक अनावश्यक है.’

गौरतलब है कि इसी वर्ष मई में राष्ट्रीय स्तर पर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए होने वाली नीट परीक्षा कथित प्रश्नपत्र लीक के कारण परीक्षा आयोजित होने के दस दिन से भी कम समय बाद रद्द कर दी गई थी. इसके बाद करीब 20 छात्रों की आत्महत्या की खबरें सामने आईं, जिससे मामले में सरकार की निष्क्रियता को लेकर व्यापक आलोचना हुई.

आईआईटी मद्रास ने छात्र संगठन से प्रदर्शन के समर्थन वाला इंस्टाग्राम वीडियो हटाने को कहा

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के एक छात्र संगठन ने आरोप लगाया है कि संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों ने उससे परीक्षा में अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में पोस्ट किया गया इंस्टाग्राम वीडियो हटाने को कहा. साथ ही कैंपस में शांतिपूर्ण सभा आयोजित करने की अनुमति देने से भी इनकार कर दिया.

अधिकारियों ने कथित तौर पर कहा कि इससे केंद्र सरकार के साथ संस्थान के संबंध प्रभावित हो सकते हैं और आईआईटी मद्रास की छवि खराब होगी.

छात्र संगठन चिंताबार के अनुसार उसने 20 जुलाई को नीट-यूजी, यूजीसी-नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक और अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों तथा दिल्ली और अन्य जगहों पर चल रहे प्रदर्शनों के समर्थन में एक शांतिपूर्ण सभा आयोजित करने की अनुमति मांगी थी.

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, प्रशासन को भेजे गए ईमेल में चिंताबार ने कहा कि बार-बार परीक्षा में अनियमितताएं, परीक्षाओं का रद्द होना और दोबारा आयोजित किया जाना छात्रों पर ‘गंभीर शैक्षणिक, मानसिक और आर्थिक दबाव’ डाल रहा है. संगठन ने कहा कि प्रस्तावित सभा पूरी तरह शांतिपूर्ण होगी, शैक्षणिक गतिविधियों में कोई बाधा नहीं डालेगी और संस्थान के सभी नियमों का पालन करेगी.

चिंताबार से जुड़े एक छात्र ने आरोप लगाया कि आवेदन देने के बाद संगठन के प्रतिनिधियों को 20 जुलाई को छात्र मामलों के डीन प्रोफेसर सत्यनारायण एन. गुम्मडी से मिलने के लिए बुलाया गया. इस बैठक में निर्वाचित छात्र महासचिव अन्नापुरेड्डी सुरेश भी मौजूद थे.

छात्र ने आरोप लगाया, ‘डीन ने हमसे 17 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में पोस्ट किया गया इंस्टाग्राम वीडियो हटाने को कहा और सभा की अनुमति देने से इनकार कर दिया. उनका कहना था कि आईआईटी मद्रास चल रहे छात्र आंदोलनों को लेकर केंद्र सरकार के साथ अपने संबंधों को प्रभावित नहीं करना चाहता.’

एक अन्य छात्र ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उनसे कहा कि उन्हें ‘प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि इससे आईआईटी मद्रास की छवि खराब होगी.’

अख़बार के अनुसार, छात्रों का यह भी आरोप है कि बीटेक और एमटेक के छात्रों के एक अन्य समूह द्वारा 20 जुलाई को परिसर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित करने का अनुरोध भी खारिज कर दिया गया था.

‘राजनीतिक चर्चाओं में शामिल न हों’ संबंधी एडवाइजरी जारी करने के बाद आईआईटी रुड़की ने दी सफाई

आईआईटी रुड़की की ओर से छात्रों के बीच प्रसारित एक आंतरिक सलाह (एडवाइजरी) सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसके लोगों ने इस पर नाराजगी जताई. इस सलाह में छात्रों और कर्मचारियों को संस्थान के राजनीतिक गतिविधियों और सार्वजनिक बयान से जुड़े आचरण नियमों की याद दिलाई गई थी. इसे छात्रों की राजनीतिक अभिव्यक्ति पर नई पाबंदी लगाने के निर्देश के रूप में देखा गया.

मिंट के मुताबिक, यह एडवाइजरी 20 जुलाई को रजिस्ट्रार की ओर से जारी की गई थी. इसमें छात्रों, कर्मचारियों और अन्य हितधारकों से संस्थान के अधिसूचित आचरण नियमों का पालन करने की अपील की गई.

एडवाइजरी में कहा गया, ‘यह देखा गया है कि इंस्टाग्राम, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया मंचों पर कैंपस के कुछ सदस्य एक चल रहे जन आंदोलन को अपनी निष्ठा/समर्थन व्यक्त करते हुए दिखाई दिए हैं.’

इसके बाद सलाह में छात्रों और कर्मचारियों को संस्थान के उद्देश्यों और आचरण नियमों की याद दिलाई गई. इसमें कहा गया, ‘सभी छात्रों, कर्मचारियों और हितधारकों को विनम्रतापूर्वक याद दिलाया जाता है कि आईआईटी में छात्रों का प्रवेश और कर्मचारियों की नियुक्ति शिक्षा, अनुसंधान, ज्ञान के विकास तथा इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, विज्ञान और कला के क्षेत्र में ज्ञान के प्रसार के उद्देश्य से की जाती है.’

सलाह में आगे कहा गया, ‘अधिसूचित आचरण नियमों में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि कोई भी छात्र या कर्मचारी संस्थान की पूर्व अनुमति के बिना किसी राजनीतिक चर्चा में शामिल नहीं होगा, किसी राजनीतिक गतिविधि में भाग नहीं लेगा और न ही प्रसारण, टेलीकास्ट, प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अथवा किसी सार्वजनिक मंच पर ऐसा कोई बयान या राय व्यक्त करेगा, जिससे संस्थान और केंद्र सरकार, किसी अन्य संगठन या आम जनता के साथ संस्थान के संबंध प्रभावित या असहज हो सकते हों.’

यह सलाह एक्स पर वायरल होने के बाद आईआईटी रुड़की ने उसी मंच पर स्पष्टीकरण जारी किया.

संस्थान ने लिखा, ‘आईआईटी रुड़की व्यक्तिगत अभिव्यक्ति और संस्थान की आधिकारिक अभिव्यक्ति के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है.’

आगे कहा गया, ‘व्यक्तियों द्वारा अपनी निजी क्षमता में साझा किए गए विचार या सामग्री उनके अपने हैं. उन्हें संस्थान की आधिकारिक राय या समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. आईआईटी रुड़की की आधिकारिक सूचनाएं केवल उसके अधिकृत और निर्धारित माध्यमों से ही जारी की जाती हैं.’