नई दिल्ली: मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में नवगठित मणिपुर सरकार ने गुरुवार (6 फरवरी) शाम इंफाल में मणिपुर विधानसभा में हुए फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित कर दिया.
उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन सहित तीन कुकी-ज़ो विधायकों की सरकार गठन में भागीदारी को लेकर कुकी-ज़ो बहुल चूड़ाचांदपुर जिले में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए.
मणिपुर विधानसभा गुरुवार को शाम 4 बजे करीब डेढ़ साल से अधिक समय बाद पहली बार बुलाई गई.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कुकी-ज़ो समुदाय के 10 विधायकों में से (जिनमें सात भाजपा से हैं) कोई भी इंफाल में विधानसभा कक्ष में मौजूद नहीं था. हालांकि, सरकार का समर्थन करने वाले तीन विधायकों ने कार्यवाही में कुछ देर के लिए वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लिया.
मई 2023 में मणिपुर में संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक कोई भी कुकी-ज़ो विधायक सरकारी प्रक्रियाओं में भाग लेने के लिए इंफाल नहीं आया था. हाल ही में दो विधायक – एलएम खौते और न्गुरसांगलूर सनाते – खेमचंद के साथ लोक भवन जाकर सरकार बनाने का दावा पेश करने पहुंचे थे और बुधवार को मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल हुए थे.
खेमचंद और उनके दो उपमुख्यमंत्री – नेमचा किपगेन तथा नगा पीपुल्स फ्रंट के विधायक लोसी दीखो – ने बुधवार को दो अन्य मंत्रियों के साथ शपथ ली. किपगेन ने नई दिल्ली से वीडियो लिंक के जरिए वर्चुअल रूप से शपथ ग्रहण किया.
गुरुवार को हुई एक दिवसीय बैठक में कार्यसूची का मुख्य विषय मुख्यमंत्री द्वारा पेश किया जाने वाला विश्वास प्रस्ताव था. राज्यपाल के अभिभाषण और एक विराम के बाद खेमचंद ने यह प्रस्ताव पेश किया. इस दौरान उन्होंने अध्यक्ष थोकचोम सत्यव्रत सिंह से किपगेन, खौते और सनाते को मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए वर्चुअल रूप से भाग लेने की अनुमति देने का अनुरोध किया. अनुमति मिलते ही वे थोड़ी देर के लिए कार्यवाही में शामिल हुए.
विश्वास प्रस्ताव चर्चा के बाद बिना किसी आपत्ति के ध्वनिमत से पारित हो गया. चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह ने सरकार से संघर्ष का समाधान निकालने और ‘स्थायी शांति’ की दिशा में काम करने की अपील की और कहा कि ऐसे प्रयासों में विपक्ष सरकार का समर्थन करेगा.
चूड़ाचांदपुर में विरोध प्रदर्शन
इधर, चूड़ाचांदपुर जिले में नए सरकार गठन में कुकी-ज़ो विधायकों की भागीदारी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी.
इससे पहले चूड़ाचांदपुर स्थित प्रभावशाली नागरिक संगठन कुकी-ज़ो काउंसिल (केजेडसी) ने इन विधायकों के ‘सामाजिक बहिष्कार’ की घोषणा की थी.
संगठन ने पिछले महीने हुई एक बैठक का हवाला दिया, जिसमें कुकी-ज़ो उग्रवादी समूहों और समुदाय के विधायकों ने राज्य में नई लोकप्रिय सरकार में भागीदारी के लिए कुछ ‘पूर्व-शर्तें’ तय की थीं. इनमें राज्य और केंद्र सरकार की ओर से कुकी-ज़ो बहुल क्षेत्रों के लिए अलग केंद्र शासित प्रदेश को लेकर लिखित ‘राजनीतिक प्रतिबद्धता’ शामिल थी.
गुरुवार को केजेडसी ने ‘मेइतेई-बहुल सरकार’ के गठन में उनकी भागीदारी की निंदा करते हुए कहा कि ‘इन विधायकों ने वस्तुतः अपने शत्रु के साथ खुद को जोड़ लिया है, जिससे उन्होंने अपने ही लोगों के साथ विश्वासघात किया है और कुकी-ज़ो समुदाय द्वारा झेले गए अपार दर्द और बलिदान की अनदेखी की है.’
संगठन ने कुकी-ज़ो लोगों से अपील की कि वे तब तक इन विधायकों से कोई सहयोग या संबंध न रखें, जब तक वे मणिपुर सरकार में भागीदारी से पीछे नहीं हटते और खुद को कुकी-ज़ो लोगों की सामूहिक स्थिति के साथ फिर से नहीं जोड़ लेते.
अन्य संगठनों, जैसे कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन और कुकी वीमेन ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ने चूड़ाचांदपुर जिले में 24 घंटे के बंद और शुक्रवार को एक बड़े विरोध मार्च का आह्वान किया.
अखबार के अनुसार, गुरुवार शाम चूड़ाचांदपुर कस्बे में स्थिति और बिगड़ गई, जब प्रदर्शनकारियों ने हिंसा का रास्ता अपना लिया.
एक अधिकारी ने कहा, ‘शुरुआत में समूह टायर जला रहे थे. बाद में यह पुलिस और वहां मौजूद सुरक्षा बलों के साथ झड़प में बदल गया, जिसमें उन पर पथराव भी किया गया.’
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि गुरुवार रात 8:30 बजे तक स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई थी.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चूड़ाचांदपुर जिले में 24 घंटे के बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक प्रमुख राजमार्ग को जाम कर दिया और एक वाहन को नुकसान पहुंचाया.
प्रदर्शनकारियों ने चूड़ाचांदपुर के रास्ते इंफाल को मिजोरम की राजधानी आइजोल से जोड़ने वाले राजमार्ग को जाम कर दिया. व्यापारिक प्रतिष्ठान और शैक्षणिक संस्थान बंद रहे, जबकि वाहनों की आवाजाही केवल आपात और आवश्यक सेवाओं तक सीमित रही.
सरकार का समर्थन करने वाले किपगेन और दो अन्य विधायकों – लल्लियांग मंग खौते और न्गुरसांगलूर सनाते- के आवासों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई.
कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ने इन तीनों विधायकों पर कुकी-ज़ो समुदाय के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया. संगठन ने समुदाय के बाकी सात विधायकों की सराहना की, जिन्होंने नई सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया.
ज्ञात हो कि लगातार जारी जातीय हिंसा को देखते हुए 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था. इस संघर्ष में अब तक 270 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं.
कुकी-जो नागरिक समाज संगठन और सरकार के साथ ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस’ (एसओओ) समझौते में शामिल विद्रोही समूह कुकी-जो क्षेत्रों के लिए विधानसभा सहित एक केंद्र शासित प्रदेश की मांग कर रहे हैं. अलग प्रशासन की मांग सबसे पहले 2023 में कुकी-जो विधायकों ने उठाई थी.
