नई दिल्ली: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा बीते कुछ समय से मुसलमानों के ख़िलाफ़ लगातार नफरती बयान देते नज़र आ रहे हैं. शनिवार को असम की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इकाई के आधिकारिक एक्स हैंडल पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा का एक भड़काऊ वीडियो साझा किया गया है, जिसमें उन्हें प्रतीकात्मक रूप से मुस्लिमों पर गोली चलाते हुए दिखाया गया है.
एआई की मदद से बनाए गए इस वीडियो के साथ इसमें ‘पॉइंट ब्लैंक शूट’, ‘नो मर्सी’ जैसे भड़काऊ कैप्शन भी लगे हैं. हालांकि, बढ़ते विरोध के बाद शनिवार (7 फरवरी) को पोस्ट किए गए इस ट्वीट को भाजपा ने हटा दिया है.
इस नफरती वीडियो की व्यापक निंदा हो रही है और इसे मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने वाला बताया जा रहा है.

तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने इसे शर्मनाक बताया और इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों को तुरंत गिरफ़्तार करने की मांग की है.
Shameful. Whoever has made this ad 👇🏽 needs to be IMMEDIATELY arrested . You need to act @narendramodi @AmitShah @AshwiniVaishnaw https://t.co/VX5Axd1wKe
— Sagarika Ghose (@sagarikaghose) February 7, 2026
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी इस वीडियो की आलोचना करते हुए सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘भाजपा के एक आधिकारिक हैंडल ने एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें अल्पसंख्यकों की लक्षित, प्रत्यक्ष हत्या को दर्शाया गया है. यह नरसंहार का आह्वान मात्र है – एक ऐसा सपना जिसे यह फासीवादी शासन दशकों से संजोए हुए है.
उन्होंने आगे लिखा कि यह कोई साधारण वीडियो नहीं है जिसे ट्रोल सामग्री समझकर अनदेखा किया जा सके. यह शीर्ष स्तर से फैलाया गया जहर है, और इसके परिणाम अवश्य भुगतने होंगे.
उन्होंने कहा, ‘इस बात की कोई उम्मीद नहीं है कि नरेंद्र मोदी इसकी निंदा करेंगे या इसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे, लेकिन न्यायपालिका को कार्रवाई करनी चाहिए और इस मामले में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए.’
An official BJP handle posted a video showing the targeted, ‘point-blank’ murder of minorities. This is nothing but a call to genocide – a dream this fascist regime has harboured since decades.
This is not an innocuous video to be ignored as troll content. It is poison spread… pic.twitter.com/8mHxo4UjZV
— K C Venugopal (@kcvenugopalmp) February 8, 2026
वहीं, पत्रकार राना अय्यूब ने कहा कि भाजपा के ट्विटर हैंडल ने हिमंता बिस्वा द्वारा मुसलमानों पर गोली चलाने का एक मीम साझा किया है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी मुस्लिम बहुल मलेशिया में एक भव्य स्वागत समारोह की बात कर रहे हैं. ये शीर्ष स्तर से ही अनैतिकता दिखाता है.
Hate to amplify this but just exposes the depravity from the top. BJP twitter handle shares a meme of Himanta Biswa firing a bullet at Muslims while Prime Minister Modi talks about a grand reception in muslim majority, Malaysia https://t.co/DIRvx7l1Py
— Rana Ayyub (@RanaAyyub) February 7, 2026
सोशल मीडिया पर कई अन्य लोगों ने भी इस वीडियो को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है. साथ ही इसके लिए भाजपा और हिमंता बिस्वा शर्मा की कड़ी आलोचना भी की है.
मालूम हो कि भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली हिमंता बिस्वा शर्मा सरकार लगातार मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफरती बयानों के जरिए बहुसंख्यक समुदाय को उकसाती हुई नज़र आ रही है. हाल ही में उन्होंने ‘मिया’ लोगों को परेशान करने और रिक्शे वालों को कम किराया देने वाला विवादित बयान दिया था.
मिज़ोरम सांसद बोले- राज्यसभा में कथित रक्षा भूमि घोटाले को उठाने नहीं दिया गया

मिज़ो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के एक राज्यसभा सदस्य ने शुक्रवार (6 फरवरी) को कहा कि पिछले एक सप्ताह से उन्हें मिज़ोरम के एकमात्र लेंगपुई हवाई अड्डे के पास रक्षा उद्देश्यों के लिए निजी भूमि की खरीद में कथित 187.90 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाने की अनुमति नहीं दी जा रही है.
उच्च सदन में मिज़ोरम के एकमात्र प्रतिनिधि के. वनलालवेना ने द हिंदू से कहा कि बजट सत्र की शुरुआत से ही वे इस मुद्दे को उठाने के लिए राज्यसभा के सभापति को शून्यकाल (ज़ीरो आवर) के नोटिस दे रहे हैं, लेकिन उन्हें स्वीकार नहीं किया गया है.
उन्होंने बताया कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है और उनकी पार्टी ने मिज़ोरम सरकार के मुख्य सतर्कता अधिकारी (चीफ विजिलेंस ऑफिसर) के पास आपराधिक शिकायत भी दर्ज कराई है, जिसमें केंद्रीय जांच एजेंसियों से जांच कराने की मांग की गई है.
एमएनएफ इस समय विपक्ष में है.
आरोपों का विवरण देते हुए सांसद ने कहा कि लेंगपुई हवाई अड्डे और आइज़ोल के पास सिहफिर गांव के निकट स्थित निजी भूमि को भारतीय वायु सेना (आईएएफ) द्वारा वायु रक्षा प्रणालियां स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने ‘बेहद ऊंची दरों’ पर अधिग्रहित किया, जो भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवज़ा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के प्रावधानों का उल्लंघन है.
शाह को लिखे अपने पत्र में सांसद ने आरोप लगाया कि इस अधिनियम के तहत मौजूद प्रमुख सुरक्षा प्रावधान – जैसे स्थानीय अख़बारों में अधिग्रहण की अधिसूचना प्रकाशित करना, ग्राम परिषदों से परामर्श करना और सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन कराना – दरकिनार कर दिए गए.
पत्र में कहा गया, ‘इसके परिणामस्वरूप 2187.90 करोड़ रुपये से अधिक की सार्वजनिक धनराशि संदिग्ध बिचौलियों के माध्यम से घुमाई गई प्रतीत होती है, जिससे भ्रष्टाचार और मिलीभगत की गंभीर आशंकाएं पैदा होती हैं.’
मामले की गंभीरता और केंद्रीय धन के कथित दुरुपयोग को देखते हुए वनलालवेना ने केंद्र सरकार से किसी उपयुक्त केंद्रीय जांच एजेंसी को विस्तृत जांच का निर्देश देने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, ‘जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए और कानून व जनविश्वास के इस गंभीर उल्लंघन के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए.’
यह भूमि सौदा अब विपक्षी एमएनएफ और कांग्रेस तथा सत्तारूढ़ ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) के बीच एक बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है, सभी सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं.
एमएनएफ और कांग्रेस ने गुरुवार को राज्य के मुख्य सतर्कता अधिकारी और सीबीआई के पास अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराईं और कथित घोटाले की केंद्रीय जांच की मांग की.
स्थानीय खबरों के अनुसार, यह विवाद उस 187.90 करोड़ रुपये की राशि को लेकर है, जो राज्य सरकार ने भारतीय वायु सेना की वायु रक्षा प्रणाली या लड़ाकू विमान अड्डे के लिए निजी भूमि अधिग्रहित करने में चुकाई थी.
विपक्षी दलों (एमएनएफ और कांग्रेस) ने आरोप लगाया कि दो ऐसे व्यक्तियों को, जो मूल ज़मीन मालिक नहीं थे, मुआवज़े का बड़ा हिस्सा मिला. उनका दावा है कि एक व्यक्ति को 70 करोड़ रुपये और दूसरे को 117.90 करोड़ रुपये से अधिक दिए गए, जबकि मूल ज़मीन मालिकों को कथित तौर पर बहुत कम या कुछ भी नहीं मिला.
विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि जिस प्रक्रिया में कानूनी तौर पर वर्षों लगते हैं, उसे मात्र 70 दिनों में ‘फास्ट-ट्रैक’ कर दिया गया. आरोपों में सामाजिक प्रभाव आकलन (एसआईए) को माफ़ करना और ग्राम परिषदों को सूचना न देना भी शामिल है, जो उनके अनुसार 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत अनिवार्य थे.
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन के एक साल बाद नई सरकार बनी, कुकी-ज़ो समुदायों का अलग प्रशासन की मांग
पिछले तीन साल से जातीय हिंसाग्रस्त मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के एक साल बाद राज्य में नई सरकार बनी. भाजपा नेता युमनाम खेमचंद नए मुख्यमंत्री बने.
कांगपोकपी से कुकी-ज़ो विधायक नेमचा किपगेन और नगा पीपुल्स फ्रंट के विधायक लोसी दीखो ने उपमुख्यमंत्री को उपमुख्यमंत्री बनाया गया.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता युमनाम खेमचंद, जिन्हें 3 फरवरी को विधायक दल का नेता चुना गया था. 4 फरवरी को मणिपुर के लोक भवन में खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री और नगा पीपुल्स फ्रंट के विधायक लोसी दीखो ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. लेकिन किपगेन ने उपमुख्यमंत्री के रूप में दिल्ली के मणिपुर भवन से ऑनलाइन शपथ ली. क्योंकि राज्य में जातीय हिंसा के बाद मे
मालूम हो कि मई 2023 से अब तक राज्य में चल रहे जातीय हिंसा में 260 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं और हज़ारों लोग बेघर हो गए हैं. मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद फरवरी 2025 से मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू था. राज्य विधानसभा को स्थगित अवस्था (सस्पेंडेड एनीमेशन) में रखा गया था. राज्य विधानसभा का कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होगा.
60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में फिलहाल भाजपा के 37 विधायक हैं. पार्टी को अपने सहयोगियों – नगा पीपुल्स फ्रंट के 5 विधायक और जनता दल (यूनाइटेड) के 1 विधायक – का समर्थन प्राप्त है. विपक्ष के पास कुल 16 सीटें हैं, जिनमें नेशनल पीपुल्स पार्टी (6), कांग्रेस (5), तीन निर्दलीय और कुकी पीपुल्स एलायंस के दो विधायक शामिल हैं, जिसने अगस्त 2023 में बीरेन सरकार से समर्थन वापस ले लिया था.
ज्ञात हो कि कुकी-जो नागरिक समाज संगठन और सरकार के साथ ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस’ (एसओओ) समझौते में शामिल विद्रोही समूह कुकी-जो क्षेत्रों के लिए विधानसभा सहित एक केंद्र शासित प्रदेश की मांग कर रहे हैं. अलग प्रशासन की मांग सबसे पहले 2023 में कुकी-जो विधायकों ने उठाई थी.
अब नेमचा किपगेन के उपमुख्यमंत्री बनने पर कुकी-ज़ो समुदाय के लोगों ने नाराजगी जताई है. विधायकों की भागीदारी को लेकर कुकी-बहुल जिलों में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. उनका आरोप हैं कि किपगेन और अन्य कुकी-ज़ो समुदाय के विधायक ऐसी सरकार को वैधता दे रहे हैं, जिसने उनके लोगों को निराश किया है.
6 फरवरी को चूड़ाचांदपुर ज़िले में किपगेन और दो अन्य विधायकों – एलएम खौते और न्गुरसांगलूर सनाते – के पुतले भी जलाए गए. ये तीनों कुकी-ज़ो और हमार समुदाय से हैं और सत्तारूढ़ भाजपा के विधायक हैं. कांगपोकपी और तेंगनौपाल ज़िलों में भी विरोध रैलियां निकाली गईं.
कुकी जो काउंसिल (केजेडसी) ने गुरुवार (5 फरवरी) को कहा था कि इन विधायकों ने 13 जनवरी के लुंगथू प्रस्ताव का उल्लंघन किया है, जिसमें यह तय किया गया था कि समुदाय के सदस्य तभी सरकार गठन में भाग लेंगे, जब केंद्र और राज्य प्राधिकरणों की ओर से लिखित आश्वासन होगा कि विधायिका सहित केंद्र शासित प्रदेश के रूप में एक अलग प्रशासन बनाया जाएगा.
पूर्वोत्तर भारत में बड़े पैमाने की ऊर्जा परियोजनाओं के ख़िलाफ़ आदिवासी समूहों ने गुवाहाटी घोषणा पर हस्ताक्षर किए
लोगों और उनके संसाधनों के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न राज्यों के 15 से अधिक जन-संगठनों ने गुवाहाटी में आयोजित ‘पूर्वोत्तर भारत में ऊर्जा नीति’ पर जन सम्मेलन में एकजुट होकर गुवाहाटी घोषणा पर हस्ताक्षर किए.
नॉर्थईस्ट नाउ के मुताबिक, असम के विभिन्न जमीनी आंदोलनों का प्रतिनिधित्व करने वाले छत्र संगठन जॉइंट स्ट्रगल कमेटी फॉर प्रोटेक्शन ऑफ लैंड राइट्स द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में पारित घोषणा का उद्देश्य मानवाधिकारों, जमीन, पानी, जंगलों और आदिवासी जीवन की रक्षा करना है, जिन पर लोगों की सहमति और भागीदारी के बिना कब्जा किया जा रहा है.
यह घोषणा प्रस्तावित और मौजूदा जलविद्युत, खनन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के प्रभावों पर केंद्रित है, जिनके बारे में प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि इससे हाल के समय में आदिवासी समुदायों का सबसे बड़ा विस्थापन हो सकता है.
असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और सिक्किम से आए प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में भाग लिया और प्रस्तावित व मौजूदा जलविद्युत, खनन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लेकर चिंता जताई. उनका कहना था कि ये परियोजनाएं आदिवासी समुदायों के बड़े पैमाने पर विस्थापन का कारण बन सकती हैं.
असम की इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी पॉलिसी (2025–2030) का लक्ष्य 11,700 मेगावाट उत्पादन का है, जिसमें 3,500 मेगावाट सौर ऊर्जा, 2,000 मेगावाट से अधिक पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रो और 3,000–5,000 मेगावाट तापीय ऊर्जा शामिल है – यानी 2030 तक कुल मिलाकर लगभग 17,000 मेगावाट.
वहीं, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम क्रमशः 58,000 मेगावाट और 8,000 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य रख रहे हैं, और कई परियोजनाएं पहले से निर्माणाधीन हैं. मणिपुर, त्रिपुरा, नगालैंड, मिजोरम और मेघालय सहित अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भी इसी तरह की ऊर्जा नीतियां लागू हैं.
आलोचकों का सवाल है कि इतने बड़े पैमाने पर संसाधन दोहन की जरूरत क्या है, जबकि आठों पूर्वोत्तर राज्यों की संयुक्त अधिकतम ऊर्जा मांग 5,000 मेगावाट से भी कम है. वे निजी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों की भूमिका की ओर भी इशारा करते हैं और चेतावनी देते हैं कि ये परियोजनाएं पर्यावरणीय नुकसान, संसाधनों के शोषण और स्थानीय समुदायों के विस्थापन का कारण बन सकती हैं.
गुवाहाटी घोषणा में आदिवासी समुदायों के लिए संविधान में दिए गए सुरक्षा प्रावधानों के पूर्ण क्रियान्वयन की मांग की गई है, जिनमें असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में छठी अनुसूची के प्रावधान, तथा नगालैंड, सिक्किम और मिजोरम के लिए अनुच्छेद 371 (A/F/G) शामिल हैं.
गौरव गोगई का असम मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर जमीन हड़पने का आरोप
असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने बुधवार (4 फरवरी) को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के परिवार ने पूरे राज्य में लगभग 12,000 बीघा ज़मीन हड़प ली है. यह रकबा 3,960 एकड़ से भी अधिक बैठता है.
गुवाहाटी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता ने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री ज़मीन घोटाले से ध्यान भटकाने के लिए गोगोई पर पाकिस्तान से संबंध होने जैसे आरोप लगा रहे हैं.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोगोई ने कहा कि पार्टी मुख्यमंत्री द्वारा ‘ज़मीन हड़पने’ की जांच कर रही है और आरोप लगाया कि उन्हें राज्य के अलग-अलग हिस्सों में उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर नियमों का उल्लंघन करते हुए 12,000 बीघा ज़मीन हड़पे जाने के सबूत मिले हैं.

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस ने जांच की है और उसमें कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. पूरे राज्य में लगभग 12,000 बीघा ज़मीन पर मुख्यमंत्री और उनके परिवार ने कब्ज़ा किया है.’
कांग्रेस ने ‘www.whoishbs.com’ नाम से एक वेबसाइट भी लॉन्च की है, जिसमें शर्मा पर भ्रष्टाचार और ज़मीन हड़पने से जुड़े आरोपों का ब्योरा दिया गया है. भाजपा की असम इकाई के एक्स अकाउंट ने पहले इस लिंक को साझा किया था, लेकिन बाद में पोस्ट हटा ली गई. वेबसाइट पर एक फोन नंबर भी दिया गया है, जिसके ज़रिए लोग अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं.
जवाब में शर्मा ने आरोपों के विवरण पर कुछ नहीं कहा था, लेकिन सोशल मीडिया पर घोषणा की कि वह शीर्ष कांग्रेस नेताओं के खिलाफ ‘झूठे और दुर्भावनापूर्ण बयान देने’ के लिए मानहानि का मुकदमा करेंगे.
असम में अगर भाजपा तीसरी बार जीती तो एक-एक करके घुसपैठियों को बाहर किया जाएगा: अमित शाह
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 30 जनवरी को असम में कथित घुसपैठ के मुद्दे पर भाजपा के चुनावी रुख को दोहराते हुए कहा कि अगर पार्टी तीसरी बार राज्य में सत्ता में लौटती है, तो उसकी सरकार ‘घुसपैठियों’ को एक-एक करके खोजकर बाहर करेगी.
अमित शाह चुनावी अभियान की शुरूआत करते हुए कहा, ‘कांग्रेस ने वोट-बैंक की राजनीति के लिए असम में सत्ता में आने के लिए अवैध प्रवास को बढ़ावा दिया.’

शाह ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘आज, असम की दूसरी राजधानी से मैं वादा करता हूं कि अगर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के नेतृत्व में भाजपा सरकार तीसरी बार सत्ता में आती है, तो हर अवैध प्रवासी को चिह्नित कर असम से बाहर निकाला जाएगा.’
शाह ने हिमंता बिस्वा शर्मा के समर्थन की अपील करते हुए कहा, ‘अगर आप असम में घुसपैठ रोकना चाहते हैं, तो तीसरी बार भाजपा सरकार चुनिए और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के हाथ मजबूत कीजिए. असम में भाजपा की दो राज्य सरकारों ने घुसपैठियों द्वारा किए गए अतिक्रमण से 1.26 लाख एकड़ जमीन मुक्त कराई है.’
असम मुख्यमंत्री का बांग्ला भाषी मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफरती बयान
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने बांग्ला भाषी मुसलमानों, जिन्हें वह बांग्लादेश से अवैध रूप से आए हुए लोग बताते हैं, के खिलाफ अपने बयानों को जारी रखते हुए बुधवार (4 जनवरी) को महात्मा गांधी के ‘सविनय अवज्ञा और असहयोग’ हवाला दिया.
शिवसागर ज़िले में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘हर दिन हम 20 या 30 लोगों को बाहर भेजते हैं. लेकिन हम उन्हें लाइन में खड़ा करके ट्रेन में बिठा कर बांग्लादेश नहीं भेज सकते… हमारे भेजने के बजाय ऐसा इंतज़ाम होना चाहिए कि वे खुद ही चले जाएं. अब हमने 1.5 लाख बीघा ज़मीन पर अतिक्रमण हटाया है. उन्हें ज़मीन नहीं मिलेगी, तो उन्हें असम छोड़कर जाना ही पड़ेगा.’
उन्होंने आगे कहा, ‘मेरा विचार है कि ऐसा माहौल बनाया जाए कि वे असम में रह न सकें. उन्हें ज़मीन मत दो, उन्हें वाहन मत दो, उन्हें रिक्शा मत दो, उन्हें ठेले मत दो. तब बांग्लादेशी खुद ही चले जाएंगे… हर दिन 20–25 लोगों को बांग्लादेश भेजा जा रहा है; किसी में अदालत जाने की हिम्मत नहीं है.’
उन्होंने कहा कि नीति लोगों को बांग्लादेश की ओर ‘धकेलने’ की है. ‘और जो लोग अभी अंदर हैं, उनके लिए ऐसा तंत्र बनाओ कि वे यहां रह ही न सकें. यही महात्मा गांधी की सविनय अवज्ञा और असहयोग है. महात्मा गांधी ने हमें दो चीज़ें सिखाईं: असहयोग और सविनय अवज्ञा. जब असम के लोग असहयोग और सविनय अवज्ञा करेंगे, तो वे अपने-आप चले जाएंगे. रिक्शे पर बैठने से पहले सोचो कि किसका रिक्शा ले रहे हो.’
इससे पहले 29 जनवरी को शर्मा ने कहा था कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विशेष पुनरीक्षण (एसआर) प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग (ईसी) के पास 5 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज कराई हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा था, ‘अवैध विदेशियों के खिलाफ हमारा रुख बिल्कुल साफ है. इसी वजह से हमारे कार्यकर्ताओं ने 5 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज की हैं. नहीं तो वे सभी ‘स्वदेशी’ (नागरिक) बन जाते. असम में ऐसा कोई इलाका नहीं है जो अवैध विदेशियों से सुरक्षित हो.’
उनके नफरती बयानों को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. उसके बाद मुख्यमंत्री ने हर्ष मंदर खिलाफ सौ मुकदमे करने की धमकी दी थी.
शर्मा ने 25 जनवरी 2026 को दावा किया कि राज्य में केवल ‘मिया’ यानी बांग्ला भाषी मुसलमानों को ही बेदखली अभियान ते तहत निशाना बनाया जा रहा है, असमिया लोगों को नहीं.
मेघालय में अवैध कोयला खदान विस्फोट में 25 श्रमिकों की मौत, दो गिरफ़्तार
मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स ज़िले में एक अवैध कोयला खदान में हुए धमाके में मरने वालों की संख्या बढ़कर 25 हो गई है, जबकि उस दूरदराज के इलाके में बचाव अभियान जारी है.
उस अवैध रैट-होल कोयला खदान के दो मालिकों को गिरफ्तार किया, जहां गुरुवार (5 फरवरी, 2026) सुबह हुए विस्फोट में 18 खनिकों की मौत हो गई थी.
घटना के बाद, पुलिस ने खलीहरियात थाने में भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के साथ-साथ खनन और विस्फोटक से संबंधित कानूनों के तहत अपनी पहल पर एक मामला दर्ज किया.
अब तक दो गिरफ्तारियां की गई हैं, और अधिकारियों ने कहा कि अवैध खनन से जुड़े अन्य लोगों की पहचान के लिए जांच जारी है.
बता दें कि मेघालय में एनजीटी द्वारा साल 2014 में प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी रैट होल खदानों में खनन जारी है. रैट होल खदान चूहों के बिल जैसी होती है, जिसमें संकरी सुरंगें खोदी जाती हैं, जिसके भीतर मजदूर जाते हैं और कोयला निकालकर लाते हैं.
क्षेत्र में अवैध कोयला खनन के कारण वर्षों से कई जानलेवा घटनाएं हो चुकी हैं, जबकि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और सुप्रीम कोर्ट द्वारा बार-बार प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद यह सिलसिला जारी रहा है.
2019 में सेवानिवृत्त जस्टिस बीपी कटाके की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी, जिसे मेघालय में कोयला खनन की प्रथाओं की जांच करने और सुरक्षा उपायों की सिफारिश करने का काम सौंपा गया था. इसी प्रक्रिया के आधार पर उसी वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिशानिर्देश जारी किए थे.
मेघालय हाईकोर्ट द्वारा गठित एक सदस्यीय समिति ने फरवरी 2025 में कहा था कि राज्य के छह कोयला समृद्ध जिलों में ऐसी गतिविधियां बेरोकटोक जारी हैं.
मेघालय हाईकोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया था कि राज्य में अवैध कोयला खनन बेरोकटोक जारी है, जिसमें 1.69 लाख मीट्रिक टन (एमटी) अवैध रूप से खनन किए गए कोयले का पता चला है.
