नई दिल्ली: दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार (27 फरवरी) को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की आबकारी नीति मामले, जिसे कथित शराब घोटाला भी कहा जाता है, में सभी 23 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया. इनमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी शामिल हैं, जो आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख नेता हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह आदेश विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने पारित किया. अदालत ने कहा कि अभियोजन एजेंसी के साक्ष्यों का समर्थन करने के लिए आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सामग्री नहीं मिली है.
अदालत ने आबकारी नीति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दाखिल आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से भी इनकार कर दिया.
ज्ञात हो कि साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को फटकार लगाई थी और उनकी जांच की ‘निष्पक्षता’ पर सवाल उठाए थे.
अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया उन लोगों में शामिल थे जिन्हें इस केस में गिरफ्तार किया गया था, जिसकी सीबीआई जांच कर रही थी, जिसमें पिछली आप सरकार की अब रद्द की जा चुकी आबकारी नीति को बनाने और लागू करने में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था.
इससे पहले जनवरी में दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली आबकारी नीति मामले की जांच के दौरान केंद्रीय एजेंसी के समन की कथित अवहेलना से जुड़े दो मामलों में ईडी द्वारा दर्ज मामलों में भी अरविंद केजरीवाल को बरी कर दिया था.
प्रतिक्रियाएं
अदालत के निर्णय के बाद दिल्ली के पूर्व सीएम और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘भाजपा के बनाए तथाकथित शराब घोटाले पर कोर्ट ने सच्चाई सामने रख दी. आम आदमी पार्टी को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने आज़ाद भारत का सबसे बड़ा षड्यंत्र रचा. लेकिन आज कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आप भ्रष्ट नहीं हैं. मैंने अपने जीवन में केवल ईमानदारी कमाई है.’
उन्होंने आगे जोड़ा, ‘मैं प्रधानमंत्री से कहना चाहता हूं- सत्ता के लिए देश और संविधान से खिलवाड़ मत कीजिए. अच्छे काम कीजिए और काम के दम पर जनता का विश्वास जीतिए.’
सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं🙏
बीजेपी के बनाए तथाकथित शराब घोटाले पर कोर्ट ने सच्चाई सामने रख दी. आम आदमी पार्टी को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने आज़ाद भारत का सबसे बड़ा षड्यंत्र रचा.
लेकिन आज कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि अरविंद केजरीवाल, मनीष… pic.twitter.com/4bT3c9ODL1
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) February 27, 2026
मनीष सिसोदिया ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि आज एक बार फिर बाबा साहेब आंबेडकर जी की दूरदर्शी सोच और उनके बनाए संविधान पर फ़ख़्र महसूस हो रहा है.
उन्होंने कहा, ‘मोदी जी की पूरी पार्टी और सारी एजेंसियों की हमें बेईमान साबित करने की तमाम कोशिशों के बावजूद आज साबित हो गया कि अरविंद केजरीवाल – मनीष सिसोदिया कट्टर ईमानदार है.’
वहीं, आम आदमी पार्टी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से एक पोस्ट में कहा, ‘आज कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल जी और मनीष सिसोदिया जी को फ़र्ज़ी शराब घोटाले में निर्दोष करार देकर भाजपा के झूठ पर सदा के लिए ताला लगा दिया है. इस लड़ाई में हमारा साथ देने वाले करोड़ों देशवासियों का दिल से धन्यवाद. हम देश के लिए पूरी ईमानदारी से लड़ते आए हैं और लड़ते रहेंगे.’
ज्ञात हो कि केजरीवाल को लोकसभा चुनावों से पहले 21 मार्च, 2024 को ईडी ने गिरफ्तार किया था, क्योंकि वे नौ समन के बाद भी उसके सामने पेश नहीं हुए थे. ईडी ने उनसे पूछताछ की और केंद्रीय एजेंसी द्वारा यह पाए जाने के बाद कि वे जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.
उन्हें उसी साल 12 जुलाई को ईडी मामले में और 13 सितंबर को सीबीआई मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी थी. उन्होंने 17 सितंबर को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.
इससे पहले मनीष सिसोदिया को 26 फरवरी, 2023 को सीबीआई ने और 12 दिन बाद ईडी ने गिरफ्तार किया. सुप्रीम कोर्ट ने 9 अगस्त, 2024 को उन्हें ज़मानत देते हुए कहा, ‘निकट भविष्य में मुक़दमा समाप्त होने की दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं है.’
क्या मामला है?
फरवरी 2023 में दिल्ली के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था और उसके एक महीने बाद ईडी ने भी उन्हें गिरफ्तार किया था. जुलाई 2022 में दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया था, जिसमें आबकारी नीति में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था.
सिसोदिया के अलावा दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और आप सांसद संजय सिंह को भी ईडी जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था. इसी मामले में तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी कविता को ईडी ने 15 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया था.
सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में सिसोदिया पर ‘लाइसेंसधारी को निविदा के बाद अनुचित लाभ पहुंचाने के इरादे से सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना वर्ष 2021-22 के लिए आबकारी नीति से संबंधित सिफारिश करने और निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने’ का आरोप लगाया गया है.
आरोप है कि शराब कारोबारियों को लाइसेंस देने के लिए दिल्ली सरकार की आबकारी नीति कुछ डीलरों के पक्ष में प्रभावित थी और बदले में उन्होंने इसके लिए कथित रूप से रिश्वत दी थी.
मालूम हो कि नई आबकारी नीति 2021-22, 17 नवंबर 2021 से लागू की गई थी, जिसके तहत 32 मंडलों में विभाजित शहर में 849 ठेकों के लिए बोली लगाने वाली निजी संस्थाओं को खुदरा लाइसेंस दिए गए. कई शराब की दुकानें खुल नहीं पाईं. ऐसे कई ठेके नगर निगम ने सील कर दिए गए थे.
तब भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने इस नीति का पुरजोर विरोध किया था और इसकी जांच के लिए उपराज्यपाल के साथ केंद्रीय एजेंसियों में शिकायत दर्ज कराई थी.
आरोप था कि मनीष सिसोदिया ने कथित तौर पर कोविड-19 महामारी के बहाने निविदा लाइसेंस शुल्क पर शराब कारोबारियों को 144.36 करोड़ रुपये की छूट की अनुमति दी है. यह भी आरोप लगाया गया था कि आम आदमी पार्टी ने 2022 के पंजाब चुनाव के दौरान इस पैसे का इस्तेमाल किया होगा.
