नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के इंदौर में सोमवार (2 मार्च) को सीवर की सफाई करते समय जहरीली गैस की चपेट में आने से नगर निगम के दो कर्मचारियों की दम घुटने से मौत हो गई.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक, एक प्रत्यक्षदर्शी ने आरोप लगाया कि दोनों कर्मचारी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सीवर चैंबर में उतरे थे, और एम्बुलेंस भी घटना के दो घंटे बाद मौके पर पहुंची.
इस घटना का संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दोनों पीड़ित परिवारों को 30-30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है.
इस मामले के संबंध में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त सुमित केरकट्टा ने बताया कि यह घटना चोइथराम अस्पताल के गेट के पास देवी अहिल्याबाई होलकर फल एवं सब्जी मंडी के सामने शाम करीब 6.30 बजे घटी.
पुलिस के अनुसार, सफाई अभियान के दौरान सीवर सक्शन मशीन का एक पाइप टूटकर चैंबर में गिर गया था. इस पाइप को निकालने के लिए नीचे गए एक कर्मचारी जहरीली गैस के संपर्क में आने से बेहोश हो गए. उन्हें बचाने के लिए नीचे उतरे एक अन्य नगर निगम कर्मचारी भी बेहोश हो गए. बाद में सीवर में मौजूद जहरीली गैस की चपेट में आने के चलते दम घुटने से दोनों कर्मचारियों को मृत घोषित कर दिया गया.
सुमित केरकट्टा ने आगे बताया कि राज्य आपदा राहत बल की मदद से उनके शवों को बाहर निकाला गया. पुलिस उपायुक्त श्रीकृष्ण लालचंदानी ने कर्मचारियों की पहचान करण यादव और अजय डोडी के रूप में की.
वहीं, एक प्रत्यक्षदर्शी ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में यह दावा किया कि कर्मचारी बिना सुरक्षा उपकरणों के चैबंर में उतरे थे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दो घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस, नगर निगम कर्मचारी और एम्बुलेंस मौके पर नहीं पहुंचे.
उन्होंने आगे बताया कि राहगीरों ने दोनों सफाईकर्मियों को कक्ष से बाहर खींचकर बचाने की कोशिश की.
एक अधिकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए सीवर से संबंधित मौतों के मुआवजे के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के 2023 के निर्देश के अनुसार प्रत्येक को 30 लाख रुपये जारी करने का आदेश दिया है.
मालूम हो कि बीते साल 29 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे यह सुनिश्चित करें कि हाथ से मैला ढोने (सीवर सफाई आदि में) से होने वाली मौतों के लिए मुआवज़ा घटना के तीन हफ़्तों के भीतर वितरित किया जाए.
इससे पहले 2023 के निर्देशों के अनुसार, अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए हाथ से मैला ढोने की अमानवीय प्रथा को समाप्त करने के लिए हरसंभव उपाय करना अनिवार्य कर दिया था.
अदालत ने सीवर या नालियों की सफाई के दौरान मरने वालों के परिवार को दी जाने वाली मुआवज़ा राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दिया था.
वहीं, इंदौर नगर निगम ने देर रात एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि सेप्टिक टैंक खाली करने के बाद नगरपालिका के वाहन से जल निकासी लाइन के चैंबर में पानी छोड़ते समय दोनों सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई.
ज्ञात हो कि देश में पहली बार 1993 में मैला ढोने की प्रथा पर प्रतिबंध लगाया गया था. इसके बाद 2013 में कानून बनाकर इस पर पूरी तरह से बैन लगाया गया. हालांकि आज भी समाज में मैला ढोने की प्रथा मौजूद है.
मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट 2013 के तहत किसी भी व्यक्ति को सीवर में भेजना पूरी तरह से प्रतिबंधित है. अगर किसी विषम परिस्थिति में सफाईकर्मी को सीवर के अंदर भेजा जाता है तो इसके लिए 27 तरह के नियमों का पालन करना होता है. हालांकि इन नियमों के लगातार उल्लंघन के चलते आए दिन सीवर सफाई के दौरान श्रमिकों की जान जाती है.
