नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के हमलों से पश्चिमी एशिया में बढ़ रहे तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति और उद्योगों पर भी दिखाई देने लगा है. क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे देश की गैस कंपनियों ने औद्योगिक ग्राहकों के लिए कीमतें बढ़ा दी हैं और कुछ जगहों पर गैस सप्लाई भी घटा दी गई है.
अडानी टोटल गैस ने औद्योगिक ग्राहकों के लिए गैस की कीमत बढ़ा दी है. कंपनी ने अपने ग्राहकों को भेजे नोटिस में बताया कि दैनिक अनुबंधित मात्रा से अधिक गैस लेने पर अब 119 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर की दर से भुगतान करना होगा. पहले अतिरिक्त गैस की कीमत करीब 40 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर थी. संशोधित दरें बीते मंगलवार से लागू कर दी गई हैं.
कंपनी ने कहा कि यह बढ़ोतरी पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण एलएनजी की उपलब्धता कम होने से जुड़ी है.
नोटिस में कहा गया है कि हालिया घटनाओं के चलते आपूर्ति मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे कंपनी को अपस्ट्रीम गैस सप्लाई में कटौती का सामना करना पड़ रहा है और संचालन में दिक्कतें आ रही हैं.
स्ट्रीट ऑफ होर्मुज में व्यवधान
ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव का एक बड़ा कारण स्ट्रीट ऑफ होर्मुज (समुद्री मार्ग) में बाधा भी है. ईरान पर हमलों के बाद इस अहम समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही धीमी हो गई है.
ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकरा जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा और बड़ी मात्रा में एलएनजी गुजरती है.
गुजरात की इंडस्ट्री पर सीधा असर
गैस आपूर्ति में कमी का असर सबसे ज्यादा गुजरात के औद्योगिक इलाकों में देखने को मिल रहा है. टाइम्स ऑफ इंडिया ने उद्योग से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया है कि कई औद्योगिक क्लस्टरों में गैस सप्लाई 40 से 50 प्रतिशत तक घटा दी गई है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है और कई इकाइयों को समय पर ऑर्डर पूरे करने में दिक्कत आ रही है.
गुजरात गैस लिमिटेड ने भी स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी देते हुए कहा है कि मध्य पूर्व के हालिया संघर्ष के कारण री-गैसिफाइड एलएनजी (आर-एलएनजी) की उपलब्धता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है. इस स्थिति को देखते हुए कंपनी ने अपने औद्योगिक ग्राहकों को गैस आपूर्ति समझौते के तहत फोर्स मेजर नोटिस जारी किया है और दैनिक अनुबंधित मात्रा में कटौती की है.
कंपनी ने यह भी कहा कि युद्ध जैसी परिस्थितियां बीमा कवरेज में शामिल नहीं होतीं, इसलिए इस स्थिति का आर्थिक असर फिलहाल अनुमानित नहीं किया जा सकता. कंपनी हालात पर नजर रखे हुए है.
कई इकाइयां आधी क्षमता पर चल रहीं
वटवा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अंकित पटेल के मुताबिक वटवा क्षेत्र की करीब 250 रासायनिक इकाइयां पाइप्ड नेचुरल गैस पर निर्भर हैं. संघर्ष के कारण अडानी टोटल गैस ने सप्लाई को अनुबंधित मात्रा के करीब 40 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है.
उन्होंने बताया कि तय सीमा से ज्यादा गैस लेने पर कीमत लगभग दोगुनी हो जाती है, जिससे अतिरिक्त उपयोग आर्थिक रूप से संभव नहीं रह जाता. इसके कारण प्रभावित इकाइयां अपनी स्थापित क्षमता के केवल 40 प्रतिशत पर ही काम कर पा रही हैं, जिससे बिक्री और मुनाफे पर असर पड़ रहा है.
साणंद इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत शाह ने बताया कि सानंद जीआईडीसी क्षेत्र की 20 से अधिक गैस-आधारित इकाइयों को भी ईमेल के जरिए सूचित किया गया है कि उन्हें अनुबंधित गैस का केवल 50 प्रतिशत ही मिलेगा. उन्होंने कहा कि इससे उत्पादन प्रभावित होगा और चल रहे ऑर्डर समय पर पूरे करना मुश्किल हो सकता है.
ख़बरों के मुताबिक, साणंद में टाटा मोटर्स को अपनी मैन्युफैक्चरिंग इकाई में नैचुरल गैस और प्रोपेन की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, और इस वजह से इस प्लांट की उत्पादन क्षमता 50% तक कम हो सकती है.
सूरत की इंडस्ट्री भी चिंतित
सूरत में भी उद्योगों के बीच चिंता बढ़ रही है. यहां कई केमिकल, टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए गैस पर निर्भर हैं. उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि आपूर्ति में रुकावट लंबे समय तक जारी रहती है तो कुछ इकाइयों को आंशिक या पूर्ण रूप से उत्पादन बंद करना पड़ सकता है.
फिलहाल गुजरात गैस सूरत के औद्योगिक उपभोक्ताओं को रोजाना एक लाख क्यूबिक मीटर से अधिक गैस की आपूर्ति करती है, और आपूर्ति में कमी से पूरे औद्योगिक क्लस्टर की उत्पादन लागत और समय-सीमा प्रभावित हो सकती है.
मोरबी में सिरेमिक इकाइयां प्रभावित
समाचार रिपोर्ट्स बताती हैं कि प्रोपेन की कमी से मोरबी में सिरेमिक बनाने वाली इकाइयां भी खासी प्रभावित हुई हैं.
मोरबी दुनिया के सबसे बड़े सिरेमिक मैन्युफैक्चरिंग हब में से एक है, जहां सैकड़ों यूनिट घरेलू और एक्सपोर्ट दोनों तरह के बाज़ारों के लिए विट्रिफाइड टाइल्स और दूसरे सिरेमिक प्रोडक्ट बनाते हैं.
बताया जा रहा है कि अब मोरबी ज़िले में लगभग 100 सिरेमिक बनाने वाली यूनिट्स बंद हो गई हैं और इसका कारण अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष की वजह से प्रोपेन गैस सप्लाई में रुकावट आना है. इस उद्योग के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो कुछ ही दिनों में सैकड़ों और फैक्ट्रियां अपना काम रोक सकती हैं.
मोरबी सिरेमिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (विट्रिफाइड टाइल्स डिवीज़न) के प्रेसिडेंट मनोज अरवाडिया के मुताबिक, पिछले दो दिनों में सप्लाई बंद होने के बाद प्रोपेन फ्यूल पर निर्भर लगभग 100 यूनिट्स ने पहले ही प्रोडक्शन रोक दिया है. मौजूदा जंग जैसे हालात की वजह से पिछले दो दिनों से प्रोपेन गैस नहीं मिल रही है, और फ्यूल पर निर्भर लगभग 100 यूनिट्स पहले ही बंद हो चुकी हैं.
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सप्लाई जल्द ही ठीक नहीं हुई तो संकट और गहरा सकता है, और एक हफ़्ते के अंदर लगभग प्रोपेन से चलने वाली 400 और यूनिट बंद हो सकती हैं.
