अडानी-एनएमडीसी समझौते पर पूर्व नौकरशाह ने जताई आपत्ति, केंद्र से की न्यायिक जांच की मांग

भारत सरकार के पूर्व सचिव ईएएस शर्मा ने अडानी समूह, एनएमडीसी और ब्राज़ील की कंपनी वेल एसए के बीच हुए समझौते पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि इससे विशाखापत्तनम पोर्ट और स्टील प्लांट जैसे सार्वजनिक उपक्रमों के हित प्रभावित होंगे. उन्होंने केंद्र से मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है.

पूर्व सचिव का कहना है कि यह समझौता नॉर्थ आंध्र प्रदेश के दो प्रमुख केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (विशाखापत्तनम पोर्ट ट्रस्ट और विशाखापत्तनम स्टील प्लांट) के हितों के खिलाफ है और इससे मुख्य रूप से अडानी समूह को फायदा होगा. (इलस्ट्रेशन: द वायर हिंदी)

नई दिल्ली: भारत सरकार के पूर्व सचिव ईएएस शर्मा ने अडानी समूह, एनएमडीसी और ब्राज़ील की कंपनी वेल एसए (Vale S.A.) के बीच हुए एक समझौते पर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने केंद्र सरकार से इस मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है और कहा है कि इससे आंध्र प्रदेश के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के हित प्रभावित हो सकते हैं.

शर्मा ने केंद्रीय खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी, इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी और पोत एवं बंदरगाह मंत्री सर्बानंद सोनोवाल को लिखे पत्र में कहा कि हाल ही में भारत-ब्राज़ील बिजनेस फोरम समिट में अडानी पोर्ट्स एंड एसईज़ेड लिमिटेड की सहायक कंपनी अडानी गंगावरम पोर्ट लिमिटेड ने एनएमडीसी और ब्राज़ील की कंपनी वेल एसए के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं.

इस समझौते के तहत लौह अयस्क के मिश्रण और उसके व्यापार के लिए एक संयुक्त सुविधा विकसित करने तथा बड़े जहाजों को संभालने के लिए आधुनिक बंदरगाह और माल ढुलाई सुविधाएं बनाने की योजना है. इन सुविधाओं को इस तरह विकसित करने का प्रस्ताव है कि वे 4 लाख मीट्रिक टन तक की क्षमता वाले ‘वैलेमैक्स’ जहाजों को भी संभाल सकें.

सार्वजनिक उपक्रमों के हितों पर असर की आशंका

ईएएस शर्मा का कहना है कि यह समझौता उत्तर आंध्र प्रदेश के दो प्रमुख केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (विशाखापत्तनम पोर्ट ट्रस्ट और विशाखापत्तनम स्टील प्लांट) के हितों के खिलाफ है और इससे मुख्य रूप से अडानी समूह को फायदा होगा.

उन्होंने बताया कि एनएमडीसी लंबे समय से विशाखापत्तनम पोर्ट के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ के बैलाडीला खदानों से निकाले गए उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क का निर्यात करता रहा है. विशाखापत्तनम पोर्ट पर पहले से अत्याधुनिक मशीनीकृत व्यवस्था मौजूद है, जहां प्रति घंटे करीब 8,000 टन लौह अयस्क जहाजों में लोड किया जा सकता है और 2 लाख टन तक के बड़े जहाज भी यहां लग सकते हैं.

विशाखापत्तनम स्टील प्लांट के साथ साझेदारी की सलाह

शर्मा का कहना है कि एनएमडीसी एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है, इसलिए उसे अडानी समूह के साथ समझौता करने के बजाय विशाखापत्तनम स्टील प्लांट के साथ मिलकर इन सुविधाओं को और मजबूत करना चाहिए था, ताकि ब्राज़ील समेत अन्य देशों को लौह अयस्क का निर्यात किया जा सके.

उन्होंने कहा कि विशाखापत्तनम स्टील प्लांट का इस क्षेत्र के लोगों के लिए विशेष महत्व है. यह संयंत्र लगभग छह दशक पहले बड़े जन आंदोलन और स्थानीय नेताओं के दबाव के बाद स्थापित किया गया था.

निजीकरण पर भी उठाए सवाल

शर्मा ने केंद्र सरकार के उस फैसले की भी आलोचना की, जिसके तहत विशाखापत्तनम स्टील प्लांट के निजीकरण की योजना बनाई गई है. उनका कहना है कि सरकार राष्ट्रीय इस्पात नीति में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की भूमिका को नजरअंदाज कर रही है.

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार यह जानते हुए भी संयंत्र को बेचने की योजना बना रही है कि कोई भी निजी कंपनी इसकी वास्तविक कीमत और इसके पास मौजूद मूल्यवान जमीन का पूरा मूल्य नहीं चुका पाएगी. उनके मुताबिक आशंका है कि इसे कम कीमत पर किसी ‘पसंदीदा’ कारोबारी समूह को सौंप दिया जाएगा.

कैप्टिव लौह अयस्क खदान की मांग

पूर्व नौकरशाह ने कहा कि यदि खनन मंत्रालय विशाखापत्तनम स्टील प्लांट के लिए एक कैप्टिव लौह अयस्क खदान आवंटित कर देता, तो इससे संयंत्र की मौजूदा वित्तीय समस्याएं काफी हद तक दूर हो सकती थीं और यह उत्तर आंध्र प्रदेश के विकास में बड़ी भूमिका निभा सकता था.

उनका आरोप है कि केंद्र सरकार के दबाव में एनएमडीसी को विशाखापत्तनम स्टील प्लांट के बजाय अडानी समूह के गंगावरम पोर्ट के जरिए लौह अयस्क निर्यात करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के लोगों की भावनाएं आहत हो रही हैं.

राज्य सरकारों की भी आलोचना

शर्मा ने आंध्र प्रदेश की पिछली वाईएसआर कांग्रेस सरकार और वर्तमान टीडीपी-जनसेना गठबंधन सरकार दोनों की आलोचना करते हुए कहा कि दोनों ही सरकारों ने उत्तर आंध्र के लोगों की भावनाओं को महत्व नहीं दिया.

उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने कडप्पा के पास एक निजी इस्पात संयंत्र को बढ़ावा देने की कोशिश की थी, जबकि मौजूदा सरकार अनाकापल्ले के पास आर्सेलर मित्तल के निजी इस्पात संयंत्र को बढ़ावा दे रही है. उनका कहना है कि इससे विशाखापत्तनम स्टील प्लांट के ग्राहकों का आधार कमजोर हो सकता है.

न्यायिक जांच की मांग

ईएएस शर्मा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि हाल के वर्षों में एक कॉरपोरेट समूह को कथित तौर पर दिए गए विशेष लाभों की न्यायिक जांच कराई जाए. उन्होंने कहा कि जांच आयोग की रिपोर्ट संसद और जनता के सामने लाई जानी चाहिए.

उन्होंने सरकार से अपील की कि विशाखापत्तनम स्टील प्लांट और विशाखापत्तनम पोर्ट ट्रस्ट जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को कमजोर करने के बजाय उन्हें मजबूत किया जाए, क्योंकि अपारदर्शी तरीके से निजी कॉरपोरेट समूहों के हितों को बढ़ावा देना अंततः जनहित के खिलाफ होगा.