नई दिल्ली: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोमवार को विधानसभा में बताया कि जून 2024 से अब तक राज्य में 54 सांप्रदायिक दंगे और 7 मॉब लिंचिंग की घटनाएं दर्ज की गई हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, विधानसभा में दिए गए एक लिखित उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे अधिक 24 सांप्रदायिक दंगे बालासोर जिले में दर्ज किए गए, जबकि 16 मामले खुर्दा जिले में सामने आए, जिसमें राज्य की राजधानी भुवनेश्वर भी शामिल है.
मुख्यमंत्री ने बताया कि दंगों में कथित संलिप्तता के आरोप में करीब 300 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. हालांकि इन मामलों में 50 प्रतिशत से भी कम मामलों में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया गया है.
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि खुर्दा ज़िले में सांप्रदायिक दंगे के 16 मामले सामने आए, जिनमें 120 लोगों को गिरफ़्तार किया गया. उन्होंने कहा कि कोरापुट ज़िले में दंगे के आठ मामलों में पुलिस ने 33 लोगों को गिरफ़्तार किया. उन्होंने कहा कि मलकानगिरी और भद्रक ज़िलों में भी दंगों की चार और दो घटनाएं हुईं, जिनमें क्रमशः 26 और 24 लोगों को गिरफ़्तार किया गया.
यह बताते हुए कि सबसे ज़्यादा तीन मॉब लिंचिंग की घटनाएं रायगढ़ ज़िले में हुईं, जिनमें 48 लोगों को गिरफ़्तार किया गया – माझी ने कहा कि ढेंकनाल ज़िले में ऐसी दो घटनाएं हुईं, जिनमें अभी तक कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है. इसी तरह, देवगढ़ और बालासोर ज़िलों में मॉब लिंचिंग का एक-एक मामला सामने आया, जिसमें क्रमशः छह और सात लोगों को गिरफ़्तार किया गया.
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, हालांकि मुख्यमंत्री के उत्तर में उस सांप्रदायिक झड़प का उल्लेख नहीं किया गया, जो कटक शहर में दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान हुई थी. अक्टूबर 2025 में हुई इस घटना के बाद कटक में लगभग तीन दिनों तक कर्फ्यू लगा रहा था. यह हिंसा दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान हुई झड़प से शुरू हुई थी. इसके कुछ दिनों बाद विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों की पुलिस के साथ झड़प हुई और तोड़फोड़ तथा आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं थीं.
विपक्षी दलों ने राज्य में घृणा अपराधों और सांप्रदायिक टकरावों में वृद्धि का आरोप लगाते हुए सरकार की आलोचना की. इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए पुलिस थानों के तहत शांति समितियों के माध्यम से और स्थानीय प्रशासन की मदद से कदम उठाए जा रहे हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि खुफिया सूचनाएं एकत्र करने की व्यवस्था को मजबूत किया गया है और समाज में शांति और व्यवस्था भंग करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है.
अखबार के अनुसार, पिछले 20 महीनों में ओडिशा के लगभग आधा दर्जन कस्बों में सांप्रदायिक घटनाओं के कारण कर्फ्यू लगाया गया और इंटरनेट सेवाएं निलंबित करनी पड़ीं. इनमें बांग्ला भाषी मुसलमानों की लिंचिंग की घटनाएं भी शामिल हैं. अधिकांश मामलों में आरोपी दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े बताए गए हैं.
अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ घटनाएं दर्ज नहीं हो पातीं, खासकर तब जब पीड़ित दिहाड़ी मजदूर होते हैं और पुलिस के पास जाने से हिचकिचाते हैं.
विपक्ष ने राज्य में ‘सांप्रदायिक तनाव बढ़ने’ का आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा है. जून 2024 में भारतीय जनता पार्टी ने ओडिशा में पहली बार अपने दम पर सरकार बनाई थी.
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, ओडिशा में सांप्रदायिक या धर्म आधारित घटनाएं 2021 में 10, 2023 में 44 (चुनाव से पहले का वर्ष) और 2025 में 15 दर्ज की गईं. वहीं संसद में गृह मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2018 में 9 सांप्रदायिक घटनाएं हुई थीं, जबकि 2019 में कोई भी घटना दर्ज नहीं हुई थी.
