एमनेस्टी की जांच में युवा प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ ‘घातक बल’ के इस्तेमाल की पुष्टि, पुलिस पर सवाल

बीते महीने युवाओं के देशव्यापी प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक रिपोर्ट में संगठन की एविडेंस लैब ने वीडियो और तस्वीरों से जुड़े सबूतों का सत्यापन किया है और पुष्टि की है कि दिल्ली और बिहार के सीवान में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पैलेट गन, आंसू गैस, ग्रेनेड, लाठियां और बिजली का झटका देने वाले उपकरणों जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया था.

20 जुलाई को शास्त्री भवन मेट्रो के पास आरएएफ के एक जवान प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागते हुए. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सोमवार को एक डिजिटल जांच रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई का दस्तावेजीकरण किया गया है.

यह रिपोर्ट दिल्ली में सीजेपी के नेतृत्व में हुए ‘संसद चलो’ मार्च और देशभर में उभरे व्यापक जेन ज़ी आंदोलन के करीब एक महीने बाद आई है. यह आंदोलन बाद में इतना व्यापक हुआ कि इसके परिणामस्वरूप केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा.

24 अगस्त को अपनी जांच प्रकाशित करते हुए एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि भारतीय पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गैरकानूनी और घातक बल का इस्तेमाल किया.

एमनेस्टी इंटरनेशनल की एविडेंस लैब ने वीडियो और तस्वीरों से जुड़े सबूतों का सत्यापन किया है और पुष्टि की है कि दिल्ली और बिहार के सीवान में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन, आंसू गैस, ग्रेनेड, लाठियां और बिजली का झटका देने वाले उपकरणों जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया. एमनेस्टी के अनुसार, इन हथियारों का इस्तेमाल ऐसे तरीकों से किया गया जो अंतरराष्ट्रीय कानून और पुलिसिंग से जुड़े दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हैं.

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के बोर्ड के अध्यक्ष आकार पटेल ने भारतीय अधिकारियों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अनावश्यक या अत्यधिक बल का इस्तेमाल कर प्रदर्शनों को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, ‘प्रदर्शन करने के अधिकार को आसान बनाने के बजाय भारतीय अधिकारियों ने पहले संचार व्यवस्था बंद करके, बैरिकेड लगाकर और परिवहन व्यवस्था बाधित करके इसे दबाया. इसके बाद उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, जिनमें बच्चे भी शामिल थे, के खिलाफ अनावश्यक या अत्यधिक बल का इस्तेमाल कर आंदोलन को कुचलने की कोशिश की. यह कठोर कार्रवाई राज्य द्वारा स्वीकृत हिंसा थी, जिसे भीड़ नियंत्रण के नाम पर छिपाया गया. एक महीने बाद भी सज़ा न मिलना इसका सबूत है.’

पैलेट गन का इस्तेमाल

एमनेस्टी की एविडेंस लैब ने 20 जुलाई को दिल्ली में जंतर-मंतर, संसद मार्ग और कनॉट प्लेस के आसपास बनाए गए 17 वीडियो और 24 जुलाई को बिहार के सीवान में बनाए गए दो वीडियो का सत्यापन किया.

दिल्ली से जुड़े वीडियो में दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों की पहचान की गई. एमनेस्टी ने एक आरएएफ अधिकारी को भीड़ पर शॉटगन चलाते हुए सत्यापित किया. संगठन द्वारा सत्यापित दो अन्य वीडियो में प्रदर्शनकारियों के शरीर पर ऐसे घाव दिखाई दिए, जो छोटे धातु के पैलेट से लगी चोटों जैसे थे.

पैलेट से घायल हुए एक प्रदर्शनकारी ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर एमनेस्टी इंटरनेशनल को बताया कि कनॉट प्लेस के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी, लेकिन प्रदर्शन का अधिकांश हिस्सा शांतिपूर्ण रहा था.

प्रदर्शनकारी के अनुसार, आरएएफ के जवानों ने शुरुआत में आंसू गैस का इस्तेमाल किया और इसके बाद बिना किसी चेतावनी के पैलेट चलाने वाली शॉटगन का इस्तेमाल किया. प्रदर्शनकारी ने बताया कि भागने की कोशिश के दौरान उसकी पीठ में पैलेट लगे और उसके शरीर पर लगभग 25 से 30 पैलेट के घाव हुए. बाद में अस्पताल में डॉक्टरों ने भी पुष्टि की कि चोटें पैलेट से लगी थीं.

प्रदर्शनकारी ने यह भी आरोप लगाया कि पैलेट चलाने से पहले कोई चेतावनी नहीं दी गई थी. एमनेस्टी ने कहा कि यह भारत के ‘ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट’ द्वारा तैयार किए गए, सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शनों से बिना जानलेवा तरीकों से निपटने के ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (मानक संचालन प्रक्रिया) के खिलाफ था.

द वायर की अपनी पिछली जांच में भी दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आरएएफ द्वारा पैलेट चलाने वाली बंदूकों के इस्तेमाल की पुष्टि की जा चुकी है.

आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल

एमनेस्टी ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान आंसू गैस के इस्तेमाल से पुलिस की रणनीति के अनुपात और सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं पैदा हुईं.

जांच में पाया गया कि कुछ मामलों में आंसू गैस के ग्रेनेड प्रदर्शनकारियों के सिर के ऊपर किसी कोण (angle) से दागने के बजाय सीधे उन पर दागे गए, जो इनके इस्तेमाल पर संयुक्त राष्ट्र के दिशानिर्देशों के खिलाफ था.

एमनेस्टी ने कहा कि आंसू गैस का इस्तेमाल केवल ऐसी परिस्थितियों में किया जाना चाहिए, जहां व्यापक और गंभीर हिंसा हो रही हो. संगठन को प्रदर्शनों के दौरान इस स्तर की हिंसा होने का कोई सबूत नहीं मिला.

संगठन ने यह भी कहा कि कुछ आंसू गैस ग्रेनेड काफी अधिक विस्फोटक ऊर्जा पैदा कर सकते हैं और गंभीर चोट पहुंचा सकते हैं, खासकर तब जब उनका इस्तेमाल घनी आबादी वाले इलाकों में या सीधे लोगों पर किया जाए.

यह ध्यान देने वाली बात है कि खासकर 20 जुलाई को, संसद चलो मार्च के दौरान पुलिस ने भीड़ पर बड़े पैमाने पर आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिसमें सिर्फ प्रदर्शनकारी ही नहीं, बल्कि बीच में खड़े लोग और व्यस्त सेंट्रल दिल्ली इलाके से गुजरने वाले यात्री भी शामिल थे.

एमनेस्टी ने दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाते हुए दिखाने वाले आठ वीडियो भी सत्यापित किए. फुटेज में अधिकारियों को ऐसे लोगों को मारते हुए दिखाया गया, जिनसे कोई खतरा नहीं लग रहा था, जिसमें एक छोटा लड़का भी शामिल था.

कुछ वीडियो में सादे कपड़े पहने लोग प्रदर्शनकारियों को लाठियों से पीटते हुए दिखाई दिए, जबकि पास खड़े वर्दीधारी पुलिसकर्मी उन्हें रोकने के लिए हस्तक्षेप करते नजर नहीं आए.

एमनेस्टी ने कहा कि इन वीडियो से गंभीर सवाल उठते हैं कि प्रदर्शनकारियों से पैदा हुए कथित खतरे के मुकाबले लाठियों का इस्तेमाल वास्तव में जरूरी और सही था या नहीं.

राइफल का इस्तेमाल

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 24 जुलाई को बिहार के सीवान में घातक राइफल के इस्तेमाल का भी दस्तावेजीकरण किया है.

संगठन ने कहा, ‘राज्य पुलिस का एक अधिकारी प्रदर्शनकारियों पर एके-टाइप असॉल्ट राइफल से गोली चला रहा है. इस तरह के आग्नेयास्त्र लोगों की जान लेने के लिए बनाए जाते और भीड़ के मामले में, इनका इस्तेमाल कानूनी तौर पर तभी किया जा सकता है जब किसी खास व्यक्ति की जान या गंभीर चोट का तुरंत खतरा हो, और वह भी बिल्कुल आखिरी उपाय के तौर पर.’

एमनेस्टी ने अपनी जांच में कहा कि उसे प्रदर्शन के दौरान ‘जान के लिए खतरा पैदा करने वाली’ किसी स्थिति का कोई सबूत नहीं मिला.

इन निष्कर्षों के बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग और पुलिस की कार्रवाई में जवाबदेही के अभाव को लेकर सवाल एक बार फिर उठे हैं.

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने प्रदर्शनों के दौरान राइफल, बर्डशॉट (छर्रों वाली) गोलियों, आंसू गैस, लाठियों और बिजली का झटका देने वाले हथियारों के इस्तेमाल की तत्काल, निष्पक्ष और प्रभावी जांच की मांग की है. संगठन ने अधिकारियों से बर्डशॉट और सीधे संपर्क में इस्तेमाल किए जाने वाले बिजली के झटका देने वाले उपकरणों का इस्तेमाल बंद करने का भी आग्रह किया है.

दिल्ली में पुलिस की कार्रवाई को एक महीना बीत जाने के बावजूद किसी पुलिस अधिकारी को जवाबदेह नहीं ठहराए जाने से प्रदर्शन को लेकर सरकार की कार्रवाई पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. खासतौर पर शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और प्रदर्शन करने के अधिकार की सुरक्षा और कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग की स्थिति में उन्हें जवाबदेह ठहराने के लिए मौजूद व्यवस्था को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं.