एनसीएलटी की मंज़ूरी: जेपी एसोसिएट्स का अधिग्रहण करेगा अडानी समूह, वेदांता की आपत्ति ख़ारिज

एनसीएलटी ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए अडानी एंटरप्राइजेज की 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की समाधान योजना को मंज़ूरी दे दी है. वेदांता की आपत्ति ख़ारिज हो गई है. योजना को 93% लेनदारों का समर्थन मिला, हालांकि कुल लोन के मुकाबले वसूली करीब 2.8% ही रहने वाली है.

वेदांता, जिसके प्रमुख अनिल अग्रवाल हैं, ने आरोप लगाया था कि बोली प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और इसे 'व्यावसायिक साजिश' बताया था. (इलस्ट्रेशन: द वायर हिंदी | बैकग्राउंड इमेज साभार:FreePik)

नई दिल्ली: नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की इलाहाबाद पीठ ने दिवालिया हो चुकी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के अधिग्रहण के लिए अडानी एंटरप्राइजेज की 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की समाधान योजना को मंजूरी दे दी है. इस दौरान वेदांता लिमिटेड की आपत्ति को खारिज कर दिया गया.

मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रिब्यूनल ने संक्षिप्त आदेश सुनाते हुए कहा कि समाधान योजना को मंजूरी दी जाती है. हालांकि, विस्तृत आदेश अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है.

एनसीएलटी की मंजूरी के साथ ही यह योजना अब लागू हो गई है और कंपनी का नियंत्रण अडानी एंटरप्राइजेज को सौंपे जाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. तय समयसीमा के अनुसार लेनदारों को भुगतान शुरू होगा और कंपनी धीरे-धीरे दिवालिया प्रक्रिया से बाहर निकलने की दिशा में आगे बढ़ेगी.

अडानी एंटरप्राइजेज ने शेयर बाजार को दी जानकारी में कहा है कि इस सौदे को कंपनी, उसके प्रमोटर या समूह की अन्य इकाइयों के जरिए, सीधे या किसी विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) के माध्यम से लागू किया जा सकता है.

हालांकि, वेदांता जैसी असहमति जताने वाली कंपनियां इस फैसले को एनसीएलएटी में चुनौती दे सकती हैं. यदि अपीलीय ट्रिब्यूनल याचिका स्वीकार कर आदेश पर रोक लगाता है, तो योजना के लागू होने में देरी संभव है.

वेदांता, जिसके प्रमुख अनिल अग्रवाल हैं, ने आरोप लगाया था कि बोली प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और इसे ‘व्यावसायिक साजिश’ बताया था.

हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार मंजूरी मिलने के बाद समाधान योजना को सीमित कानूनी आधारों पर ही चुनौती दी जा सकती है. आमतौर पर अदालतें लेनदारों की समिति (सीओसी) के व्यावसायिक फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करतीं.

अडानी की योजना को वित्तीय लेनदारों का लगभग 93 प्रतिशत समर्थन मिला, जो इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत आवश्यक 66 प्रतिशत से काफी अधिक है. इस समर्थन में प्रमुख भूमिका नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (एनएआरसीएल) की रही, जिसके पास 85.43 प्रतिशत वोटिंग अधिकार हैं.

वहीं, यस बैंक के एक्सपोज़र का प्रतिनिधित्व करने वाली एसेट केयर एंड रिकंस्ट्रक्शन एंटरप्राइज ने इस योजना के खिलाफ वोट किया.

बताया गया है कि अडानी की बोली को उसकी भुगतान संरचना के कारण बढ़त मिली, जिसमें करीब 6,000 करोड़ रुपये तुरंत और बाकी राशि दो वर्षों के भीतर देने का प्रस्ताव है. इसके मुकाबले वेदांता ने 12,505 करोड़ रुपये की बोली दी थी, लेकिन भुगतान पांच वर्षों में करने का प्रस्ताव रखा था.

हालांकि, कुल 5.44 लाख करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले अडानी की योजना के तहत वसूली महज करीब 2.8 प्रतिशत ही बैठती है. इसके बावजूद, इस योजना से अडानी समूह को जेएएल की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों पर नियंत्रण मिलेगा, जिनमें नोएडा और ग्रेटर नोएडा में करीब 3,985 एकड़ जमीन, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में 6.5 मिलियन टन की सीमेंट उत्पादन क्षमता और जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड में 24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है.

यह अधिग्रहण अडानी समूह के सीमेंट कारोबार के विस्तार में अहम भूमिका निभा सकता है. समूह की कंपनी अंबुजा सीमेंट्स वित्त वर्ष 2028 तक अपनी उत्पादन क्षमता को 109 मिलियन टन से बढ़ाकर 155 मिलियन टन करने की योजना पर काम कर रही है.

इसके अलावा, जेएएल के पास रियल एस्टेट की बड़ी परियोजनाएं भी हैं, जिनमें ग्रेटर नोएडा का जेपी ग्रीन्स, नोएडा का विशटाउन और जेवर एयरपोर्ट के पास विकसित हो रहा इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी शामिल हैं. साथ ही, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, मसूरी और आगरा में होटल परिसंपत्तियां भी कंपनी के पास हैं.

गौरतलब है कि जयप्रकाश एसोसिएट्स को जून 2024 में 55,000 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज चूकने के बाद दिवालिया प्रक्रिया में भेजा गया था. इसके बाद बैंकों ने करीब 12,700 करोड़ रुपये का कर्ज एनएआरसीएल को ट्रांसफर कर दिया, जिससे वह सबसे बड़ा लेनदार बन गया.

कंपनी की वित्तीय स्थिति 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट और कई परियोजनाओं में देरी के कारण बिगड़ती गई. विशेषकर विशटाउन प्रोजेक्ट में देरी के चलते घर खरीदारों की शिकायतें भी बढ़ीं.

जेपी समूह की कई अन्य कंपनियां भी पहले ही दिवालिया हो चुकी हैं. जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड का अधिग्रहण 2024 में सुरक्षा समूह ने किया, जबकि भिलाई जेपी सीमेंट 2025 में दिवालिया प्रक्रिया में गई. अन्य इकाइयां अब भी पुनर्गठन की प्रक्रिया में हैं.