‘मोहम्मद’ दीपक की याचिका जांच को प्रभावित करने का प्रयास: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोटद्वार के ‘मोहम्मद’ दीपक की याचिका पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि एक 'संदिग्ध आरोपी' होने के नाते वह अपनी मनचाही राहत, जैसे सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय जांच की मांग नहीं कर सकते. दीपक ने बीते महीने कोटद्वार में एक मुस्लिम बुज़ुर्ग के साथ दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा की जा रही बदसलूकी का विरोध किया था.

दीपक कुमार. (फाइल फोटो साभार: सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार (20 मार्च) को कोटद्वार के एक जिम के मालिक ‘मोहम्मद’ दीपक कुमार द्वारा दायर याचिका की नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि पुलिस सुरक्षा की मांग और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सहित अन्य अनुरोध ‘जांच को प्रभावित करने’ और जांच एजेंसी पर दबाव डालने का प्रयास हैं.

कुमार ने पिछले महीने राज्य के कोटद्वार में एक बुजुर्ग मुस्लिम के साथ हो रही बदसलूकी के विरोध में दक्षिणपंथी भीड़ का सामना किया था.

गुरुवार को छपी कई खबरों के मुताबिक, कुमार के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस राकेश थपलियाल ने कहा कि एक ‘संदिग्ध आरोपी’ होने के नाते वह अपनी मनचाही राहत, जैसे सुरक्षा, नहीं मांग सकते. उन्हें यह भी बताया गया कि वे पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की मांग नहीं कर सकते.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, पीठ ने कहा, ‘यह पूरी तरह से प्रक्रिया का दुरुपयोग है. जो व्यक्ति आरोपी है, वही सुरक्षा की मांग कर रहा है? वे (पुलिस) सक्षम हैं. उन पर भरोसा करें. आप एक संदिग्ध आरोपी हैं.’

लाइव लॉ के अनुसार, अदालत ने नफरत भरे भाषण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की कुमार की मांग को ‘पूरी तरह अनुचित’ और ‘दबाव बनाने की रणनीति’ बताया. कुमार ने यह याचिका अपने मित्र विजय रावत के साथ दायर की थी.

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट के पास जा सकता है. अदालत ने कहा, ‘उस उपाय का उपयोग करने के बजाय, एफआईआर दर्ज कराने के लिए याचिका दाखिल करना पूरी तरह अनुचित है, खासकर तब, जब एफआईआर की मांग करने वाला व्यक्ति स्वयं एक एफआईआर में आरोपी है.’ अदालत ने इसे जांच एजेंसी पर ‘दबाव डालने’ का एक तरीका बताया.

पीठ ने कुमार के अपनी सुरक्षा को लेकर खतरे के दावों पर भी सवाल उठाए.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने कहा, ‘क्या किसी ने आप पर हाथ उठाया है?’  यह जोड़ते हुए कि जांच के दौरान पुलिस उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम है.

अदालत ने कहा, ‘यह किस तरह की मांग है? क्या आप इस तरह की मांग कर सकते हैं? यह दबाव बनाने की एक रणनीति है. मैं याचिकाकर्ता पर भारी जुर्माना लगाते हुए इस याचिका को खारिज कर दूंगा. जब आप याचिका दाखिल करते हैं, तो आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि आप कौन हैं और याचिका में आपकी स्थिति क्या है. आपकी स्थिति एक संदिग्ध आरोपी की है. एक संदिग्ध आरोपी विभागीय जांच की मांग कर रहा है… एक संदिग्ध आरोपी सुरक्षा की मांग कर रहा है.’

ज्ञात हो कि यह मामला 26 जनवरी को कोटद्वार में हुई घटना से जुड़ा है, जहां कुमार – जो घटना के बाद से ‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से जाने जाते हैं – एक मुस्लिम दुकानदार पर अपनी दुकान का नाम बदलने का दबाव डाल रहे दक्षिणपंथी संगठनों बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के सदस्यों के सामने खड़े हुए थे.

घटना का एक वीडियो, जिसमें कुमार ने अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बताया था, वायरल हो गया था. इसके बाद कई एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें विहिप के सदस्यों द्वारा कुमार के खिलाफ दंगा और सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने जैसे आरोपों में एक एफआईआर शामिल है, और अन्य एफआईआर दुकानदार तथा स्वयं कुमार की शिकायतों के आधार पर दर्ज हुईं.

दोनों हिंदुत्व संगठनों के सदस्यों का सामना करने के कारण उन्हें बाद में जान से मारने की धमकियां मिलीं, जिसके चलते हाईकोर्ट ने कोटद्वार पुलिस से पूछा कि उसने अब तक मामले में क्या कार्रवाई की है.

द हिंदू ने 17 मार्च को बताया था कि अदालत ने घटना के बाद से कुमार को प्राप्त धनराशि का विवरण भी मांगा. गुरुवार को अदालत ने यह भी नोट किया कि कुमार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई से पहले ही उनकी शिकायतों पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी थीं.

कुमार की याचिका में पुलिस पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया गया था और ‘दोषी अधिकारियों’ के खिलाफ विभागीय जांच की मांग की गई थी. अदालत ने कहा कि इन आरोपों के समर्थन में कोई सामग्री रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं की गई है और जांच जारी है, इसलिए इस चरण पर ऐसे आरोप नहीं उठाए जा सकते.

सुनवाई के दौरान कुमार के वकील ने तर्क दिया कि उन्हें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से धमकियां मिली हैं, लेकिन राज्य ने कहा कि कोई खतरे की आशंका नहीं है और आवश्यक कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं.

हाईकोर्ट ने अंतिम आदेश पारित नहीं किया और मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया, साथ ही याचिकाकर्ता के वकील से कुछ पहलुओं की पुष्टि करने को कहा, जिनमें एफआईआर का विवरण और घटना के बाद कुमार को कथित रूप से प्राप्त धनराशि शामिल है.

उल्लेखनीय है कि घटना के बाद दीपक को धमकियां तो मिलीं ही, साथ ही उनके प्रति लोगों में सहानुभूति और चिंता की लहर भी देखने को मिली. हालांकि घटना के बाद कुमार को कोटद्वार में विरोधी भीड़ का भी सामना करना पड़ा, ऐसी ही एक भीड़ उनके जिम के बाहर जमा हो गई थी, जिसके कारण उन्हें अपने ग्राहक गंवाने पड़े.

6 मार्च की घटना से संबंधित पुलिस द्वारा दर्ज तीन एफआईआर में से एक उस भीड़ के खिलाफ है. पहली एफआईआर दुकानदार की शिकायत के आधार पर विहिप और बजरंग दल के सदस्यों के खिलाफ है. दूसरी एफआईआर विहिप के सदस्यों की शिकायत पर कुमार के खिलाफ दर्ज है, जिसमें उन पर ‘छीना-झपटी’ करने और सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने का आरोप लगाया गया है.