ईरानी राष्ट्रपति से दूसरी बातचीत में पीएम मोदी ने इमारतों पर हमलों की निंदा की, समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता पर ज़ोर

पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के बीच शनिवार को दूसरी सीधी बातचीत हुई. पीएम मोदी ने जहां बुनियादी ढांचों पर हो रहे हमलों की निंदा की, वहीं ईरान की ओर से ब्रिक्स देशों से आक्रामकता रोकने और क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शांति एवं स्थिरता की रक्षा में 'स्वतंत्र भूमिका' निभाने का आह्वान किया गया.

होर्मुज जलडमरूमध्य में 11 मार्च को कतार में खड़े तेल टैंकर और मालवाहक जहाज. (फोटो: एपी/पीटीआई)

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका-इज़रायल और ईरान की जंग के तीसरे सप्ताह में इज़रायल और ईरान द्वारा ऊर्जा संयंत्रों पर हमले किए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से फोन पर बातचीत की.

रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी ने क्षेत्र में अहम बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) पर हो रहे हमलों की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे हमले क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालते हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करते हैं. इसके साथ ही पीएम मोदी ने नेविगेशन की स्वतंत्रता और समुद्री व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित व खुला रखने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया.

इस संबंध में ट्विटर पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियान से बात की और ईद की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने आगे कहा कि दोनों पक्षों ने आशा व्यक्त की है कि त्योहार का यह मौसम पश्चिम एशिया में ‘शांति, स्थिरता और समृद्धि’ लेकर आएगा.

पीएम मोदी ने ‘ईरान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए ईरान के निरंतर समर्थन की सराहना’ भी की.

वहीं, ईरान द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, पेज़ेश्कियान ने युद्ध और व्यापक संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक शर्त, जो पहले से रखी गई है, अमेरिका और इज़रायल की ओर से हमले को तत्काल रोकने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि यह गारंटी भी होनी चाहिए कि भविष्य में अमेरिका और इज़रायल की तरफ से ईरान पर हमले नहीं किए जाएंगे.

ईरानी राष्ट्रपति ने पश्चिमी एशियाई देशों द्वारा ‘विदेशी हस्तक्षेप के बिना’ शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक ‘क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा’ स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा, जो खाड़ी में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति की ओर स्पष्ट इशारा था.

ब्रिक्स से ईरान के खिलाफ आक्रामकता को रोकने का आह्वान 

उन्होंने भारत की वर्तमान अध्यक्षता में उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह ब्रिक्स से ईरान के खिलाफ आक्रामकता को रोकने और क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शांति एवं स्थिरता की रक्षा में ‘स्वतंत्र भूमिका’ निभाने का आह्वान किया.

उल्लेखनीय है कि संघर्ष शुरू होने के बाद से पेज़ेश्कियान ने भारतीय नेताओं से बातचीत में ब्रिक्स का मुद्दा पहली बार नहीं उठाया है. 12 मार्च को हुई पिछली बातचीत में भी उन्होंने इसी तरह इस समूह से संकट से निपटने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया था.

भारत ने तब से संकेत दिया है कि ब्रिक्स के भीतर आंतरिक मतभेदों के कारण आम सहमति पर पहुंचना मुश्किल हो गया है.

17 मार्च को एक मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ब्रिक्स के कई सदस्य इसमें शामिल हैं.

विस्तारित ब्रिक्स समूह में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात दोनों शामिल हैं, जिन पर मौजूदा युद्ध के दौरान ईरानी मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए गए हैं.

उन्होंने आगे कहा, ‘इसी कारण से देशों द्वारा अपनाए गए रुख के बीच की खाई को पाटना मुश्किल रहा है. लेकिन हम सभी हितधारकों के साथ लगातार संपर्क में हैं.’

गैस और ऊर्जा आपूर्ति क्षेत्रों को निशाना बनाया गया

इस सप्ताह पूरे क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाकर किए गए हमलों के बढ़ते दौर के बाद मोदी ने पेज़ेशकियान से बात की. तनाव के इस नवीनतम चरण की शुरुआत तब हुई जब इज़रायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र को निशाना बनाया, जो देश की घरेलू ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

तेहरान ने सैन्य लक्ष्यों के अलावा खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाकर जवाब दिया.

ईरान की मिसाइलों ने कतर के रास लाफान औद्योगिक शहर को निशाना बनाया, जो दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यात केंद्र है. इसके अलावा सऊदी अरब, यूएई और कुवैत में स्थित संयंत्रों को भी निशाना बनाया गया.

इसका असर तुरंत महसूस किया गया, कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया, जिससे समुद्री यातायात और आपूर्ति श्रृंखलाओं में पहले से ही व्याप्त गतिरोध के कारण उत्पन्न संकट और भी गहरा गया.

वाशिंगटन में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इज़रायल ने संकेत दिया है कि वह ईरानी ऊर्जा अवसंरचना पर और हमले नहीं करेगा, साथ ही तेहरान को खाड़ी देशों में स्थित ठिकानों पर हमले जारी रखने के खिलाफ चेतावनी दी है.

इन घटनाक्रमों ने सप्ताह की शुरुआत में खाड़ी देशों के नेताओं के साथ मोदी की वार्ता की तात्कालिक पृष्ठभूमि तैयार की, जो युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय नेतृत्व द्वारा की गई फोन वार्ताओं का दूसरा दौर था.

रस लाफान पर हमले के बाद कतर से हुई बातचीत में मोदी ने कहा था कि भारत कतर के साथ एकजुटता से खड़ा है और क्षेत्र के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करता है. साथ ही उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध आवागमन के महत्व पर भी जोर दिया था.

संघर्ष शुरू होने के बाद से मोदी और पेज़ेश्कियान के बीच दूसरी सीधी बातचीत

मालूम हो कि शनिवार की यह बातचीत संघर्ष शुरू होने के बाद से मोदी और पेज़ेश्कियान के बीच दूसरी सीधी बातचीत थी.

इससे पहले 12 मार्च को हुई पहली बातचीत में मोदी ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और माल एवं ऊर्जा के निर्बाध आवागमन को लेकर चिंता जताई थी और संवाद एवं कूटनीति की आवश्यकता पर बल दिया था.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से भी बात की. उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि बातचीत में संघर्ष के नवीनतम घटनाक्रम और व्यापक क्षेत्र पर इसके प्रभावों पर चर्चा हुई. संघर्ष शुरू होने के बाद से यह उनकी पांचवीं बातचीत थी.

संघर्ष के शुरुआती दिनों से ही होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले जहाजों पर भारी दबाव बना हुआ है, क्योंकि ईरान ने जहाजों को वहां से न गुजरने की चेतावनी दी है और संकेत दिया है कि वह गुजरने की कोशिश करने वाले जहाजों पर हमला कर सकता है.

जहाजरानी संबंधी आंकड़ों की रिपोर्ट से पता चला है कि सैकड़ों टैंकर और अन्य जहाज खाड़ी में लंगर डाले खड़े हैं या जलडमरूमध्य के पास इंतजार कर रहे हैं, जबकि जलमार्ग से यातायात में भारी गिरावट आई है और कुछ जहाज केवल मंजूरी या सुरक्षित मार्ग की स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे बढ़ रहे हैं.

भारत में टैंकरों की आवाजाही इस बदलती स्थिति को दर्शाती है. पिछले सप्ताह, भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक, शिवालिक और नंदा देवी, होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर गए और अब भारत की ओर आ रहे हैं.

जहाजरानी मंत्रालय के अनुसार, दोनों जहाज लगभग 46,000 मीट्रिक टन खाना पकाने की गैस ले जा रहे थे, जो कुल मिलाकर 92,000 मीट्रिक टन से अधिक है.

इसी बीच, बड़ी संख्या में जहाज फंसे हुए हैं. अधिकारियों ने बताया कि 600 से अधिक चालक दल वाले 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज जलडमरूमध्य के पश्चिमी किनारे पर तैनात हैं और आगे बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं. इनमें एलपीजी वाहक, कच्चे तेल के टैंकर और अन्य मालवाहक जहाज शामिल हैं.

दो भारतीय एलपीजी वाहक, पाइन गैस और जग वसंत, शारजाह के पास लंगर डाले हुए हैं और यात्रा में विराम के बाद रवाना होने की तैयारी कर रहे हैं. सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि वे जल्द ही रवाना हो सकते हैं.

कच्चे तेल के टैंकरों की आवाजाही में भारी गिरावट

इसके उलट कच्चे तेल के टैंकरों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है और पिछले 24 घंटों में कोई भी कच्चा तेल टैंकर जलडमरूमध्य से नहीं गुजरा है.

यह धीमी गति से होने वाली आवाजाही एक नियंत्रित और अनिश्चित आवागमन व्यवस्था को दर्शाती है.

ब्लूमबर्ग के अनुसार, ईरानी नौसेना ने राजनयिक बातचीत के बाद कुछ मामलों में पूर्व-अनुमोदित मार्गों से जलडमरूमध्य से जहाजों को निर्देशित किया है.

एक अज्ञात चालक दल के सदस्य का हवाला देते हुए, रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले सप्ताह जलडमरूमध्य से गुजरने वाला एक भारतीय एलपीजी टैंकर ईरानी अधिकारियों के साथ रेडियो संपर्क में रहा, जिन्होंने उसके विवरण की पुष्टि की और उसे निर्धारित मार्ग पर निर्देशित किया.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पिछले सप्ताह संकेत दिया था कि यह गतिविधि तेहरान के साथ चल रही बातचीत का परिणाम है. एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि भारत के प्रयासों के परिणाम दिखने लगे हैं और ‘मेरी बातचीत से कुछ नतीजे निकले हैं’ तथा ईरान के साथ हुई बातचीत के कारण भारतीय ध्वज वाले जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति मिल गई है.

उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक आवाजाही को व्यक्तिगत रूप से संभाला जा रहा है, कोई ‘एकमुश्त व्यवस्था’ नहीं है, और कई जहाजों को मंजूरी मिलने का इंतजार है, इसलिए बातचीत जारी है.

ज्ञात हो कि भारत अपने कच्चे तेल का 90% से अधिक आयात करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. आयात की व्यापकता और सीमित भंडारण क्षमता को देखते हुए एलपीजी की आपूर्ति विशेष रूप से संवेदनशील है. भारत के गैस आयात का 41% से अधिक हिस्सा कतर से आता है.

आपूर्ति की बिगड़ती स्थिति ने भारत को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करने के लिए मजबूर कर दिया है. गैस का प्राथमिक स्रोत बंद हो जाने के चलते भारत पहले से ही अन्य देशों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर रुख कर रहा है.

इस बीच रॉयटर्स ने बताया कि अमेरिकी सरकार द्वारा समुद्र में मौजूद तेल पर 30 दिनों के लिए प्रतिबंध हटाए जाने के बाद भारतीय रिफाइनरियां ईरानी कच्चे तेल की खरीद फिर से शुरू करने की तैयारी कर रही हैं. सरकार से मंजूरी और नीतिगत दिशा-निर्देश मिलने की उम्मीद है.

अनुमानों के अनुसार, लगभग 17 करोड़ बैरल ईरानी कच्चा तेल समुद्र में जहाजों पर मौजूद है. अपेक्षाकृत कम भंडार रखने वाली भारतीय रिफाइनरियां भी इन आपूर्तियों को हासिल करने की कोशिश कर रही हैं.