ईरान पर अमेरिका-इज़रायल हमले का 24वां दिन: ट्रंप की ‘पावर प्लांट तबाह’ करने की धमकी, भारत में पीएनजी पर ज़ोर

ईरान पर अमेरिकी-इज़रायली हमलों के बाद शुरू हुआ युद्ध चौथे हफ्ते में पहुंच गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने लगा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (समुद्री मार्ग) पर बढ़े तनाव के बीच भारत में एलपीजी आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है और सरकार वैकल्पिक व्यवस्था पर ज़ोर दे रही है.

संयुक्त अरब अमीरात के पास अरब सागर (अरबियन गल्फ) से होते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (समुद्री मार्ग) की ओर बढ़ता वाहनों से लदा एक कार्गो जहाज़. (फोटो: एपी/22 मार्च 2026)

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है और इसके असर अब भारत तक महसूस किए जा रहे हैं. एलपीजी आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच वैश्विक तनाव और गहरा गया है. इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी है कि यदि उसने 48 घंटे के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (समुद्री मार्ग) पूरी तरह नहीं खोला, तो अमेरिका उसके पावर प्लांट्स ‘तबाह’ कर देगा. इसके जवाब में ईरान ने कहा है कि किसी भी हमले का जवाब वह अमेरिकी और इजरायली ऊर्जा एवं बुनियादी ढांचे पर हमलों से देगा.

अमेरिका और इज़रायल द्वारा शुरू किए गए इस युद्ध में अब तक भारी जनहानि हुई है. ईरान में 1,500 से अधिक, लेबनान में 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इज़रायल में 15 और अमेरिका के 13 सैन्यकर्मी भी मारे गए हैं. खाड़ी क्षेत्र में भी नागरिक हताहत हुए हैं, जबकि ईरान और लेबनान में लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं.

भारत में असर: ‘पीएनजी अपनाएं’ का सरकारी सुझाव

भारत में एलपीजी संकट की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने मंत्रालयों और सरकारी संस्थानों से पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की मांग का आकलन करने और इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने को कहा है.

रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकारी दफ्तरों, आवासीय परिसरों और कैंटीनों को पीएनजी अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जबकि सिटी गैस वितरण कंपनियों को नेटवर्क विस्तार के लिए समर्थन दिया जा रहा है.

मोदी ने की सुरक्षा मामलों की बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता की. उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि बैठक में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, आयात के स्रोतों में विविधता लाने और नए निर्यात बाजार तलाशने जैसे अल्प, मध्यम और दीर्घकालिक उपायों पर चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि सरकार इस संघर्ष के असर से नागरिकों को बचाने के लिए प्रतिबद्ध है.

परमाणु ठिकानों पर हमले से बढ़ी चिंता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के प्रमुख ने कहा है कि युद्ध ‘खतरनाक मोड़’ पर पहुंच गया है. ईरान के नतांज़ परमाणु संयंत्र और इज़रायल के परमाणु अनुसंधान केंद्र के पास डिमोना शहर में हमलों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है. उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है.

लेबनान में तबाही, बच्चों और महिलाओं की मौत

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक 1,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 118 बच्चे और 79 महिलाएं शामिल हैं. करीब 2,800 लोग घायल हुए हैं.

संयुक्त राष्ट्र में ईरान की अपील

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि आक्रामक हमलों को तुरंत रोका जाए और नुकसान की भरपाई कराई जाए. उन्होंने यह भी मांग की कि इज़रायल अपने परमाणु ठिकानों को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में लाए.

हालांकि, सुरक्षा परिषद में पारित प्रस्ताव में केवल ईरान के जवाबी हमलों की निंदा की गई, जबकि युद्ध की शुरुआत करने वाले हमलों का उल्लेख नहीं किया गया.

फ्रांस की चेतावनी

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो ने सऊदी क्राउन प्रिंस से बातचीत के बाद चेतावनी दी कि हालात ‘बेकाबू’ हो सकते हैं. उन्होंने ऊर्जा और नागरिक ढांचे पर हमलों पर रोक लगाने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने की अपील की है.

पश्चिम एशिया में यह युद्ध अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि इसके वैश्विक आर्थिक, ऊर्जा और मानवीय प्रभाव सामने आने लगे हैं. भारत जैसे देशों के लिए भी यह स्थिति ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति शृंखला के लिहाज से गंभीर चुनौती बनती जा रही है.