नई दिल्ली: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने गुरुवार (26 मार्च) को कहा कि अगर आगामी विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा सरकार फिर से सत्ता में आती है, तो वह पांच लाख बीघा ज़मीन से ‘कब्ज़ा’ करने वालों को बेदखल कर देगी.
स्थानीय खबरों के अनुसार, बजाली विधानसभा क्षेत्र में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए शर्मा ने कहा कि पिछले पांच सालों में कब्ज़ा करने वालों को सबक सिखाया गया है, और मूल समुदायों पर उनका दबदबा काफी कम हो गया है.
उन्होंने कहा, ‘पिछले पांच सालों में हमने 1.5 लाख बीघा ज़मीन खाली करवाई, लेकिन अगले पांच सालों के लिए हमारा लक्ष्य कब्ज़ाई गई पांच लाख बीघा सरकारी ज़मीन को खाली करवाना होगा.’
शर्मा ने ज़ोर देकर कहा कि असम में ज़मीन पर सिर्फ़ मूल लोगों का ही अधिकार होगा. उन्होंने आगे कहा, ‘भाजपा ‘जाति, माटी और भेटी’ (लोग, ज़मीन और बुनियाद) की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, और हम किसी को भी इसके खिलाफ काम नहीं करने देंगे. अवैध प्रवासियों से सख्ती से निपटना मूल आबादी के अस्तित्व के लिए ज़रूरी है, और हम इस पर कोई समझौता नहीं करेंगे.’
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने दावा किया, ‘असम में लगभग 50 लाख बीघा जमीन पर अवैध अतिक्रमण है. अगली सरकार बनने के बाद हम और 5 लाख बीघा जमीन को खाली कराएंगे. हम प्रभावशाली लोगों से भी जमीन वापस लेंगे और उसे गरीबों में बांटेंगे.’
मालूम हो कि जुलाई 2025 में धुबरी ज़िला प्रशासन ने ज़िले के बिलाशीपारा में असम सरकार द्वारा प्रस्तावित 3,400 मेगावाट के थर्मल पवार प्लांट स्थल पर 2,000 से ज़्यादा मिया मुसलमानों के घरों को गिरा दिया था.
राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2016 में जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता में आई थी, से लेकर अगस्त 2025 तक, 15,270 परिवारों – जिनमें से अधिकांश मुस्लिम हैं – को सरकारी ज़मीन से बेदखल किया गया है. 2016 से अब तक की गई बेदखली के दौरान कम से कम आठ मुसलमानों की गोली मारकर हत्या की गई है.
अपने संबोधन में आगे कांग्रेस पार्टी के ‘बोर असम’ (ग्रेटर असम) के विज़न पर निशाना साधते हुए शर्मा ने असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई पर तीखा वैचारिक हमला बोला.
उन्होंने आरोप लगाया, ‘वर्तमान स्थिति में असम में कांग्रेस लगभग खत्म हो चुकी है. गौरव गोगोई ने ग्रेटर असम की बात की, लेकिन उनके विज़न में महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव और माधवदेव का स्थान नहीं है, जबकि अज़ान फकीर शामिल हैं. वह बांग्लादेश मूल के मिया लोगों को शामिल करते हुए ग्रेटर असम बनाने की योजना बना रहे हैं.’
अपने मजबूत जनाधार को लेकर आश्वस्त शर्मा ने जालुकबारी विधानसभा क्षेत्र के बारे में भी बात की, जहां से वह फिर से चुनाव लड़ रहे हैं.
विधानसभा चुनाव से पहले हिमंता बिस्वा शर्मा ने बारपेटा में एक चुनावी सभा के दौरान विपक्षी नेताओं पर तीखा हमला किया. मीडिया से बातचीत में शर्मा ने असम जातीय परिषद (एजेपी) के नेता लुरिनज्योति गोगोई पर तंज कसते हुए उनके राजनीतिक इरादों पर सवाल उठाए.
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘लुरिनज्योति आगामी चुनाव सिर्फ इसलिए लड़ रहे हैं ताकि जल्द शादी कर सकें. उनका घोषणापत्र है – लोगों, मैं अब शादी की उम्र में आ गया हूं, मुझे शादी करनी है, लेकिन जब तक मैं विधायक नहीं बनूंगा, कोई मुझसे शादी नहीं करेगा.’
उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे यह भी नहीं पता कि जालुकबारी में मेरे खिलाफ विपक्ष ने किसे उम्मीदवार बनाया है. भाजपा कार्यकर्ता मेरे लिए प्रचार कर रहे हैं. पिछली बार मुझे 74 प्रतिशत वोट मिले थे और इस बार मुझे 85-90 प्रतिशत समर्थन की उम्मीद है.’
पार्टी के चुनावी रोडमैप पर मुख्यमंत्री ने एक विस्तृत घोषणापत्र का संकेत दिया.
उन्होंने कहा, ‘हमारे घोषणापत्र में 31 वादे शामिल होंगे. शीर्ष पांच प्रतिबद्धताओं को पहले ही चुनावी सभाओं में बताया जा चुका है. पूरी सूची जल्द जारी की जाएगी.’
‘नतुन बोर असोम’ नारा, मूल निवासियों के बजाय ‘मियों’ को फ़ायदा पहुंचाने की साज़िश: असम भाजपा प्रमुख
वहीं असम भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने गुरुवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस का ‘नतुन बोर असोम’ (नया ग्रेटर असम) का नारा एक ‘खतरनाक साज़िश’ है, जिसका मकसद मूल निवासियों के हकों की कीमत पर ‘मियों’ के हकों की रक्षा करना है.
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी राज्य और उसके लोगों की सुरक्षा के लिए प्रत्यक्ष और परोक्ष – दोनों तरह के कदम उठा रही है, और इन प्रयासों को नए मतदाताओं तक पहुंचाया जाएगा.
सैकिया ने यह भी कहा कि वर्तमान स्वरूप में अपडेट अंतिम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) भाजपा को स्वीकार्य नहीं है, और यदि 9 अप्रैल के राज्य चुनावों के बाद पार्टी फिर सत्ता में आती है, तो इसमें सुधार किया जाएगा.
पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस के ‘नतुन बोर असम’ नारे के पीछे एक बड़ी साजिश है. यह ‘बोर असम’ ऐसा होगा जहां मिया लोगों के अधिकार भविष्य के लिए सुरक्षित किए जाएंगे. वे कह रहे हैं कि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई जमीन वापस दी जाएगी – वन भूमि और हमारे धार्मिक स्थलों की जमीन भी लौटाई जाएगी. यह तुष्टिकरण की राजनीति का कांग्रेस का खाका है, जो स्थानीय लोगों के खिलाफ उनकी नीति और रुख को दर्शाता है.’
‘मिया’ शब्द मूल रूप से असम में बांग्ला-भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अपमानजनक शब्द है, और इसका इस्तेमाल बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों के लिए किया जाता है.
असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव 9 अप्रैल को होंगे और वोटों की गिनती 4 मई को होगी.
