यूजीसी की सिफ़ारिश के बाद शिक्षा मंत्रालय ने एनसीईआरटी को डीम्ड यूनिवर्सिटी घोषित किया

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन में बताया गया है कि इस वर्ष जनवरी में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विशेषज्ञ समिति की उन सिफ़ारिशों को मंज़ूरी दी थी, जिनमें एनसीईआरटी को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा देने की वकालत की गई थी.

(फोटो साभार: एक्स/@ncert)

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा 30 मार्च को जारी एक अधिसूचना में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को डीम्ड विश्वविद्यालय घोषित कर दिया गया है.

द हिंदू ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने के बाद एनसीईआरटी अब पाठ्यक्रम/कार्यक्रम संचालित करने और डिग्री प्रदान करने में सक्षम होगा.

मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, इस वर्ष जनवरी में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विशेषज्ञ समिति की उन सिफारिशों को मंजूरी दी थी, जिनमें एनसीईआरटी को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा देने की वकालत की गई थी.

शिक्षा मंत्रालय की ताज़ा जारी अधिसूचना में जानकारी दी गई है कि एनसीईआरटी और उसके छह क्षेत्रीय संस्थानों को कुछ शर्तों के पूरा होने पर डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है.

इन संस्थानों में रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशन, अजमेर (राजस्थान), रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशन, भोपाल (मध्य प्रदेश), रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशन, भुवनेश्वर (ओडिशा), रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशन, मैसूर (कर्नाटक), नॉर्थ ईस्ट रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशन, शिलांग (मेघालय) और पंडित सुंदरलाल शर्मा सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन, भोपाल (मध्य प्रदेश) शामिल हैं.

अब तक ये संस्थान पांच अलग-अलग राज्यों में संचालित होते थे और भोपाल के बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, अजमेर के एमडीएस विश्वविद्यालय, मैसूर विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर के उत्कल विश्वविद्यालय और शिलांग के उत्तर-पूर्वी पहाड़ी विश्वविद्यालय जैसी यूनिवर्सिटीज से संबद्ध थे. ऐसे में नए पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए उन्हें अपने मूल विश्वविद्यालयों से अनुमति लेनी पड़ती थी, लेकिन अब ये जरूरत खत्म हो गई है.

इन शर्तों के तहत एनसीईआरटी को किसी भी प्रकार की व्यावसायिक और लाभ कमाने वाली गतिविधियों में शामिल होने से रोका गया है. साथ ही यह अनिवार्य है कि सभी शैक्षणिक पाठ्यक्रम और कार्यक्रम यूजीसी और संबंधित वैधानिक निकायों या परिषदों द्वारा निर्धारित मानदंडों और मानकों के अनुरूप हों.

इसके अनुसार, एनसीईआरटी को ऑफ-कैंपस केंद्र या ऑफशोर कैंपस में नए कार्यक्रम शुरू करने की अनुमति दी गई है, लेकिन ‘केवल यूजीसी द्वारा समय-समय पर जारी किए गए मानदंडों और दिशानिर्देशों के अनुसार ही.’

मंत्रालय ने यह भी कहा है कि एनसीईआरटी को अनुसंधान कार्यक्रम, डॉक्टरेट कार्यक्रम और ‘नवीन शैक्षणिक कार्यक्रम’ शुरू करने के लिए ‘उचित कदम उठाने होंगे.’

इसमें यह भी कहा गया है कि एनसीईआरटी को वर्तमान में उभरते नए क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यूजीसी के दिशानिर्देशों और विनियमों तथा 2020 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार करने का प्रयास करना चाहिए.

अब जब इसे डीम्ड विश्वविद्यालय घोषित कर दिया गया है, तो सरकार ने एनसीईआरटी को राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क द्वारा जारी संस्थानों की वार्षिक रैंकिंग में भाग लेना अनिवार्य कर दिया है और उसे अपने छात्रों की पहचान के रूप में अकादमिक क्रेडिट बैंक (एबीसी) बनाना ‘अनिवार्य’ कर दिया है.

एनसीईआरटी को छात्रों के क्रेडिट स्कोर को डिजिटल लॉकर में अपलोड करने के लिए भी कहा गया है, जिसे एबीसी पोर्टल पर प्रदर्शित किया जा सकता है.