नई दिल्ली: भारत के सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में प्रस्तावित संशोधनों के तहत समाचार और समसामयिक मामलों से संबंधित जानकारी के मामले में कम्युनिटी नोट्स, जो सोशल मीडिया मंच एक्स पर यूजर्स आधारित फैक्ट चेक टूल है, को आधिकारिक तौर पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय के नियामक दायरे में लाया जाएगा. इससे सरकार को आधिकारिक दावों को सही करने वाली सामग्री को हटाने की मांग करने का अधिकार मिल जाएगा.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नाम न छापने की शर्त पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक अधिकारी ने अखबार को बताया कि जब कोई कम्युनिटी नोट समाचार, राजनीति या सार्वजनिक नीति से संबंधित प्रतीत होता है, तो विस्तारित ढांचे के तहत उसकी जांच की जा सकती है.
इस पर जब अधिकारी से पूछा गया कि क्या किसी मंत्री के दावे को सही करने या किसी नीतिगत मुद्दे को संदर्भ देने वाले कम्युनिटी नोट्स इस श्रेणी में आएंगे, तो जवाब में अधिकारी ने कहा, ‘यह प्रत्येक मामले के तथ्यों पर निर्भर करता है. लेकिन ऐसा संभव है.’
मालूम हो कि 30 मार्च को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में संशोधन प्रकाशित किए थे, जिसके तहत ऑनलाइन सामग्री के एक भाग III को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन लाया गया है.
इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा सोशल मीडिया पर यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई सामग्री को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के दायरे में लाना है, जिसमें इंफ्लुएंसर और यहां तक कि सामग्री को दोबारा शेयर करने वाले सामान्य यूजर्स भी शामिल हैं. वर्तमान में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का कार्यक्षेत्र समाचार प्रकाशकों और ऑनलाइन क्यूरेटेड सामग्री तक सीमित है.
ध्यान रहे कि इस प्रस्तावित विस्तार से मंत्रालय को उस श्रेणी की सामग्री पर औपचारिक अधिकार प्राप्त होगा जिसे वह वर्तमान में विनियमित नहीं करता है.
भाजपा नेताओं और मंत्रियों द्वारा की गई कई पोस्टों पर कम्युनिटी नोट्स
कंपनी में इस मामले से अवगत लोगों के अनुसार, ‘इस साल की शुरुआत में एक्स पर भाजपा नेताओं और मंत्रियों द्वारा की गई कई पोस्टों पर कम्युनिटी नोट्स देखे गए, जिन्हें सरकार ने प्लेटफॉर्म को सूचित किया.
इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की पोस्ट शामिल थीं. कुछ विशेष पोस्टों के नीचे दिए गए कम्युनिटी नोट अब प्लेटफॉर्म से हटा दिए गए हैं.
14 फरवरी को एक व्यापार शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी के भाषण के वीडियो के नीचे एक कम्युनिटी नोट पोस्ट की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए सामाजिक न्याय संबंधी सरकारी नीतियां संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन करती हैं. इस टिप्पणी को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है.
इसी तरह भाजपा के आधिकारिक अकाउंट पर गृह मंत्री अमित शाह के घुसपैठियों के निर्वासन संबंधी बयान के नीचे एक नोट पोस्ट किया गया था, जिसमें असम में इस मुद्दे पर सरकार के अपने रिकॉर्ड का हवाला दिया गया था. यह टिप्पणी भी बीच-बीच में दिखाई देती है और गायब हो जाती है.
हालांकि, आधिकारिक पोस्ट्स पर मौजूद सभी नोट्स हटाए नहीं गए हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की 28 जनवरी की पोस्ट के नीचे मौजूद एक नोट, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि राष्ट्राध्यक्ष के रूप में वे संवैधानिक रूप से सभी नागरिकों की सेवा करने के लिए बाध्य हैं, न कि किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र की, अभी भी प्लेटफ़ॉर्म पर दिखाई दे रही है.
अपनी मूल पोस्ट में राष्ट्रपति ने कहा था कि सरकार हाशिए पर पड़े और कमजोर समुदायों के लिए काम करती है.
इस विस्तारित ढांचे के तहत यदि सरकार किसी नोट को गैरकानूनी घोषित करती है, तो प्रक्रिया मानक तरीके से आगे बढ़ेगी. इसके तहत प्लेटफ़ॉर्म को नोट हटाने या अवरुद्ध करने का निर्देश भेजा जाएगा, जिसमें निर्धारित समय के भीतर उसे हटाने या पहुंच को अक्षम करने की आवश्यकता होगी.
इस मामले में कई सवाल उठते हैं: पहला सवाल जवाबदेही का है, क्योंकि कम्युनिटी नोट किसी एक यूजर द्वारा नहीं बल्कि कई यूजर्स के सामूहिक योगदान से तैयार की जाती है.
इस संबंध में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारी ने आगे कहा, ‘इसका निर्धारण अदालत में इस आधार पर किया जाएगा कि इसमें किन-किन लोगों ने योगदान दिया है. और अगर एक्स की संपादन प्रक्रिया में कोई भूमिका है, तो उनकी भी जवाबदेही बनती है.’
नोट में योगदान देने वाले उपयोगकर्ताओं और प्लेटफ़ॉर्म दोनों को मामले के आधार पर जांच का सामना करना पड़ सकता है.
दूसरा मुद्दा यह है कि क्या मंत्रालय इसे विनियमित कर सकता है. कम्युनिटी नोट्स पूरी तरह से यूजर्स द्वारा बनाए जाते हैं और सोशल मीडिया मध्यस्थों पर होस्ट किए जाते हैं.
इस सप्ताह प्रस्तावित बदलाव पर परामर्श में भाग लेने वाले इंडस्ट्री और नागरिक समाज समूहों ने विरोध जताया, और मध्यस्थों ने मंत्रालय के निर्देशों के अधीन प्रावधानों के तहत अपने शामिल होने पर सवाल उठाए.
सरकार ने हितधारकों को बताया कि मध्यस्थों को शामिल करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वे ऐसी सामग्री तक पहुंच बिंदु के रूप में कार्य करें और यूजर की पहचान करने में मदद कर सकें.
विस्तार का दायरा ठीक से निर्धारित नहीं
इस संबंध में नीति विशेषज्ञों का कहना है कि इस विस्तार का दायरा ठीक से निर्धारित नहीं किया गया है.
इंडियन गवर्नेंस एंड पॉलिसी प्रोजेक्ट (आईजीपी) के पार्टनर ध्रुव गर्ग ने कहा, ‘आईटी नियमों के भाग III के दायरे का प्रस्तावित विस्तार इतना व्यापक प्रतीत होता है कि यह समसामयिक मामलों और समाचारों से मिलती-जुलती सामग्री के मध्यस्थ-आधारित, कम्युनिटी ड्रिवेन स्वरूपों को भी अपने दायरे में ले लेगा.’
उन्होंने आगे कहा, ‘इससे विकीपीडिया या एक्स के कम्युनिटी नोट्स जैसी जगहों के लिए प्रश्नचिह्न लग सकते हैं, जहां सामग्री सामूहिक रूप से निरंतर रूप से आकार लेती है, न कि किसी एक यूजर या स्वयं प्लेटफ़ॉर्म द्वारा नियंत्रित होती है.’
ध्रुव गर्ग के अनुसार, यह व्याख्या सरकार के स्वयं के विवरण के बिल्कुल विपरीत है.
उल्लेखनीय है कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय के हितधारकों के साथ परामर्श के बाद मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने प्रस्तावित परिवर्तनों को मुख्य रूप से प्रक्रियात्मक बताया था.
उन्होंने कहा था, ‘ये संशोधन हमें किसी भी तरह से व्यापक शक्तियां नहीं देते… ये केवल स्पष्टीकरण और आकस्मिक प्रकृति के हैं.’
इस संबंध में गर्ग ने कहा कि मंत्रालय को अपना इरादा स्पष्ट करना चाहिए.
गौरतलब है कि अप्रैल 2024 में एक्स ने भारत में कम्युनिटी नोट्स का विस्तार किया था, जिससे भारत के यूजर्स योगदानकर्ता के रूप में जुड़ सकते हैं. इसमें केवल विविध दृष्टिकोणों वाले लोगों द्वारा उपयोगी माने गए नोट्स ही पोस्ट के नीचे दिखाई देते हैं.
एक्स का कहना है कि वह नोट्स को तब तक नियंत्रित नहीं करता जब तक कि वे प्लेटफ़ॉर्म के नियमों का उल्लंघन न करें. प्रस्तावित ढांचे के तहत इस स्थिति की परीक्षा हो सकती है.
ज्ञात हो कि प्रस्तावित परिवर्तनों पर जनता और हितधारकों से सुझाव प्राप्त करने की अंतिम तारीख 14 अप्रैल थी. लेकिन अखबार को मिली जानकारी के अनुसार उद्योग और अन्य हितधारकों के दबाव के बाद इस समय सीमा को दो सप्ताह तक बढ़ाए जाने की संभावना है.
एक्स के अलावा मेटा ने कहा है कि वह अपने अन्य सोशल मीडिया मंच – फेसबुक, इंस्टाग्राम और थ्रेड्स – के लिए कम्युनिटी नोट्स शुरू करने की योजना बना रहा है, हालांकि यह सुविधा वर्तमान में केवल संयुक्त राज्य अमेरिका में उपलब्ध है, और भारत के लिए इसकी कोई निश्चित समयसीमा नहीं है.
