नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के वृंदावन में शुक्रवार (10 अप्रैल) दोपहर यमुना नदी में पर्यटकों को ले जा रही एक नाव पलट गई, जिससे कम से कम दस लोगों की मौत हो गई और पांच अन्य लापता हो गए हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि यह दुर्घटना बांकेबिहारी मंदिर से ढाई किलोमीटर दूर स्थित केशी घाट के पास हुई, जब दो दर्जन से अधिक पर्यटकों को ले जा रही एक नाव गहरे पानी में एक तैरते हुए पोंटून (अस्थाई पुल) से टकरा गई.
अधिकारियों के अनुसार, बढ़ते जलस्तर के कारण हाल ही में उस क्षेत्र में एक पोंटून पुल को हटा दिया गया था, जिससे कुछ पोंटून ड्रम नदी में रह गए थे, जिनमें से एक से नाव टकरा गई. नाव में मुख्य रूप से पंजाब के लुधियाना, मुक्तसर, जगरांव और हरियाणा के हिसार के कुछ तीर्थयात्री सवार थे. जिस नाव के साथ यह हादसा हुआ उसमें कुल 37 लोग सवार थे, जिसमें से अब तक कुल दस लोगों के शव बरामद किए गए हैं, जबकि पांच लोग लापता बताए जा रहे हैं.
वहीं, नाव पर सवार 22 पर्यटकों को बचा लिया गया है, जिनमें से आठ अस्पताल में भर्ती हैं.
इस घटना के संबंध में आगरा रेंज के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) शैलेश पांडे ने बताया कि शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे मथुरा जिले के वृंदावन में केशी घाट के पास हुई एक नाव दुर्घटना में कम से कम 10 लोगों की डूबने से मौत हो गई है.
शैलेश पांडे ने जानकारी दी कि पंजाब के लुधियाना जिले से आए 30 पर्यटकों के एक समूह ने यमुना नदी में नौका विहार के लिए वृंदावन के केसी घाट पर दो नाव किराए पर ली थी. प्रथमदृष्टया ऐसा लगता है कि यमुना नदी पर बने अस्थाई पुल से टकराने के बाद एक नाव अनियंत्रित होकर अपना संतुलन खो बैठी.
उन्होंने आगे बताया कि इस हादसे का पूरा सच उचित जांच के बाद ही सामने आएगा.
इस घटना के मृतकों में अधिकतर लोग लुधियाना के जगरांव कस्बे के थे. मरने वालों की पहचान जगरांव की कविता रानी और उनके बेटे मधुर बहल (कविता के पति विजय बच गए), जगरांव के ही चरणजीत और उनकी पत्नी पिंकी, लुधियाना के दुगरी के राकेश गुलाटी और उनकी पत्नी अंजू, मोगा की सपना हंस, जगरांव के ईशान कटारिया, हिसार (हरियाणा) की आशा रानी, लुधियाना की मीनू बंसल के तौर पर हुई है.
मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, नाव पलटने के बाद आसपास के लोगों के शोर मचाने पर स्थानीय गोताखोरों ने यमुना में छलांग लगाकर डूब रहे लोगों को बचाने का काम शुरू किया. सूचना मिलने पर पुलिस के साथ पीएसी के गोताखोर भी पहुंचे, जिससे 22 लोगों को बचाया जा सका.
डीआईजी ने बताया कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीमों को बुलाया गया और बचाव अभियान में सहायता के लिए मथुरा स्थित सेना स्टेशन से भी मदद मांगी गई.
उन्होंने कहा, ‘हमने गोताखोरों को तैनात किया है. वे बचाव कार्य के लिए तैनात 100 सदस्यीय दल का हिस्सा हैं. अग्निशमन, पुलिस और प्रशासन की टीमें लापता लोगों की तलाश में नावों के साथ मौके पर मौजूद हैं.’
मथुरा के जिला मजिस्ट्रेट चंद्र प्रकाश सिंह घाट पर बचाव अभियान की निगरानी कर रहे थे और उन्होंने बताया कि बचाए गए लोगों को वृंदावन के रामकृष्ण मिशन अस्पताल भेजा गया है, जबकि अन्य अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है.
इस हादसे से कुछ देर पहले का एक कथित वीडियो, जो अब व्यापक रूप से प्रसारित हो रहा है, में तीर्थयात्री ताली बजाते और ‘राधे राधे’ बोलते नजर आ रहे हैं.
इन दृश्यों ने सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएं भी पैदा कर दी हैं, क्योंकि वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि मोटर चालित नाव में सवार किसी भी यात्री ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी हुई थी, और कुछ बचे हुए लोगों ने आरोप लगाया कि नाव में उसकी क्षमता से कहीं अधिक लोग भरे हुए थे.
सुरक्षा मानकों से समझौता
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए जगरांव के रहने वाले और इस हादसे के चश्मदीद 32 साल के श्वेत जैन ने कहा कि वह और उनकी मां रेखा जैन (50 साल) नाव में थे, जब वह अचानक एक पोंटून ड्रम से टकरा गई. श्वेत को पसलियों में गंभीर चोटें आईं, जबकि उनकी मां रेखा अब वृंदावन के राम मिशन हॉस्पिटल के आईसीयू में गंभीर स्थिति में हैं.
श्वेत ने आगे बताया, ‘मेरी मां वृंदावन जाना चाहती थीं क्योंकि मेरी बहन की हाल ही में शादी हुई है. आज वह आईसीयू में ज़िंदगी और मौत से जूझ रही हैं. डॉक्टरों का कहना है कि वह वेंटिलेटर पर हैं. उनके फेफड़ों में पानी चला गया है.’
श्वेत ने हादसे के बारे में बताते हुए कहा, ’30-32 तीर्थयात्रियों के एक ग्रुप ने बोटिंग करने का सोचा, दो नावें थीं. उन्होंने 8-10 लोगों को दूसरी नाव में शिफ्ट किया और हम 20-22 लोग एक नाव में थे. कोई सेफ्टी इंतज़ाम नहीं थे. नाविक नाव से पोंटून ड्रम को धकेलने की कोशिश कर रहा था. यह उसकी भी उतनी ही गलती थी. मेरी मां और मुझे अलग-अलग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. हमारे फोन पानी में खराब हो गए हैं और मैंने अभी नया फोन खरीदा है. यहां तक कि जिस हॉस्पिटल में मेरी मां भर्ती हैं, वहां के अधिकारी भी पैसे मांग रहे हैं.’
इस हादसे में जान गंवाने वाले कई अन्य तीर्थयात्री जगरांव की गीता कॉलोनी से थे. इन तीर्थयात्रियों में से एक 45 वर्षीय सोनू कुमार ने कहा, ‘हम सुबह करीब 11 बजे एक होटल में रुके. मैं एक होटल में था जबकि कुछ और लोग मंदिर घूमने गए थे और 30-32 लोग बोटिंग करने गए थे. मैं बोटिंग करने नहीं गया था लेकिन चश्मदीदों ने बताया कि नाविक ने नाव को तैरते हुए पोंटून से टकरा दिया और वह पलट गई.’
जगरांव की गीता कॉलोनी के रहने वाले विजय नाव हादसे में ज़िंदा बचे लोगों में शामिल हैं. उन्होंने अपनी पत्नी और बेटे को खो दिया है. विजय के मुताबिक, गुरुवार सुबह करीब 30-32 श्रद्धालुओं का एक ग्रुप देवराहा बाबा की समाधि पर माथा टेकने के लिए निकला और यमुना पार करने के लिए नाव ली. बड़ी नाव में बीच में खराबी आ गई, जिसके बाद यात्रियों को छोटी नावों में ले जाया गया. उसी समय नदी में तैर रहा एक अस्थाई पंटून पुल पानी के बहाव के साथ हिलने लगा.
विजय ने कहा, ‘कुछ ही सेकेंड में पुल हमारी नाव पर तूफ़ान की तरह आ गिरा. नाव पलट गई और लोग मदद के लिए चिल्लाने लगे.’
पीड़ितों में से एक ईशान कटारिया के दादा पवन कुमार कटारिया ने कहा कि उनका पोता सिर्फ़ 25 साल का था और उसकी शादी नहीं हुई थी.
वहीं, इस हादसे में ज़िंदा बचे एक युवा ने बताया, ‘हमने नाविक से दो-तीन बार धीरे चलने को कहा, हवा तेज थी, और नाव बहुत तेज चल रही थी. लेकिन उसने एक नहीं सुनी.’
उनके मुताबिक, नाव में करीब 25 से 27 लोग ठूंस-ठूंस कर भरे हुए थे, जो उसकी बताई गई कैपेसिटी करीब 15 से कहीं ज़्यादा थी. उनमें से किसी को भी लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी.
इस घटना के संबंध में लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहें न फैलाएं, ना ही घबराएं. क्योंकि जिला प्रशासन लुधियाना के साथ-साथ पंजाब सरकार पहले से ही वृंदावन में अधिकारियों के संपर्क में है.
उन्होंने बताया कि लोगों की मदद के लिए जगरांव के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर लुधियाना में 24×7 डेडिकेटेड हेल्पलाइन नंबर 01624223226 (एसडीएम जगरांव ऑफिस) और 01612403100 (डिप्टी कमिश्नर ऑफिस लुधियाना) भी शुरू किए गए हैं.
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने शोक व्यक्त किया
इस हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बचाए गए लोगों को सही उपचार मिले. साथ ही राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाई जाए.
उन्होंने निर्देश दिया कि मृतकों के परिवारों को निर्धारित मानदंडों के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाए.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘इस दुर्घटना में हुई जानमाल की हानि अत्यंत पीड़ादायक है. मैं भगवान राम से प्रार्थना करता हूं कि दिवंगत आत्माओं को शांति मिले, शोक संतप्त परिवारों को इस क्षति को सहन करने की शक्ति मिले और घायलों को शीघ्र स्वस्थ किया जाए.’
जनपद मथुरा में नाव पलटने से हुई दुर्घटना में जनहानि अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक है।
मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं।
संबंधित अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर बचाव व राहत कार्य संचालित करने और घायलों का समुचित उपचार कराने के निर्देश दिए हैं।
प्रभु श्री राम…
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) April 10, 2026
इस हादसे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी दुख जताया है. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उत्तर प्रदेश में नाव दुर्घटना में कई लोगों की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुखद है. वह शोक संतप्त परिवारजनों के प्रति गहन संवेदना व्यक्त करती हैं. वह घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करती हैं.
मथुरा, उत्तर प्रदेश में नाव दुर्घटना में कई लोगों की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुखद है। मैं शोक संतप्त परिवारजनों के प्रति गहन संवेदना व्यक्त करती हूं। मैं घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करती हूं।
— President of India (@rashtrapatibhvn) April 10, 2026
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति शोक जताते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है. हादसे में घायल हुए लोगों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी.
The Prime Minister has announced that an ex-gratia of Rs. 2 lakh from PMNRF would be given to the next of kin of each deceased. The injured would be given Rs. 50,000. https://t.co/Vs25tsmisK
— PMO India (@PMOIndia) April 10, 2026
