मणिपुर: बिष्णुपुर में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव के बाद तनाव, कर्फ्यू लागू

मणिपुर के बिष्णुपुर ज़िले में मंगलवार को बीते 7 अप्रैल को मोइरांग ट्रोंगलाओबी इलाके में में हुए धमाके, जिसमें दो बच्चों की मौत हो गई थी, के विरोध में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों के साथ टकराव हुआ, जिसमें पांच महिलाओं सहित लगभग 18 नागरिक घायल हो गए.

मणिपुर पुलिस. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: जातीय हिंसाग्रस्त मणिपुर के बिष्णुपुर ज़िले में मंगलवार (14 अप्रैल) को स्थानीय प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव के बाद तनाव बढ़ गया, जिसके चलते हालात को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिए.

खबरों के अनुसार, हिंसा की शुरुआत थिंगुंगेई और पास के निंगथौखोंग क्षेत्रों में हुई, जब हाल ही में मोइरांग ट्रोंगलाओबी इलाके में में हुए धमाके, जिसमें दो बच्चों की मौत हो गई थी, के विरोध में लोग प्रदर्शन कर रहे थे. स्थिति तब और बिगड़ गई जब अपुष्ट खबरें फैलने लगीं कि संदिग्ध पहचान के सशस्त्र लोग क्षेत्र में घूम रहे हैं.

ज्ञात हो कि बिष्णुपुर ज़िला 7 अप्रैल से ही तनावपूर्ण बना हुआ है, जब कुकी लोगों द्वारा किए गए एक कथित बम हमले में दो मेईतेई बच्चों की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाएं निलंबित कर दी हैं. खबरों के अनुसार, मंगलवार को इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाओं पर प्रतिबंध को 48 घटों के लिए बढ़ा दिया गया है.

अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार को हुई घटना में 10 से अधिक लोगों को मामूली चोटें आईं, जबकि गुस्साई भीड़ ने पुलिस की कम से कम दो वाहनों में आग लगा दी.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि इस झड़प में कम से कम 21 प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आईं और पांच प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार कर लिया गया.

पुलिस ने बताया कि हिंसा दोपहर लगभग 1:30 बजे शुरू हुई, जब थिंगुंगेई के पास एक सुरक्षा काफिले को स्थानीय लोगों ने रोक दिया. यह कदम सुरक्षा बलों के बारे में फैली भ्रामक जानकारी के कारण उठाया गया था.

पुलिस के अनुसार, स्थानीय लोगों के एक समूह ने सुरक्षा वाहनों की आवाजाही बाधित कर दी, जिसके बाद स्थिति तेजी से बिगड़ गई. वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया, कुछ में आग लगा दी गई और सुरक्षाकर्मियों को बंधक बनाने की कोशिशें भी की गईं.

पुलिस ने बताया कि स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस सहित नियंत्रित उपायों का इस्तेमाल किया गया.

नॉर्थईस्ट नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस घटना के सिलसिले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि आगजनी, अवैध जमावड़ा और सरकारी कार्य में बाधा डालने में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है. इलाके में विश्वास बहाल करने और सामान्य स्थिति लौटाने के लिए सुरक्षा बलों ने फ्लैग मार्च भी किया.

अधिकारियों ने जनता से अफवाहें या गलत जानकारी न फैलाने की अपील की और हिंसा या आगजनी में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी.

इस बीच, जिला प्रशासन ने शाम 5 बजे से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू कर दिए हैं, जिसके तहत प्रभावित क्षेत्रों में अगली सूचना तक लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई है.

ज्ञात हो कि मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा में अब तक कम से कम 260 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं. यह हिंसा सबसे पहले मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुई थी और अब लगभग सभी समूह इसमें शामिल हो गए हैं. मेईतेई समुदाय मुख्य रूप से इंफाल घाटी के मैदानी इलाकों में रहते हैं, जबकि कुकी पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करते हैं. हिंसा शुरू होने के बाद मेईतेई और कुकी अपने-अपने क्षेत्रों में सिमट गए हैं.