जेपी एसोसिएट्स के अधिग्रहण के लिए एनसीएलएटी ने वेदांता की याचिका ख़ारिज की, अडानी का रास्ता साफ़

वेदांता ने बीते मार्च महीने में एनसीएलटी की इलाहाबाद पीठ के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें जयप्रकाश (जेपी) एसोसिएट्स के अधिग्रहण के लिए अडानी की बोली को मंज़ूरी दी गई थी. एनसीएलएटी ने वेदांता की याचिका को ख़ारिज कर दिया है.

गौतम अडानी. (स्क्रीनग्रैब साभार: फेसबुक/Adani Group)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने सोमवार को खनन कंपनी वेदांता लिमिटेड द्वारा दायर उन अपीलों को खारिज कर दिया है, जिसके अंतर्गत कर्ज़ में डूबी जयप्रकाश (जेपी) एसोसिएट्स लिमिटेड के दिवालिया प्रक्रिया के तहत सफल बोलीदाता के रूप में अडानी एंटरप्राइजेज़ के चयन को चुनौती दी गई थी. 

हिंदुस्तान टाइम की रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई के दौरान एनसीएलएटी के अध्यक्ष जस्टिस अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य बरुन मित्रा ने कहा कि वेदांता द्वारा दायर अपीलों में कोई दम नहीं है.

इस फैसले के बाद अडानी के लिए करीब 14,500 करोड़ रुपये के कर्ज़ में डूबी जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड का अधिग्रहण करने का रास्ता साफ हो गया है.

वेदांता ने मार्च 2026 में एनसीएलटी की इलाहाबाद पीठ के उस आदेश को चुनौती देते हुए एनसीएलएटी का रुख किया था, जिसमें जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण के लिए अडानी की बोली को मंजूरी दी गई थी.

वेदांता की मुख्य दलील यह थी कि प्रतिस्पर्धी बोलियों के बीच बड़ा अंतर था. अडानी एंटरप्राइजेज की योजना 14,535 करोड़ रुपये की थी, वहीं वेदांता ने 17,926 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी. दोनों के बीच करीब 3,400 करोड़ रुपये का अंतर था. हालांकि, कर्जदाताओं ने अडानी एंटरप्राइजेज की बोली को मंजूरी दी थी. 

हालांकि, इस पर एनसीएलएटी ने कहा कि कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) ने यह फैसला अपनी व्यावसायिक समझ के आधार पर लिया है.

ट्रिब्यूनल ने वेदांता की याचिकाएं खारिज करते हुए कहा, ‘सीओसी के फैसले में कोई कानूनी खामी या असंगतता नहीं है.’

वेदांता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिजीत सिन्हा ने दलील दी थी कि बोलियों के बीच का अंतर दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के मूल सिद्धांत (अधिकतम मूल्य प्राप्त करने) से जुड़ा है. उनका कहना था कि वेदांता की समाधान योजना का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया गया और उसके प्रस्ताव के महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया.

वहीं, अख़बार के अनुसार, सीओसी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया आईबीसी के नियमों के अनुसार ही हुई है. उन्होंने ट्रिब्यूनल से कहा कि केवल सबसे ऊंची वित्तीय बोली लगाने से किसी बोलीदाता को चुने जाने का अधिकार नहीं मिल जाता.

उन्होंने बताया कि एक कथित सूचना लीक के बाद वेदांता ने अपनी बोली में संशोधन किया था, जिसमें नेट प्रेजेंट वैल्यू और इक्विटी निवेश जैसे मानकों को बेहतर किया गया था. हालांकि, यह संशोधित प्रस्ताव तय समय सीमा के बाद पेश किया गया था, इसलिए इसे खारिज कर दिया गया. सीओसी के अनुसार, बोलियों का मूल्यांकन केवल कुल रकम के आधार पर नहीं, बल्कि अग्रिम नकद भुगतान, व्यवहार्यता और कार्यान्वयन क्षमता जैसे कई कारकों के आधार पर किया गया.

अख़बार के अनुसार, दूसरी ओर अडानी एंटरप्राइजेज ने कहा कि यह याचिका सीओसी की व्यावसायिक समझ में न्यायिक हस्तक्षेप कराने की अनुचित कोशिश है. 

अडानी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रीतिन राय ने कहा कि वेदांता द्वारा चुनौती दिए गए मूल्यांकन मानदंड पहले से सार्वजनिक थे और सभी बोलीदाताओं पर समान रूप से लागू किए गए थे, जिन्हें सभी ने स्वीकार किया था. उन्होंने कहा कि चुनौती प्रक्रिया समाप्त होने के बाद वेदांता की संशोधित बोली पर विचार करना दिवाला प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को कमजोर करता.