नई दिल्ली: पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण आपूर्ति में आई बाधाओं से कमर्शियल और घरेलू दोनों उपयोगकर्ताओं के लिए खाना पकाने की गैस की उपलब्धता प्रभावित हुई, जिसके चलते अप्रैल में भारत में रसोई गैस की खपत में 16% से अधिक की गिरावट आई है.
डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोलियम और प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में एलपीजी की खपत घटकर 21.98 लाख टन रह गई, जो पिछले वर्ष इसी महीने में दर्ज की गई 26.22 लाख टन की तुलना में 16.16% कम है.
उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2024 की तुलना में इसमें 10.51% की कमी आई है. वहीं, मासिक आधार पर भी इसमें गिरावट दर्ज की गई है. मार्च 2026 में, जो अमेरिका और इज़रायल के साथ ईरान के संघर्ष का पहला महीना था, भारत में एलपीजी की खपत 23.8 लाख टन रही थी.
इसके अलावा अप्रैल में एटीएफ की खपत भी घटकर 7.61 लाख टन रह गई, जो पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 1.37% कम है.
हालांकि, पेट्रोल और डीजल की खपत में वृद्धि हुई है. पेट्रोल की खपत अप्रैल 2025 में 34.49 लाख टन से बढ़कर अप्रैल 2026 में 36.69 लाख टन हो गई, जो 6.36% की वृद्धि दर्शाती है.
वहीं, डीजल की खपत अप्रैल 2025 में 82.61 लाख टन से बढ़कर अप्रैल 2026 में 82.82 लाख टन हो गई, जो 0.25% की मामूली वृद्धि को दिखाती है.
मालूम हो कि 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से एलपीजी और जेट ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जबकि पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग अपरिवर्तित बनी हुई हैं.
हाल ही में केंद्र सरकार ने शुक्रवार (1 मई) को कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी की है, जहां होटलों और रेस्तरां में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये की बढ़ोतरी की गई है.
यह अप्रैल की कीमतों के मुकाबले 40 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी है. इसके साथ ही दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 3,071.50 रुपये हो गई है. पिछले महीने यह 2,078.50 रुपये थी.
एफकेसीसीआई ने एलपीजी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग की
इस बीच, फेडरेशन ऑफ कर्नाटक चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफकेसीसीआई) ने केंद्र को पत्र लिखकर एलपीजी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग की है.
एफकेसीसीआई ने अपने पत्र में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमत में अभूतपूर्व रूप से 993 रुपये की वृद्धि पर गंभीर चिंता जताई है.
एफकेसीसीआई की अध्यक्ष उमा रेड्डी ने बताया कि इस भारी बढ़ोतरी का कई उद्योगों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा और इससे बड़े पैमाने पर मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ेगा.
उन्होंने कहा, ‘हालिया बढ़ोतरी एक ही बार में लगभग 45%-50% की वृद्धि दर्शाती है, जिससे बेंगलुरु में कमर्शियल एलपीजी की कीमतें लगभग 3,100 रुपये से 3,200 रुपये प्रति सिलेंडर और देशभर के प्रमुख शहरों में 3,000 रुपये से अधिक हो जाएंगी.’
उन्होंने आगे कहा कि हाल के समय में यह सबसे तेज़ वृद्धि में से एक है, जिससे व्यवसायों पर असहनीय बोझ पड़ रहा है.
उमा रेड्डी के अनुसार,इससे होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित है और इस क्षेत्र के छोटे प्रतिष्ठानों को या तो भारी नुकसान उठाना पड़ेगा या इसका बोझ उपभोक्ताओं पर डालना पड़ेगा.
रेड्डी ने यह भी बताया कि छोटे उद्यमों में काम करने वाले कई कर्मचारी वंचित समुदायों से आते हैं जो किफायती स्थानीय भोजन पर निर्भर हैं और इन भोजनालयों द्वारा कीमतों में बढ़ोतरी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा.
उन्होंने आगे बताया कि वेल्डिंग और फैब्रिकेशन उद्योग, विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), लागत में भारी वृद्धि का सामना कर रहे हैं, क्योंकि एलपीजी उनके मुख्य कार्यों के लिए एक महत्वपूर्ण इनपुट है.
उन्होंने कहा कि ऊर्जा की बढ़ती लागत के कारण बैटरी निर्माण क्षेत्र भी दबाव में है, जिससे संबंधित उद्योगों में विनिर्माण लागत और बाजार मूल्य पर असर पड़ने की संभावना है.
रेड्डी ने केंद्र सरकार से कमर्शियल एलपीजी पर करों के युक्तिकरण (rationalisation), एमएसएमई के लिए लक्षित राहत सहायता और ईंधन की कीमतों में अस्थिरता को स्थिर करने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप सहित सुधारात्मक उपाय लागू करने का आग्रह किया.
उन्होंने कहा, ‘एफकेसीसीआई केंद्र सरकार से इस भारी वृद्धि को तुरंत वापस लेने और तत्काल सुधारात्मक उपाय शुरू करने का आग्रह करता है.’
संगठन ने सरकार को लिखे पत्र में आगाह किया है कि यदि इस अभूतपूर्व वृद्धि को नजरअंदाज किया गया तो इससे हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र सहित कई उद्योग बुरी तरह प्रभावित होंगे, उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ेगा और आर्थिक गति धीमी हो जाएगी.
फेडरेशन के अनुसार उद्योग अब ऐसे झटकों को सहन नहीं कर सकता और इस समय निर्णायक और तत्काल हस्तक्षेप की सख्त जरूरत है.
गौरतलब है कि इससे पहले फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशंस ऑफ इंडिया (एफएचआरएआई) के उपाध्यक्ष प्रदीप शेट्टी ने भी सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर कीमतों में हुई इस ताजा बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग की थी.
प्रदीप शेट्टी ने कहा था, ‘एलपीजी की कीमतों में हाल की बढ़ोतरी के कारण परोसे जाने वाले खाने की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी लगभग तय लग रही है. लेकिन ये बढ़ोतरी भी शायद लागत की पूरी भरपाई नहीं कर पाएगी.’
उन्होंने कहा था कि 19 किलो वजन वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम में 3 बार में हुई कुल 1,332.50 रुपये की बढ़ोतरी से उद्योग की परिचालन लागत अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है. ऐसा तब है जब कारोबार पहले से ही सप्लाई व्यवधान, सीमित परिचालन क्षमता और कमजोर नकदी प्रवाह जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. ऐसे में 993 रुपये की इस बढ़ोतरी से उनके मार्जिन पर दबाव बढ़ेगा और संचालन अस्थिर हो सकता है.
उन्होंने आगाह किया था कि कई होटल-रेस्टॉरेंट पहले ही अस्थायी रूप से बंद हो चुके हैं और कीमतों में ये नई बढ़ोतरी होटल-रेस्टॉरेंट की बंदी और रोजगार में कटौती को और तेज कर सकती है.
