नई दिल्ली: राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) जल्द ही केंद्र सरकार को सिफारिशें सौंपेगा, जिनमें बलात्कार, गंभीर यौन उत्पीड़न और महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ अन्य जघन्य अपराधों में दोषी ठहराए गए लोगों को पैरोल देने पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की जाएगी.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह निर्णय महाराष्ट्र के पुणे जिले के नसरापुर गांव में हाल ही में हुई उस घटना के बाद लिया गया, जिसमें चार वर्षीय बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी. आरोपी 65 वर्षीय व्यक्ति वर्ष 2015 में पॉक्सो कानून के तहत दोषी ठहराया जा चुका था.
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ जघन्य अपराधों में दोषी कैदियों को पैरोल दिए जाने की मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहतकर ने कहा कि आयोग जल्द ही केंद्र सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगा, जिनमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों में दोषियों के लिए पैरोल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग होगी.
राहतकर ने सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, गरिमा और हिफाज़त को सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए.
आयोग न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए व्यापक संस्थागत सुधारों की भी सिफारिश करेगा, खासकर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामलों में.
प्रस्तावित सिफारिशों में ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की शीघ्र स्थापना, जांच और मुकदमे की कार्यवाही के दौरान समर्पित कानूनी एवं विषय विशेषज्ञों के माध्यम से बेहतर समन्वय, तथा सबूतों की तत्काल जांच, गवाहों के बयान दर्ज करने और जांच पूरी करने के लिए स्वतंत्र एवं समयबद्ध व्यवस्था बनाने की बात शामिल है.
इसके अलावा, आयोग की अध्यक्ष ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) क़ानून और अन्य यौन अपराध कानूनों के तहत दर्ज आदतन अपराधियों और बार-बार अपराध करने वाले आरोपियों पर कड़ी निगरानी और निवारक निगरानी की तत्काल आवश्यकता पर ज़ोर दिया.
आयोग ने सिफारिश की है कि राज्य पुलिस ऐसे अपराधियों पर लगातार निगरानी रखे और कानून के तहत जहां संभव हो, उनसे अच्छे आचरण के बांड भरवाने जैसे निवारक कदम उठाए जाएं, ताकि इस प्रकार के अपराधों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके.
राष्ट्रीय महिला आयोग प्रमुख ने यह भी सिफारिश की कि स्थानीय पुलिस थाने ऐसे व्यक्तियों की नियमित निगरानी करें और समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपें. उन्होंने न्याय प्रक्रिया के हर चरण में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की अधिक जवाबदेही और पीड़ित-केंद्रित तथा संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया.
आयोग ने कहा कि सभी संबंधित विभागों को ऐसी त्वरित, प्रभावी और जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, जो पीड़ितों की गरिमा, सुरक्षा और पुनर्वास को प्राथमिकता दे.
आयोग द्वारा प्रस्तावित सिफारिशों में जेल और पैरोल नियमों में संशोधन भी शामिल हो सकते हैं, ताकि बलात्कार, गंभीर यौन उत्पीड़न, बार-बार किए गए यौन अपराध और पॉक्सो कानून के तहत गंभीर अपराधों को ऐसी श्रेणी में रखा जाए, जिनमें पैरोल या अस्थायी रिहाई की अनुमति न हो.
आयोग अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की भी सिफारिश कर सकता है, जिनमें अनिवार्य जोखिम आकलन, कड़ी पुलिस सत्यापन प्रक्रिया, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी तथा किसी भी अस्थायी रिहाई से पहले पीड़ित या उनके परिवार से परामर्श शामिल हो सकता है.
एक बयान में आयोग ने कहा, ‘राष्ट्रीय महिला आयोग देशभर में महिलाओं और बच्चों के लिए मजबूत कानूनी सुरक्षा, त्वरित न्याय और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के अपने संकल्प को दोहराता है.’
उल्लेखनीय है कि हरियाणा में बलात्कार और हत्या के मामलों में दोषी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 2020 से 15 बार पैरोल मिला है.
मध्य प्रदेश: ज़मानत पर बाहर आए बलात्कार के आरोपी ने नाबालिग पीड़िता की हत्या की
इसी बीच पुलिस ने बताया कि मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में शुक्रवार को 26 साल के एक बलात्कार के आरोपी को गिरफ्तार किया गया. उस पर आरोप है कि ज़मानत पर रिहा होने के बाद उसने नाबालिग पीड़िता की हत्या कर दी.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि आरोपी मनोज अहिरवार, जो सीहोर जिले के भैरोपुर का रहने वाला है, 17 साल की लड़की पर अपनी शिकायत वापस लेने और उससे दूसरी पत्नी के तौर पर शादी करने का दबाव बना रहा था.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अहिरवार ने लड़की को बेहतर ज़िंदगी का वादा करके बहलाया-फुसलाया और बाद में उसके साथ बलात्कार किया.
अखबार के अनुसार, पुलिस की उप-विभागीय अधिकारी (एसडीपीओ) शीला सुराना ने बताया, ‘शुरुआती जांच में पता चला है कि अहिरवार, जो पहले से शादीशुदा था, ने लड़की को बेहतर ज़िंदगी का वादा करके बहलाया और बाद में उसके साथ बलात्कार किया. पुलिस ने पीड़िता को बचाया था और उसके बाद एक साल पहले ‘यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम’ (पॉक्सो) के तहत बलात्कार और अपहरण की शिकायत दर्ज की गई थी. अहिरवार को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन दो महीने पहले उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया था.’
सुराना ने आगे कहा, ‘गुरुवार को वह पीड़िता के घर पहुंचा और फिर से उस पर केस वापस लेने और उससे शादी करने का दबाव बनाने लगा. जब लड़की और उसकी मां ने इसका विरोध किया, तो उसने उन पर हमला कर दिया. लड़की की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसकी मां घायल हो गई और उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया.’
पुलिस ने बताया कि आरोपी को शुक्रवार को भोपाल से गिरफ्तार किया गया. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘पूछताछ के दौरान उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया और माना कि वह चाहता था कि लड़की उसकी दूसरी पत्नी बनकर उसके साथ रहे.’
पुलिस ने बताया कि इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 (हत्या) और 109 (हत्या का प्रयास) के तहत केस दर्ज कर लिया गया है, और आगे की जांच जारी है.
