केरल: दस दिनों के सस्पेंस के बाद कांग्रेस ने डीवी सतीशन को मुख्यमंत्री चुना

केरल में कांग्रेस-नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की विधानसभा चुनावों में जीत के दस दिन बाद पार्टी ने राज्य के पूर्व नेता प्रतिपक्ष वीडी सतीशन को कांग्रेस विधायक दल का नेता नियुक्त कर अगला मुख्यमंत्री घोषित किया. इस पद की दौड़ में सतीशन के अलावा कांग्रेस सांसद और महासचिव केसी वेणुगोपाल तथा वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला भी प्रमुख दावेदार थे.

गुरुवार, 7 मई 2026 को तिरुवनंतपुरम स्थित पार्टी मुख्यालय में कांग्रेस नेता वी.डी. सतीशन का समर्थक स्वागत करते हुए. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केरल में कांग्रेस-नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की विधानसभा चुनावों में जीत के दस दिन बाद पार्टी ने गुरुवार (14 मई) को लगभग दो सप्ताह से जारी सस्पेंस खत्म करते हुए राज्य के पूर्व नेता प्रतिपक्ष वीडी सतीशन को कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) का नेता नियुक्त कर अगला मुख्यमंत्री घोषित किया.

नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस की केरल प्रभारी महासचिव दीपा दासमुंशी ने कहा, ‘कांग्रेस विधायक दल की बैठक 7 मई को तिरुवनंतपुरम में हुई थी, जिसमें सर्वसम्मति से कांग्रेस अध्यक्ष को केरल में सीएलपी का नया नेता नियुक्त करने का अधिकार दिया गया था.’

उन्होंने आगे कहा, ‘इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष, नव-निर्वाचित विधायकों से मिले एआईसीसी पर्यवेक्षकों तथा राज्य के कई अन्य नेताओं, सांसदों और पूर्व पीसीसी अध्यक्षों से विस्तृत चर्चा की. इन सभी विचार-विमर्श के आधार पर यह तय किया गया कि वीडी सतीशन को सीएलपी का नेता नियुक्त किया जाए.’

इस घोषणा के साथ ही लगभग दो सप्ताह से जारी वह सस्पेंस समाप्त हो गया कि राज्य में मुख्यमंत्री पद किसे मिलेगा. इस पद की दौड़ में सतीशन के अलावा कांग्रेस सांसद और महासचिव केसी वेणुगोपाल तथा वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला भी प्रमुख दावेदार थे.

3 मई की शाम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अंतिम दौर की चर्चा की, जो लगभग 40 मिनट तक चली. हालांकि मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा गुरुवार तक टाल दी गई.

जहां तिरुवनंतपुरम में दोपहर 1 बजे सीएलपी की बैठक निर्धारित थी, वहीं गुरुवार सुबह नई दिल्ली में अंतिम समय की बैठकों का दौर चला. वेणुगोपाल ने गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की, जबकि केंद्रीय पर्यवेक्षक अजय माकन और मुकुल वासनिक तथा पार्टी के संचार महासचिव जयराम रमेश ने खरगे से उनके आवास पर मुलाकात की.

4 मई को विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से मुख्यमंत्री पद को लेकर लगातार गहन चर्चा चल रही थी, जिसमें वेणुगोपाल और सतीशन सबसे आगे माने जा रहे थे.

सतीशन को राज्य में कांग्रेस के सहयोगी दलों, खासकर 22 सीटें जीतने वाली इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) का समर्थन पहले ही मिल चुका था. पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार को एक दशक बाद सत्ता से बाहर करने का श्रेय भी काफी हद तक सतीशन को दिया गया.

दूसरी ओर, वेणुगोपाल को कांग्रेस के एक वर्ग के विधायकों का समर्थन प्राप्त था, हालांकि उन्होंने 2026 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था. अगर उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाता, तो राज्य में उपचुनाव कराना पड़ता, क्योंकि वे अलाप्पुझा से लोकसभा सांसद हैं. कांग्रेस नेतृत्व ने भी बहुत कम मौकों पर मौजूदा सांसदों को मुख्यमंत्री बनाया है. ऐसा आखिरी उदाहरण 2018 में देखने को मिला था, जब तत्कालीन सांसद कमल नाथ को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया था.

पिछले कुछ दिनों में मुख्यमंत्री चुनने में देरी को लेकर कांग्रेस की आलोचना भी हुई. पार्टी ने पिछले दस दिनों में व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया, जिसमें राहुल गांधी और पूर्व केपीसीसी अध्यक्षों – एमएम हसन, के. सुधाकरन, के. मुरलीधरन और वीएम सुधीरन – के साथ-साथ सांसद शफी परंबिल के साथ बैठकें शामिल थीं. इस बीच, मुख्यमंत्री चयन में गतिरोध बढ़ने के कारण वायनाड में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ पोस्टर भी सामने आए.

कांग्रेस ने 2026 के विधानसभा चुनावों में 63 सीटें जीतीं, जबकि उसके सहयोगी आईयूएमएल ने 22, केरल कांग्रेस ने 8 और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी ने 3 सीटें जीतीं.