तेलंगाना पुलिस ने पॉक्सो मामले में केंद्रीय मंत्री बी. संजय कुमार के बेटे को गिरफ़्तार किया

भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री बंडी संजय के बेटे साई भागीरथ को तेलंगाना पुलिस ने शनिवार शाम गिरफ़्तार कर लिया. साई भागीरथ के ख़िलाफ़ एक 17 वर्षीय लड़की का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में पॉक्सो क़ानून के तहत केस दर्ज हुआ है.

केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी भगीरथ शनिवार16 मई को हैदराबाद में अपने खिलाफ दर्ज पॉक्सो मामले के सिलसिले में पुलिस के सामने पेश हुए. (फोटो: पीटीआई)

हैदराबाद: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार के बेटे बंडी साई भागीरथ को शनिवार (16 मई) शाम हैदराबाद में पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.

यह मामला अब एक हाई-प्रोफाइल केस बन गया है, क्योंकि भागीरथ के खिलाफ ‘यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम‘ (पॉक्सो) के तहत आरोप दर्ज किए गए हैं.

मालूम हो कि इससे पहले शुक्रवार (15 मई) को तेलंगाना हाईकोर्ट ने भागीरथ को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा देने से इनकार कर दिया था.

केंद्रीय मंत्री कुमार ने इसके तुरंत बाद एक बयान जारी कर दावा किया कि उनके बेटे ने पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन में ‘आत्मसमर्पण’ कर दिया है, जहां यह मामला दर्ज किया गया था.

अपने बयान की शुरुआत ‘सत्यमेव जयते’ शब्दों से करते हुए उन्होंने कहा, ‘कानून के प्रति सम्मान दिखाते हुए और मामले में और देरी से बचने के लिए मैंने अपने बेटे को जांच का सामना करने के लिए भेजा है. मैंने ऐसा तब किया, जब इस बात की पूरी संभावना थी कि अदालत सोमवार (18 मई) को (भागीरथ की) ज़मानत अर्जी पर अपना फ़ैसला सुना देगी.’

हालांकि, मंत्री के दावे के उलट साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर एम. रमेश रेड्डी ने पत्रकारों को बताया कि भागीरथ को नारसिंगी स्थित स्टेट पुलिस अकादमी के पास से गिरफ़्तार किया गया था. इसके बाद उन्हें मजिस्ट्रेट के आवास पर ले जाते समय पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन ले जाया गया.

उधर, केंद्रीय मंत्री कुमार ने अपने बयान में आगे कहा कि उन्होंने अपना वादा निभाया और अपने बेटे के साथ भी कानून के सामने किसी भी आम इंसान जैसा ही बर्ताव किया.

कुमार ने कहा, ‘हम सभी को कानून का पालन करना होता है. मेरा बेटा बार-बार मुझसे कह रहा है कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया है. असल में, जैसे ही उसके खिलाफ शिकायत मिली थी, मैं उसे तुरंत पुलिस थाने में सरेंडर करवाना चाहता था. हमने वकीलों से सलाह ली और उनके सामने सारे सबूत पेश किए. उन सबूतों को देखने के बाद वकीलों ने मुझसे कहा कि यह मामला कानूनी जांच में टिक नहीं पाएगा और मेरे बेटे को ज़मानत मिल जाएगी. इसी वजह से इसमें थोड़ी देरी हुई.’

उन्होंने आगे कहा, ‘आज भी वकील यही कह रहे थे कि उसे ज़मानत मिल जाएगी. लेकिन मुझे लगा कि जांच में और ज़्यादा देरी करना सही नहीं होगा. इसलिए, मैं अपने बेटे को लेकर आया और वकीलों की मौजूदगी में उसे पुलिस के हवाले कर दिया. मुझे कानून पर पूरा भरोसा है.’

ज्ञात हो कि गुरुवार (14 मई) को करीमनगर में भागीरथ के चाचा डॉ. वामशीचंद को एक नोटिस मिलने के बाद शनिवार को भागीरथ ने पुलिस के सामने सरेंडर करने की पेशकश की थी. पुलिस ने शुक्रवार दोपहर 2 बजे उन्हें पेश होने को कहा था, लेकिन खबरों के मुताबिक उन्होंने पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन को एक ईमेल और एक चिट्ठी भेजकर इस मामले में सबूत इकट्ठा करने के लिए दो दिन का समय मांगा था.

हालांकि, पुलिस ने न तो ईमेल मिलने की बात मानी और न ही चिट्ठी मिलने की.

ध्यान रहे कि यह घटनाक्रम तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की उन तीखी टिप्पणियों के बाद सामने आया है, जिनमें उन्होंने शुक्रवार को एक मीडिया कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री कुमार पर निशाना साधा था.

उन्होंने कहा था कि मंत्री का अपने बेटे को छिपाना नैतिक रूप से गलत है. रेड्डी ने कहा था कि जब भागीरथ पर आपराधिक आरोप लगे, तो उनका भाग जाना सही नहीं था.

सीएम रेड्डी के अनुसार, ‘अगर संजय अपने बेटे को बचाना जारी रखते हैं, तो वे कानून की गलत तरफ हैं. अपने पद की गरिमा बढ़ाने के लिए आप उन्हें तुरंत सरेंडर करवाएं. अगर वह जांच का सामना करते हैं, तो लोग आपकी सराहना करेंगे.’

मुख्यमंत्री ने चेतावनी भी दी थी कि अगर देरी हुई, तो पुलिस अपने तरीके से कार्रवाई करेगी. रेड्डी ने पीड़ित लड़की के साथ खड़े रहने का भी वादा किया था.

इस आलोचना का खंडन करते हुए कि सरकार कार्रवाई नहीं कर रही है, रेड्डी ने पलटवार करते हुए पूछा कि क्या सरकार को बेटे की गलत हरकत के लिए पिता को गिरफ्तार कर लेना चाहिए था? यह मामला बच्चों के भविष्य से जुड़ा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को सावधानी से कदम उठाना पड़ा.

मामले की पिछली बातों पर गौर करते हुए रेड्डी ने कहा कि इसकी शुरुआत पिछले साल 31 दिसंबर से पहले हुई थी. पुलिस को लड़की की आयु से जुड़े अहम सबूत जुटाने पड़े, क्योंकि ऐसे आरोप सामने आए थे कि लड़की बालिग है और उसके पास दो जन्म प्रमाण पत्र हैं. जिस अस्पताल में लड़की की मां भर्ती थी, वहां से उसके जन्म से जुड़ी जानकारी जुटाने में 24 घंटे लगे. उन्होंने बताया कि इसके अलावा, आधार से जुड़ी जानकारी भी हासिल की गई.

सीएम रेड्डी ने किसी के भी खिलाफ बदले की भावना से काम करने से भी इनकार किया. उन्होंने कहा, ‘क्या मैं केसीआर (पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव) से बदला ले रहा हूं, जिन्होंने मुझे जेल में डाला था?’

सीएम रेड्डी ने यह भी बताया कि पीड़ित लड़की की मां से शिकायत 8 मई को मिली थी. पुलिस ने उसी दिन लड़की का बयान दर्ज कर लिया था, लेकिन एफआईआर अगले दिन दर्ज की. इसमें कहीं भी कोई देरी नहीं हुई.

हालांकि, इससे दो घंटे पहले भागीरथ ने करीमनगर में पीड़ित परिवार पर ‘हनी ट्रैप’ का आरोप लगाते हुए एक अलग शिकायत दर्ज कराई थी. ये दोनों मामले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाजपा की रैली के लिए हैदराबाद पहुंचने से पहले ही दर्ज कर लिए गए थे.

रेड्डी ने कहा, ‘लेकिन, पुलिस स्टेशन में लड़की का बयान दर्ज होते ही भागीरथ वहां से भाग गया. अगर पुलिस बिना बयान दर्ज किए संजय के घर जाती, तो हम पर ‘राजनीतिक बदले की भावना’ से काम करने का आरोप लग सकता था. पीएम मोदी के दौरे के बाद पुलिस ने भागीरथ को विधिवत नोटिस भेजा, लेकिन वह हाज़िर नहीं हुआ.’

पुलिस का बचाव करते हुए रेड्डी ने कहा कि पीएम मोदी की यात्रा की सुरक्षा के लिए लगभग 9,000 वर्दीधारी जवानों को तैनात किया गया था. पूरी पुलिस मशीनरी उनकी यात्रा पर केंद्रित थी, क्योंकि हैदराबाद पूरे देश में आतंकवादी गतिविधियों के लिहाज़ से एक संवेदनशील जगह के तौर देखा जा रहा था.

उन्होंने आगे कहा, ‘पीएम मोदी की यात्रा के बाद हमने सोमवार को इस मामले पर विशेष ध्यान दिया और एक महिला आईपीएस अधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया. भागीरथ का पता लगाने के लिए पांच टीमें भेजी गईं. यह सुनिश्चित करने के लिए लुकआउट नोटिस भी जारी किए गए कि वह देश छोड़कर भाग न जाए.’

शनिवार को पुलिस ने बंजारा हिल्स और करीमनगर में केंद्रीय मंत्री कुमार के घरों की तलाशी ली. इसी बीच मंत्री की मां को सीने में दर्द की शिकायत के बाद हैदराबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्हें स्टेंट लगाने की ज़रूरत पड़ी.

इस दौरान हैदराबाद की एक सिविल कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री कुमार द्वारा दायर मानहानि की याचिका पर 23 न्यूज़ चैनलों और मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों के खिलाफ एक अंतरिम निषेधाज्ञा जारी की है.

मंत्री ने आरोप लगाया था कि ये चैनल उनके खिलाफ एक बदनामी भरा अभियान चला रहे हैं. यह आदेश ऑनलाइन और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स, टेलीविज़न चैनल, वेबसाइट्स और अन्य मीडिया माध्यमों को दिया गया, जिन्हें निर्देश दिया गया कि वे उनके द्वारा अपलोड और प्रसारित किए गए सभी मानहानिकारक वीडियो, क्लिप, इंटरव्यू, प्रेस मीट की रिकॉर्डिंग, बयान, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य सभी सामग्री को तुरंत हटा दें.

मंत्री के कार्यालय से जारी एक बयान में चेतावनी दी गई कि यह एक ‘जॉन डो आदेश’ (John Doe Order) है, जो फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब, वॉट्सऐप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर भी लागू होता है. इन प्लेटफ़ॉर्म को शनिवार को हैदराबाद के सिटी सिविल कोर्ट में वेकेशन सिविल जज-सह-XXVI अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश की अदालत में दायर मानहानि याचिका (OS No. 208/2026) में विशेष रूप से पक्षकार नहीं बनाया गया था.

इस ‘गैग ऑर्डर’में शामिल 23 पक्षों में गूगल, मेटा प्लेटफॉर्म आईएनसी, एक्स कॉर्प और लोकप्रिय तेलुगू समाचार चैनल शामिल थे.

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