मध्य प्रदेश में एक ही दिन क़रीब पचास नौकरशाहों द्वारा 2,000 हेक्टेयर भूमि खरीदना संदेहास्पद: सीसीजी

सेवानिवृत्त लोकसेवकों के मंच 'कॉन्स्टिट्यूशनल कंडक्ट ग्रुप' ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को खुला पत्र लिखकर कहा कि देशभर के लगभग 50 आईएएस, आईपीएस अधिकारियों ने 4 अप्रैल 2022 को एक ही दिन भोपाल के कोलार इलाके के पास प्लॉट खरीदे. यह खरीद 3,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावित 'भोपाल वेस्टर्न बाईपास' के आसपास हुई है. ज़मीन खरीद के लगभग 16 महीने बाद अगस्त, 2023 में इस परियोजना को मंज़ूरी मिली थी.

(प्रतीकात्मक फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स)

नई दिल्ली: सेवानिवृत्त भारतीय लोकसेवकों के मंच ‘कॉन्स्टिट्यूशनल कंडक्ट ग्रुप’ (सीसीजी) के सदस्यों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक खुला पत्र लिखकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों (आईपीएस) द्वारा हाल ही में 2,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि खरीदे जाने पर आश्चर्य और चिंता व्यक्त की है.

15 मई 2026 की तारीख वाले इस पत्र पर 62 पूर्व लोकसेवकों के हस्ताक्षर हैं. उन्होंने कहा, ‘10 अप्रैल 2026 को दैनिक भास्कर में प्रकाशित उस समाचार से हम स्तब्ध हैं, जिसमें आपके राज्य के कोलार क्षेत्र के गुराड़ी घाट गांव में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों द्वारा जमीन खरीदने की बात कही गई है. ये आरोप गंभीर हैं.’

उन्होंने दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के आधार पर इन आरोपों को सात बिंदुओं में गिनाया.

अखबार के अनुसार, मध्य प्रदेश में आईएएस अधिकारियों द्वारा जमा किए गए ‘अचल संपत्ति रिटर्न’ (आईपीआर) जांच से पता चला कि भोपाल के कोलार इलाके के पास गुराड़ी घाट गांव में ज़मीन में भारी निवेश किया गया है. ख़बरों के अनुसार, देशभर के लगभग 50 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने 4 अप्रैल 2022 को एक ही दिन ज़मीन के प्लॉट खरीदे.

यह ज़मीन खरीदी – प्रस्तावित 3,200 करोड़ रुपये के ‘भोपाल वेस्टर्न बाईपास’ के आसपास हुई है. इस ज़मीन खरीद के लगभग 16 महीने बाद 31 अगस्त, 2023 को इस परियोजना को मंज़ूरी मिली थी.

ख़बरों के अनुसार, अधिकारियों ने उक्त गांव में 2.023 हेक्टेयर कृषि भूमि एक ही पंजीकृत दस्तावेज़ के माध्यम से खरीदी, जबकि उनके द्वारा कोई सहकारी संस्था गठित नहीं की गई थी.

पत्र के अनुसार, डीड में बिक्री की रकम 5.50 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि उस समय ज़मीन का बाज़ार मूल्य 7.78 करोड़ रुपये था. इसके अलावा, बाईपास परियोजना को मंज़ूरी मिलने के बाद ज़मीन की कीमतें आसमान छूने लगीं.

उन्होंने कहा, ‘सिर्फ 16 महीने बाद 31 अगस्त 2023 को राज्य सरकार ने फांडा से रतनपुर तक पश्चिमी बाईपास सड़क निर्माण को मंजूरी दी, जो खरीदी गई भूमि से मात्र 500 मीटर की दूरी से गुजरती है.’ उन्होंने आगे कहा कि जून 2024 में उस जमीन का उपयोग ‘कृषि’ से बदलकर ‘रिहायशी’ कर दिया गया.

पत्र में कहा गया है कि,‘अप्रैल 2022 में गांव में ज़मीन की कीमत 81.75 रुपये प्रति वर्ग फुट थी, जून 2024 में (बाईपास सड़क की स्वीकृति के बाद) यह 557 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई. मौजूदा दर (ज़मीन के इस्तेमाल में बदलाव के बाद) 2,500 से 3,000 रुपये प्रति वर्ग फुट है.’

पत्र में कहा, ‘अधिकारियों द्वारा खरीदी गई ज़मीन की कीमत में महज़ चार सालों में 50 से 60 करोड़ रुपये का इज़ाफ़ा हुआ है.’

उन्होंने कहा कि यह ‘अत्यंत असामान्य’ है और महज़ संयोग नहीं हो सकता कि इतने सारे अधिकारियों ने एक ही दिन, एक ही क्षेत्र में भूमि खरीदी हो. उन्होंने यह भी कहा कि एक ही जमीन के टुकड़े के लिए शेयरधारकों की इतनी अलग-अलग सूची, किसी निजी रिहायशी निवेश/खरीद की तुलना में किसी व्यावसायिक लेनदेन में अधिक सामान्य होती है.

उन्होंने पूछा, ‘उठी हुई शंकाओं से अलग भी….अगर इन 50 अधिकारियों का कोई साझा उद्देश्य था, तो उन्होंने सहकारी संस्था का पंजीकरण क्यों नहीं कराया और उसी संस्था के माध्यम से खरीद क्यों नहीं की?’ उन्होंने कहा कि यही सबसे स्वाभाविक और पारदर्शी तरीका होता.

उन्होंने कहा, ‘ऐसा न करने से इस सौदे के असली मकसद और इसकी पारदर्शिता को लेकर गंभीर संदेह पैदा होते हैं.’

सीसीजी ने इस बात की जांच की मांग की है कि क्या इस मामले में शामिल कोई भी अधिकारी मध्य प्रदेश कैडर का था और क्या उसके संबंध बाईपास प्रोजेक्ट या ज़मीन के इस्तेमाल की मंज़ूरी देने वाली प्रक्रिया से जुड़े विभागों से थे.

उन्होंने कहा, ‘सरकारी अधिकारी, खासकर अखिल भारतीय सेवाओं (एआईएस) से जुड़े अधिकारी, कानून के अंतिम संरक्षक होते हैं. अगर उन पर अपने निजी फायदे के लिए कानून में हेरफेर करने का कोई भी आरोप लगता है, तो उसकी पूरी, त्वरित और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.’

इस बीच, एक और समूह, ‘सिस्टम परिवर्तन अभियान’ (एसपीए) ने प्रस्तावित बाईपास के आसपास हुए ज़मीन के सौदों की उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है. एसपीए का आरोप है कि अधिकारियों ने बेईमानी से ज़मीन के प्लॉट हासिल किए हैं.

एसपीए, जो मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार-विरोधी मुहिम चलाने वाला एक संगठन है, ने मुख्यमंत्री यादव को पत्र लिखकर 35 किलोमीटर लंबे इस परियोजना को तुरंत रद्द करने की मांग की है. संगठन का दावा है कि इस परियोजना का रास्ता (अलाइनमेंट) तीन बार बदला गया, लेकिन इसका फ़ायदा लगातार नौकरशाहों को ही मिलता रहा.