पंजाब: हरभजन सिंह के राज्यसभा सीटों के ‘सौदे’ के दावे को आप ने नकारा, विपक्षी कांग्रेस ने जांच की मांग की

आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने हाल ही में अपनी पूर्व पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि आप ने पंजाब की राज्यसभा सीटें बेची थीं. हरभजन के इस दावे पर विपक्षी दल के नेताओं ने इस वित्तीय लेन-देन के जांच की मांग की है.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: बीते महीने अप्रैल में ही आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा ) में शामिल हुए पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने हाल ही में अपनी पूर्व पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि आप ने पंजाब की राज्यसभा सीटें बेची थीं. उनके इस दावे के बाद पंजाब के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई और  विपक्षी दल के नेताओं ने इस वित्तीय लेन-देन के जांच की मांग कर दी.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘22 मई को हरभजन सिंह ने अपने एक बयान में अपनी पूर्व पार्टी आप पर आरोप लगाते हुए कहा था कि पंजाब को ‘लूटा और निगल लिया’ गया है.

उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था, ‘जो लोग मुझे ‘गद्दार’ कह रहे हैं, वे पहले अपने ही लोगों से पूछें कि पंजाब की राज्यसभा सीट कितने में बिकी थी. अगर वे आपको नहीं बताते, तो मैं आपको बताऊंगा कि किसे कितनी रिश्वत मिली और किसकी तरफ से मिली. और कैसे किसी को पंजाब को लूटने और ‘लाला’ तक माल पहुंचाने के लिए मंत्री या चौकीदार बनाया गया.’

अखबार ने हरभजन के इन आरोपों पर पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा के हवाले से कहा है कि हरभजन सिंह के इस बयान ने ‘कड़वी सच्चाई को बेनकाब कर दिया है.’

बाजवा के अनुसार, ‘पंजाब की जनता अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान से जवाब की हकदार है. पंजाब के हितों को किसने बेचा? राज्यसभा की सीटों का सौदा किसने किया?’

बाजवा ने इन आरोपों की सेंट्रल विजिलेंस कमीशन से जांच कराने की भी मांग की.

वहीं, कांग्रेस नेता परगट सिंह ने भी कहा कि हरभजन सिंह को इन कथित ‘खरीद-फरोख्त’ का ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए.

उन्होंने यह भी मांग की कि पंजाब भाजपा अपने सांसदों के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करे और इस कथित भ्रष्टाचार से जुड़े पूरे तथ्य जनता के सामने रखे.

रिपोर्ट में पूर्व सांसद बिक्रम सिंह मजीठिया के हवाले से कहा गया है कि हरभजन सिंह की बातें ‘सब कुछ साफ़ कर देती हैं’ और यह बताती हैं कि राज्यसभा की सीटें बेची गईं तथा पंजाब की राजनीतिक व्यवस्था से समझौता किया गया.

इस बीच आम आदमी पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज ने इन आरोपों का खंडन करते पूर्व क्रिकेटर से यह स्पष्ट करने को कहा कि यदि वास्तव में ऐसी कोई रकम दी गई थी, तो कथित तौर पर वह पैसा किसे मिला.

सौरभ भारद्वाज के अलावा पंजाब के मंत्री हरपाल चीमा ने हरभजन सिंह को निशाने पर लेते हुए कहा कि वह चार साल तक चुप क्यों रहे? क्या उन्हें यह बात आज ही याद आई, भाजपा में शामिल होने के बाद?

चीमा ने आगे कहा, ‘अब, वह भाजपा के तोते बन गए हैं और इसी तरह बोलेंगे.’

मालूम हो कि इससे पहले हरभजन सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद उनके प्रति काफी आक्रोश देखने को मिला था. घर के बाहर ‘गद्दार’ तक लिख दिया था, जिसको लेकर खूब बवाल देखने को मिला था. हाल ही में इस मामले ने दोबारा तूल पकड़ लिया है, क्योंकि एक सोशल मीडिया यूजर ने हरभजन को ‘गद्दार’ कह कर संबोधित किया, जिस पर हरभजन की कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली.

दरअसल, सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति ने हरभजन सिंह को ‘गद्दार’ कहते हुए पूछा था कि जिस नेता को आप दिन-रात गाली देते रहते हैं. आपने उस नेता द्वारा दी गई राज्यसभा सीट से इस्तीफा क्यों नहीं दिया.

इसके जवाब में हरभजन सिंह ने लिखा – ‘सही समय आने पर आपकी हर एक बात का जवाब दिया जाएगा. मैंने आपके किसी भी लीडर को गाली नहीं दी है. मैं अपनी जुबान क्यों गंदी करूं? जो लोग मुझे ‘गद्दार’ कह रहे हैं उन्हें पहले अपने लोगों से पूछना चाहिए कि पंजाब राज्यसभा सीट कितने में बेची? अगर वे आपको ना बताएं तो मैं बताऊंगा किसको कितना पैसा मिला और किसने दिया. पंजाब को लूटने के लिए और लाला को माल पहुंचाने के लिए कैसे किसी को मंत्री बनाया गया. पंजाब को लूटा और हड़प लिया गया.’

इसके बाद हरभजन सिंह ने एक अन्य शख्स की बात का जवाब देते हुए लिखा, ‘वह राजनीतिक पार्टी ही थी, जिसने मेरे घर के बाहर पुतला जलाया और गद्दार लिखा. सामान्य लोग ऐसा नहीं करते हैं. पार्टी के लोगों को ऐसा करने के निर्देश किसने दिए. इस देश ने मुझे बहुत सारा प्यार दिया है, 20 साल तक मैंने खेल के मैदान पर रहकर देश का मान बढ़ाया है. आपके लोग सोचते हैं कि वे मेरे नाम के साथ कोई टैग लगा देंगे और वह हमेशा के लिए लगा रह जाएगा. यह उनकी घटिया सोच को दर्शाता है.’

गौरतलब है कि हरभजन सिंह उन सात आम आदमी पार्टी नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने बीते 24 अप्रैल को भाजपा का दामन थाम लिया था. हरभजन के अलावा राघव चड्ढा, संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी भी भाजपा में शामिल हुए हैं.