जम्मू-कश्मीर: बडगाम में नाबालिग लड़की के साथ कथित बलात्कार और हत्या की घटना के बाद भारी आक्रोश

जम्मू-कश्मीर के बडगाम ज़िले में लापता बताई जा रही 12-वर्षीय एक लड़की रविवार (24 मई) को अपने घर से लगभग 200 मीटर दूर मृत पाई गई. पुलिस ने इसे प्रथम दृष्टया बलात्कार और हत्या का मामला बताया है. इस घटना के बाद इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल है. राजनीतिक दलों ने घटना की निंदा करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रबर्ती/द वायर)

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के बडगाम ज़िले में एक नाबालिग लड़की की हत्या और कथित रेप की घटना से पूरे कश्मीर में तनाव का माहौल बन गया है. लड़की के परिवार और राजनीतिक दल समेत कई लोग दोषियों के ख़िलाफ़ तुरंत कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले को लेकर बडगाम के एसएसपी हरिप्रसाद केके ने बताया कि शनिवार शाम (23 मई) से लापता बताई जा रही एक 12-वर्षीय लड़की रविवार को अपने घर से लगभग 200 मीटर दूर मृत पाई गई.

एसएसपी ने आगे कहा, ‘सुबह करीब 7:15 बजे लड़की का शव बरामद किया गया. मेडिकल-लीगल औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं. पहली नज़र में यह रेप और हत्या का मामला लग रहा है. हम इस मामले को सुलझाने की कोशिश करेंगे और दोषियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा.’

इस संबंध में एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि बडगाम पुलिस स्टेशन में इस घटना को लेकर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 137(1) (अपहरण) और 103 (हत्या) के तहत एक एफआईआर (नंबर 139/2026) दर्ज की गई है.

पुलिस के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया है.

वहीं, मृतक लड़की के चाचा अब्दुल हामिद ने बताया कि शनिवार शाम करीब 4 बजे लड़की अपने पड़ोस में स्थित एक इस्लामी मदरसे में गई थी, लेकिन वह घर नहीं लौटी; जिसके बाद परिवार और पड़ोसियों ने पुलिस के साथ मिलकर उसकी तलाश शुरू की.

चाचा के अनुसार, ‘हमें नहीं पता कि उसका अपहरण किया गया था या असल में क्या हुआ था. हमने पूरी रात उसे ढूंढ़ा, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली. आज सुबह हमें उसका शव मिला. उसके पास ही उसकी कुरान पड़ी थी. ऐसा लग रहा था कि उसके साथ बुरी तरह से मारपीट की गई थी.’

परिवार ने लड़की की खोजबीन के दौरान पुलिस की मदद के लिए सराहना भी की.

हामिद ने आगे बताया कि मृतक पीड़िता कक्षा 5 की छात्रा थी, उसके शव की हालत को देखकर ऐसा लगता है कि जब हमलावरों ने उस पर हमला किया तो उसने उनका विरोध किया था.

उन्होंने कहा, ‘उसका शरीर पानी में पड़ा था. उसकी मुट्ठियां कसकर भींची हुई थीं और उसके हाथ में घास थी. उसकी आंखों के नीचे भी बड़े-बड़े घाव थे.’

उन्होंने सरकार से हमलावरों की पहचान करने का आग्रह किया.

उल्लेखनीय है कि रविवार सुबह पीड़िता का शव बरामद होने और उसे अंतिम संस्कार के लिए उसके घर ले जाए जाने के बाद गालवानपोरा गांव में शोक की लहर दौड़ गई. लड़की की अंतिम विधि में सैकड़ों लोग शामिल हुए.

इस दौरान जब नाबालिग बच्ची का शव जब दफ़नाने के लिए ले जाया जा रहा था, तब शोक मना रहे लोगों ने ‘कातिल को पेश करो, मुल्ज़िम को फांसी दो’ के नारे लगाए.

बता दें कि मृतक पीड़िता के परिवार में उसके पिता हैं, जो जम्मू-कश्मीर पुलिस में कार्यरत हैं; उसकी मां हैं, जो एक गृहिणी हैं; और उसका भाई है.

एक महिला, जिनकी तत्काल पहचान नहीं हो पाई ने पीड़िता के घर के बाहर जमा पत्रकारों से कहा, ‘अगर एक पुलिसवाले की बेटी के साथ ऐसा बर्ताव होता है, तो कोई भी अंदाज़ा लगा सकता है कि आम लोगों का क्या हश्र होगा. दोषियों को फांसी दी जानी चाहिए.’

इस घटना को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ‘बेहद दुखद’ और चौंकाने वाली बताते हुए कहा, ‘ऐसे में जहसंबंधित एजेंसियां इस हत्या के हालात की जांच कर रही हैं, तब यह भी ज़रूरी है कि हम इस बात पर विचार करें कि एक समाज के तौर पर हम किस दिशा में जा रहे हैं, जहां हमारे छोटे बच्चे भी सुरक्षित नहीं हैं.’

उन्होंने आगे कहा, टमैं बिना किसी शर्त या हिचकिचाहट के इस क्रूर हमले की कड़ी निंदा करता हूं और उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं. ईश्वर उन्हें जन्नत में जगह दे. मेरी सरकार उन लोगों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलवाने के लिए एजेंसियों को हर संभव सहयोग देगी, जो इस मामले में दोषी पाए जाएंगे.’

मालूम हो कि इस घटना को लेकर पूरे कश्मीर में भारी आक्रोश देखा जा रहा है. क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के साथ-साथ मुख्य धर्मगुरु मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने भी दोषियों के ख़िलाफ़ तुरंत कार्रवाई की मांग की है.

एक बयान में मीरवाइज़ ने कहा कि इस हत्या के हालात ‘बेहद दर्दनाक’ हैं और इंसान की अंतरात्मा को झकझोर देने वाले हैं.

उन्होंने आगे कहा, ‘हम एक समाज के तौर पर क्या बनते जा रहे हैं, अगर हमारे बच्चे शिक्षा और मार्गदर्शन पाने के लिए जाते समय भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते? ऐसी घटनाएं लोगों में डर, दुख और गहरी चिंता फैलाती हैं, और हर स्तर पर गंभीर आत्म-मंथन की मांग करती हैं. एक पूरी, पारदर्शी और समय-सीमा के भीतर जांच की जानी चाहिए, और इस जघन्य कृत्य के लिए ज़िम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाकर कानून के तहत सबसे कड़ी सज़ा दी जानी चाहिए.’

वहीं, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा कि बलात्कार के आरोप के बाद यह मामला और भी संगीन हो जाता है.

उन्होंने कहा, ‘बडगाम में 12 साल की एक बच्ची की बेरहमी से हत्या के बारे में सुनकर मैं पूरी तरह टूट गई हूं. बलात्कार के आरोपों से यह मामला और भी ज़्यादा चौंकाने और परेशान करने वाला बन जाता है. यह सोचकर ही रूह कांप उठती है कि क्या हमारे बच्चे सचमुच सुरक्षित हैं.’

महबूबा की तरह ही पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ़्ती ने भी एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘एक 12 साल की बच्ची बडगाम में दारसगाह के लिए निकली, लेकिन फिर कभी वापस नहीं लौटी. उसके आखिरी पलों में जो कुछ हुआ, वह रूह कंपा देने वाला है. हम किस ओर जा रहे हैं? अगर हम एक नाबालिग बच्ची की भी रक्षा नहीं कर सकते? किस तरह का इंसान एक मासूम बच्ची की बेरहमी से हत्या कर सकता है? उम्मीद है कि पुलिस इस विकृत अपराधी को गिरफ्तार करेगी.’

गौरतलब है कि बडगाम में नाबालिग लड़की के साथ कथित बलात्कार और हत्या की घटना, साल 2007 की एक ऐसी ही वारदात की याद दिलाती है, जिसमें उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा में 8वीं कक्षा की एक छात्रा का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई थी.

लंबे चले मुकदमे के बाद इस मामले में गिरफ्तार चार आरोपियों को 2015 में कुपवाड़ा जिले की एक अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई थी.